Meeting: बंद कमरे में मिले आरएसएस और भाजपा चीफ, शायद मंदिर मुद्दे पर हुई चर्चा!

मुंबई: अयोध्या विवाद की सुनवाई अगले साल तक टालने के निर्णय के बाद इस मुद्दे पर सियासी घमासान मचा हुआ है। राष्ट्रीय सेवक संघ आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर के लिए सरकार से अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं। इस बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की है।


समझा जा रहा है कि इस मुलाकात में राम मंदिर मुद्दे पर चर्चा हुई। संघ के मंदिर निर्माण पर सख्त रुख को देखते हुए इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ प्रमुख और शाह के बीच बंद दरवाजे में यह बैठक हुई है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में राम मंदिर और सबरीमाला मंदिर पर चर्चा हुई। भागवत और शाह के बीच यह मुलाकात करीब एक घंटे से ज्यादा चलने की खबर है।

उल्लेखनीय है कि संघ प्रमुख ने विजयदशमी से एक दिन पहले अपने संबोधन में अयोध्या में मंदिर निर्माण का फिर से आह्वान किया था। उन्होंने सरकार से यह भी कहा कि जरूरत हो तो इसके लिए कानून लाया जाए। उधर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी इस मुद्दे को लेकर खुलकर बयान दे रहे हैं। पिछले महीने अमित शाह ने कहा था कि उनकी इच्छा है कि राम मंदिर का निर्माण 2019 से शुरू जाए।

हाल में उन्होंने कहा कि विवादित जमीन के मालिकाना हक के बारे में फैसला करते हुए इस बात को किनारे नहीं किया जा सकता कि भगवान राम के जन्मस्थल पर स्थित उनके मंदिर को गिराया गया है। शाह ने कहा कि हमें इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि 600 साल पहले अयोध्या में राम मंदिर को गिराया गया था। बहुतों को ऐसा लग रहा है कि अयोध्या में संत समाज की मांगों का समर्थन कर संघ ने बीजेपी और केंद्र पर दबाव बढ़ा रहा है।

उधर शाह के अपने बयान इस ओर इशारा कर रहे हैं कि संभवत: पार्टी अपने विकास और कल्याण के अजेंडे के साथ इस सांस्कृति और पहचान के इस इशू को जोड़ फोकस में लाना चाहती है। बता दें कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर के जल्द निर्माण के लिए कानून बनाने को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी और आरएसएस के भीतर से मांग उठने लगी है। कांग्रेस कह चुकी है कि सभी पक्षों को न्यायालय के आदेश का पालन करना चाहिए।

इससे पहले संघ ने बुधवार को केंद्र से 1994 में सुप्रीम कोर्ट में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करने का अनुरोध किया था। संघ ने कहा था कि तत्कालीन सरकार इस बात पर सहमत हो गई थी कि यदि बाबरी मस्जिद बनाने से पहले वहां मंदिर होने के साक्ष्य पाये गए तो वह हिन्दू समुदाय का साथ देगी। विश्व हिंदू परिषद भी राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र से अध्यादेश लाने की मांग कर रही है।

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