#KarnatakaVerdict:क्या कर्नाटक में भाजपा को सत्ता तक पहुंचने से रोक सकती है कांग्रेस व जेडीएस?

बेंगलुरु: कर्नाटक चुनाव के नतीजों ने भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने तो आयी है पर यह देखने काफी अहम होगा कि क्या कर्नाटक में भाजपा सत्त पर आसीन हो सकती है या नही। भाजपा सत्ता के जादुई आंकड़ के करीब पहुंचकर रूक गयी। ऐसे में सरकार बनाने के लिए उसे गठबंधन करना पड़ सकता है। इस बीच कांग्रेस पार्टी बीजेपी को सत्ता हासिल करने से रोकने के लिए अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गई है। कांग्रेस देवीगोड़ा की पार्टी जेडीएस के बीच समर्थक को लेकर राज्य में राजनीति हलचल बढ़ा दी है। आगर कांग्रेस और देवीगोड़ा की पार्टी के बीच गठबंधन होता है तो भाजपा को विपक्ष ने रहने होगा।


बीजेपी का शतक लगते ही बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक पार्टी कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। कर्नाटक के नतीजे कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए बड़ा झटका है। उनकी रणनीति एक बार फिर फेल हो गई है। हालांकि बताया जा रहा है कि कांग्रेस बड़ी पार्टी न बनने की दशा में सरकार में शामिल होने की नई रणनीति पर काम कर रही है।

अगर ऐसा नहीं होता है तो कांग्रेस पार्टी मात्र पंजाब, पुडुचेरी और मिजोरम में सिकुड़ कर रह जाएगी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चामुंडेश्वरी सीट से चुनाव हार गए हैं। हालांकि उनके बेटे यतींद्र वरुणा क्षेत्र से जीत गए हैं। सिद्धारमैया और कांग्रेस नेताओं के बीच मुख्यमंत्री आवास पर बैठक हुई है। आपको बता दें कि राज्य में विधानसभा की कुल 225 सीटें हैं जिनमें से 224 पर विधायकों का निर्वाचन होता है जबकि एक सीट पर सदस्य का मनोनयन किया जाता है।

1985 के बाद से कर्नाटक की जनता ने किसी भी राजनीतिक दल पर लगातार दो बार भरोसा नहीं जताया है। अंतिम बार रामकृष्ण हेगड़े की अगुआई में जनता दल की लगातार दूसरी बार सरकार बनी थी। इस बार भी साफ दिख रहा है कि जनता ने कांग्रेस की मौजूदा सरकार के खिलाफ वोट किया है। कांग्रेस दूसरे नंबर पर सिकुड़ती दिख रही है। अगर बीजेपी को बहुमत मिलता है तो यह 2019 लोक सभा चुनाव से पहले माने जा रहे इस सेमीफाइनल में उसकी बड़ी जीत मानी जाएगी।

इससे आगे की दिशा भी तय होगी और बीजेपी के पक्ष में माहौल तैयार होगा। बीजेपी के पक्ष में आए नतीजों से साफ हो जाएगा कि पीएम मोदी का जादू बरकरार है और उनके ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार का बड़ा असर हुआ है। आपको बता दें कि पोल्स में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना जताई गई थी और बीजेपी व कांग्रेस में कड़ी टक्कर देखी जा रही थी।

अगर बहुमत में कुछ सीटें कम पड़ती हैं तो सरकार बनाने के लिए बीजेपी को पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी का समर्थन हासिल करना पड़ सकता है। हालांकि 2-4 सीटों की कमी पर निर्दलीयों का भी समर्थन हासिल कर सरकार बनाने की पहल की जा सकती है। शुरुआती रुझानों को देख कांग्रेस ने कहा है कि सभी विकल्प खुले हुए हैं। आपको बता दें कि 12 मई को 222 सीटों पर मतदान हुआ था।

एक सीट पर मतदान बीजेपी प्रत्याशी और वर्तमान विधायक बी एन विजयकुमार के निधन के चलते स्थगित कर दिया गया। बेंगलुरु के आरआर नगर में एक घर से हजारों की तादाद में सामने आए फर्जी आईकार्ड के मामले को देखते हुए चुनाव आयोग ने यहां वोटिंग को टाल दिया है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि कर्नाटक पार्टी के लिए दूसरी बार दक्षिण में कदम रखने का द्वार होगा।

कर्नाटक में बीजेपी को सिर्फ एक बार 2008 से 2013 तक सत्ता में रहने का मौका मिला था लेकिन पार्टी का कार्यकाल अंदरुनी कलह और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा। महज पांच वर्षों में पार्टी की ओर से तीन मुख्यमंत्री बनाए गए जिनमें से एक फिलहाल पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा हैंए भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भी जा चुके हैं। 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने 122 सीटें जीती थीं। बीजेपी और जेडीएस को 40-40 सीटें मिली थीं।

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