रहस्य – TOS News https://tosnews.com Latest Hindi Breaking News and Features Wed, 15 Aug 2018 07:57:23 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=4.9.8 https://tosnews.com/wp-content/uploads/2017/03/tosnews-favicon-45x45.png रहस्य – TOS News https://tosnews.com 32 32 प्रधानमंत्री रहते हुए दिया बच्ची को जन्म, दूसरी बार दुनिया में हुआ ऐसा https://tosnews.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%a6%e0%a4%bf/131750 Sat, 23 Jun 2018 08:54:09 +0000 https://tosnews.com/?p=131750 न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने ऑकलैंड के एक अस्पताल में आज एक बच्ची को जन्म दिया. प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए संतान को

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न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने ऑकलैंड के एक अस्पताल में आज एक बच्ची को जन्म दिया. प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए संतान को जन्म देने वाली वह विश्व की दूसरी महिला हैं.

जेसिंडा और उनके पति क्लार्क गेफोर्ड की यह पहली संतान है. बच्ची का वजन 3.3 किलोग्राम है और वह स्वस्थ है. जेसिंडा ने इंस्टाग्राम पर कहा- ‘मुझे पूरा यकीन है कि हम उन्हीं सारी भावनाओं से गुजर रहे हैं जिससे नए माता-पिता गुजरते हैं. साथ ही हम कई लोगों से मिली शुभकामनाओं के लिए भी आभारी हैं.’

पिछले अक्टूबर में प्रधानमंत्री बनने के तीन महीने बाद अर्डर्न ने अपने गर्भवती होने की सूचना दी थी. न्यूजीलैंड में विपक्ष के नेता साइमन ब्रिजेस ने बच्ची के जन्म पर उन्हें बधाई दी.

उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था और ड्यू डेट पहले 17 जून बताया गया था. इससे पहले वर्ल्ड लीडर्स में सिर्फ पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने ही पद पर रहते हुए (1990 में) बच्चे को जन्म दिया था.

पूर्व में जेसिंडा ने कहा था कि हर महिला के पास अधिकार है कि वो कब मां बने. कितनी उम्र में परिवार को बढ़ाने का फैसला करे. उन्होंने कहा था कि वे मातृत्‍व और कार्यस्‍थल को एक साथ मैनेज करने के लिए तैयार हैं. बच्‍चे के जन्‍म के बाद वे काम पर जरूर लौटेंगी.

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एक भी हिन्दु न होने के बावजूद भी यहाँ है ‘विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर, जानिये क्या है रहस्य? https://tosnews.com/despite-not-having-a-single-hindu-here-is-the-worlds-largest-hindu-temple-the-mystery/102271 Thu, 25 Jan 2018 05:42:26 +0000 https://tosnews.com/?p=102271 हिन्दु धर्म में एक दो नहीं बल्कि करोड़ो देव-देवताओं की पूजा की जाती है। यही वजह है कि भारत के हर गली घर में

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हिन्दु धर्म में एक दो नहीं बल्कि करोड़ो देव-देवताओं की पूजा की जाती है। यही वजह है कि भारत के हर गली घर में देवी देवताओं के मंदिर और मूर्तियां नज़र आते है। 125 करोड़ की आबादी वाले भारत में हिन्दूओं की संख्या अधिक होने के कारण यहां मंदिरों का होना कोई बड़ी बात नहीं है। Angkor Wat Cambodia’s most iconic temple. लेकिन, सबसे हैरानी वाली बात ये है कि एक देश ऐसा भी है जहां एक भी हिन्दु न होने के बावजूद भी विश्व का सबसे बड़ा हिन्दु मंदिर बना हुआ है। जी हां, हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा मंदिर हिंदुस्तान में नहीं है बल्कि किसी दूसरे देश में बना हुआ है।

हम बात कर रहे हैं कम्बोडिया देश में बने अंगकोर वाट मंदिर की। कंबोडिया के विश्व धरोहर के मंदिरों में हर साल करोड़ों की संख्या में यात्री आते है। इतिहास के सबसे प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित मंदिर, अंगकोर वाट के बारे में जानना वाकई में काफी दिलचस्प है। अंगकोर वाट मंदिर सूर्यवार्मन द्वितीय (ईं. 1112-52) द्वारा निर्मित है जो हिंदू धर्म और प्राचीन देवताओं को प्रदर्शित करता है। कंबोडियन राजाओं ने मंदिर की संरचनाओं को बेहतर बनाने के लिए काफी काम किया, जो विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक भवन माना जाता है। अंगकोर वाट मंदिर को कम्बोडिया के राष्ट्रीय ध्वज पर चित्रित किया गया है।

अंगकोर वाट मंदिर को प्राचीन समय में यशोधरपुर भी कहा जाता था। मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी शिल्पकला है, जो अपने आप में दुनिया के बाकी मंदिरों से बिल्कुल अलग और विशिष्ट है। अंकोरवाट मन्दिर अंकोरयोम नामक नगर में स्थित है। यह मन्दिर विष्णु भगवान को समर्पित है। मन्दिर की विशेषताओं की बात करे तो यह एक ऊँचे चबूतरे पर स्थित है। इसमें तीन खण्ड हैं। मन्दिर को चारों ओर से पत्थर की दीवार से घेरा गया है। भारत से सम्पर्क के बाद दक्षिण-पूर्वी एशिया में कला, वास्तुकला तथा स्थापत्यकला के विकास का यह मन्दिर सबसे अच्छा उदाहरण है।

