#KarnatakaLesson: कर्नाटक जीत के बाद कांग्रेस को मिली संजीवनी बूटी, जीता का फार्मूला कर रही है तैयार!

दिल्ली: कर्नाटक में बहुमत साबित ना कर पाने के बाद भाजपा की हार को अब कांग्रेस व अन्य पार्टियां बड़ा हथियार बना सकती है। कांगे्रस और अलग-अलग राज्य में क्षेत्रीय पार्टियों के गठजोड़ को भी कर्नाटक जीत से मजबूती मिलती दिख रही है। आने वाले 2019 के लोकसभा चुनाव में कांगे्रस कर्नाटक वाला फार्मूला आपना सकती है।

इस पर कांग्रेस ने अभी से काम करना शुरू भी कर दिया है। कर्नाटक की जीत के बाद राहुल गांधी ने शनिवार को अपनी प्रेस वार्ता में इस बात के संकेत दे दिय है। प्रेस वार्ता में पहली बार राहुल 2019 लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाते हुए सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश करते हुए दिखे। कांग्रेस अध्यक्ष के बयान के बाद सभी पार्टियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। सभी राहुल के सुर में सुर मिलाते हुए भाजपा को घेरते हुए दिखे। कर्नाटक के फार्मूले को कांग्रेस इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों और अगले साल के लोकसभा चुनावों में लागू कर सकती है। यदि वह ऐसा करती है तो इससे वह 11 राज्यों की 12 बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ चुनाव से पहले या बाद में गठबंधन करके भाजपा को सरकार बनाने से रोक सकती है।

आइये नज़र डालते हैं कहां-कहां हो सकता है गठबंधन
यूपी में लोकसभी की 80 सीटें। यहां भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस, बसपा और सपा के साथ गठबंधन कर सकती है। महाराष्ट्र मेें 48 सीटें हैं। यहां कांग्रेस और एनसीपी मिलकर भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। दोनों पहले ही साथ चुनाव लडऩे का संकेत दे चुके हैं। इसमें शिवसेना के शामिल होने की अटकले हैं।

वहीं पश्चिम बंगाल में 42 सीटे हैं। ममता बनर्जी लगतार मोदी सरकार पर हमला करती रहती हैं। यहां कांग्रेस और टीएमसी मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं बिहार में 40 सीटें हैं कांग्रेस यहां राजद के साथ मिलकर लोकसभा का चुनाव लड़ सकती है। पहले से ही दोनों का गठबंधन है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएसएलपी के भी शामिल होने की संभावना है।

इसके अलावा तमिलनाडु में  39 सीटें हैं कांग्रेस और डीएमके ने पिछले साल विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था। दोनों 2019 में भाजपा के खिलाफ एक बार फिर साथ आ सकते हैं। वहीं कर्नाटक में 28 सीटें है। विधानसभा की तरह लोकसभा चुनाव में भी जेडीएस और कांग्रेस गठबंधन कर सकते हैं।

इसके अलावा आंध्रपद्रेश में 25 सीटें हैं। विशेष राज्य का दर्जा ना मिलने पर भाजपा से नाता तोड़ चुकी टीडीपी कांग्रेस का हाथ थाम सकती है। तेलंगाना में 17 सीटें हैं। राज्य में टीआरएस भाजपा के खिलाफ तीसरे मोर्चे की वकालत कई मौके पर कर चुकी है।

ऐसे में वह कांग्रेस का साथ दे सकती है। वहीं झारखंड में 14 सीटें हैं। यहां भी कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा साथ आ सकते हैं। कई उपचुनाव साथ मिलकर लड़ चुके हैं। वहीं हरियाणा में 10 सीटें हैं। यहां इंडियन नेशनल लोकदल और कांग्रेस हाथ मिला सकते हैं। इसके अलावा जम्मू- कश्मीर में 6 सीटें है। यहां नेशलन कॉन्फ्रेंस यानि एनसी और कांग्रेस भाजपा को टक्कर देने के लिए साथ आ सकते हैं।

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