NDA के साथ के बावजूद उपराष्ट्रपति चुनाव में गोपालकृष्ण गांधी का साथ देंगे नीतीश कुमार

बिहार में बीजेपी के साथ मिलकर जेडीयू ने सरकार बना ली है. नीतीश कुमार और सुशील मोदी ने गुरुवार को शपथ ली, अब शुक्रवार को विधानसभा में बहुमत साबित किया जाएगा. इस बीच जेडीयू का कहना है कि वे उपराष्ट्रपति पद के लिए यूपीए के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी का ही समर्थन करेंगे. इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. बता दें कि एनडीए की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू उम्मीदवार बनाए गए हैं. हालांकि गुरुवार को जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा था कि जेडीयू अब संसद के दोनों सदनों में एनडीए का साथ देंगे.NDA के साथ के बावजूद उपराष्ट्रपति चुनाव में गोपालकृष्ण गांधी का साथ देंगे नीतीश कुमारअभी अभी: CM केजरीवाल ने किया 2-एमवीए क्षमता वाले पहले वितरण ट्रांसफॉर्मर का उद्घाटन…

गौरतलब है कि जब नीतीश कुमार यूपीए के साथ थे तो उन्होंने एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन किया, अब वे वापस एनडीए में आए हैं लेकिन यूपीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी का समर्थन कर रहे हैं.

महात्मा गांधी के पौत्र गोपाल कृष्ण गांधी के साथ नीतीश कुमार के मधुर संबंध रहे हैं. महागठबंधन का हिस्सा होते हुए नीतीश कुमार ने चंपारण आंदोलन के 100 पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में गोपाल कृष्ण गांधी को बुलाया था. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्ष से गोपाल कृष्ण गांधी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने की बात कही थी. हालांकि ऐसा नहीं हो सका. बाद में जब गोपाल कृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया तो जेडीयू ने समर्थन की घोषणा की.

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बता दें कि उपराष्ट्रपति चुनाव में सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य ही वोट करते हैं. बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए के पास लोकसभा में 340 और राज्यसभा में 85 सांसद हैं. और अब नीतीश कुमार की पार्टी भी एनडीए का हिस्सा है. लोकसभा में नीतीश के पास 2 सांसद और राज्यसभा में 10 सांसद हैं.

मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल 10 अगस्त को पूरा हो रहा है. 5 अगस्त को वोटिंग होगी और इसी दिन शाम को वोटों की गिनती होगी. अंसारी को 2012 के उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार जसवंत सिंह के मुकाबले 490 वोट मिले थे. जसवंत सिंह को 238 वोट मिले. एस. राधाकृष्णन (1952 और 1957), मोहम्मद हिदायतुल्ला (1979) और शंकर दयाल शर्मा (1987) उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्विरोध चुने गए थे.

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