अंगकोर वाट मंदिर से कई लोक कहानियां जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं देवराज इन्द्र ने महल के तौर पर अपने बेटे के लिए करवाया था। लेकिन, सच्चाई ये है कि इस मंदिर का इतिहास बौद्ध और हिन्दू दोनों ही धर्मों से बहुत निकटता से जुड़ा है। इस ऐतिहासिक मंदिर के निर्माण की असल वजह राजा सूर्यवर्मन की हिन्दू देवी-देवताओं से नजदीकी बढ़ाकर अमर बनने की चाहत थी। अमर होने की इच्छा से सूर्यवर्मन ने अपने लिए एक विशिष्ट पूजा स्थल बनवाया जिसमें उसने ब्रह्मा, विष्णु, महेश, तीनों की ही मूर्तियां स्थापित की। यही मंदिर आज अंगकोर वाट के नाम से जाना जाता है। देखें वीडियो-

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जानें, 5 सितम्बर की प्रमुख घटनाओं का इतिहास https://tosnews.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-5-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95/70746 Tue, 05 Sep 2017 03:26:47 +0000 https://tosnews.com/?p=70746 भारतीय एवं विश्व इतिहास में 05 सितम्बर की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं- 1666 – लंदन में लगी भीषण आग में 13,200 घर क्षतिग्रस्त

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भारतीय एवं विश्व इतिहास में 05 सितम्बर की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं-

जानें, 5 सितम्बर की प्रमुख घटनाओं का इतिहास
1666 – लंदन में लगी भीषण आग में 13,200 घर क्षतिग्रस्त हो गये और आठ लोगों की मौत हो गयी।
1798 – फ्रांस में अनिवार्य सैन्य सेवा कानून प्रभाव में आया।
1836 – सैम ह्यूस्टन टेक्सास गणराज्य के राष्ट्रपति निर्वाचित।
1839 – चीन में पहला अफ़ीम युद्ध शुरू हुआ।
1888 – भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म। वर्ष 1962 में यह दिन शिक्षक दिवस के रूप में घोषित किया गया।
1914 – ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम और रूस के बीच लंदन समझौता हुआ।
1944 – ब्रिटिश प्रधानमंत्री भवस्टन चर्चिल ने अपनी स्कॉटलैंड यात्रा शुरू की।
1972 – म्यूनिख ओलंपिक के दौरान फिलीस्तीनी समूह ब्लैक सितम्बर ने 11 इजरायली एथलीटों को बंधक बना लिया और बाद में उनकी हत्या कर दी।

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1975 – पुर्तगाल के प्रधानमंत्री गोंसालवेका ने अपने पद से इस्तीफा दिया।
1987 – अमेरिका के टेनिस खिलाड़ी जॉन मैकनरॉय पर उनके बयान के लिये 17,500 डॉलर का जुर्माना ठोका गया।
1991 – नेल्सन मंडेला अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये।
1997 – एथेंस शहर 2004 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए चयनित हुआ।
1997 – मदर टेरेसा का कोलकाता में निधन।
2005 – मंडला एयरलाइंस का विमान 091 इंडोनेशिया में सुमात्रा के एक आवासीय क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिससे उसमें सवार 104 लोगों के अलावा आवासीय क्षेत्र के 39 लोगों की मौत हो गई।
2014 – विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक, गिनी, लाइबेरिया, नाइजीरिया, सेनेगल और सिएरा लियोन में इबोला वायरस से संक्रमित 3500 लोगों में से 1900 लोगों की मौत हो गई।

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क्या अपने देखा? गांधी जी की स्टाइलिश पोती के अमेरिकी जलवे, देखकर हैरान हो जाएंगे आप! https://tosnews.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0/69739 Sat, 02 Sep 2017 04:58:55 +0000 https://tosnews.com/?p=69739 महात्मा गांधी नाम हर कोई जनता है इस नाम को किसी परिचय की जरूरत नही है. भारत में ही नही बल्कि विदेशों में भी भारत

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महात्मा गांधी नाम हर कोई जनता है इस नाम को किसी परिचय की जरूरत नही है. भारत में ही नही बल्कि विदेशों में भी भारत के राष्ट्रपिता एक महान समाज सेवक और क्रान्तिकारी के रूप में जाने जाते हैं . उनको पुरे विश्व में जाना जाता है. हाँ पर उनसे जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जो ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं.. जैसे गाँधी जी का परिवार, उनके बच्चे और उनके बच्चों के बच्चे। ‘बापू’ के परिवार की बात करें तो उनके पोते-पोतियां और उनके वंशज आज भी भारत के अलावा दूसरे देशों में भी रह रहे हैं और इसी वंश की एक युवा आज विदेश में अपने सरनेम से इतर अलग तरीके से अपना नाम कमा रही है.दरअसल हम बात कर रहे है महात्मा गांधी की परपोती आजकल सोशल मीडिया पर अपने ग्लैमरस लाईफ

स्टाईल की वजह से काफी मशहूर और चर्चित हो चुकी है.  अज हम आपको गांधी जी के इसी वंशज से मिलवा जा रहे हैं.

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अमेरिका में रहता है गाँधी जी परिवार

आपको बता दें महात्मा गांधी जी के बड़े बेटे हरिलाल थे. हरिलाल के बेटे कांतिलाल जिनका आजादी के बाद पूरा परिवार अमेरिका में बस गया. आज अमेरिका में कांतिलाल की बेटी मेधा अपनी तस्वीरों के जरिए न सिर्फ चर्चाओं में है.

बल्कि अपने काम से भी जानी जाती है.बहुत खुबसूरत है मेधा. गांधीजी की पोती मेधा जहां इस्टाग्राम और फेसबुक में ग्लैमरस तस्वीरें अपडेट करती है वहीं टीवी प्रोड्यूसर के रूप में नाम पैदा कर रही है.

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मेधा की पहचान अपने सरनेम की वजह से ही नहीं बल्कि कॉमेडी राइटर, पैरोडी प्रोड्यूसर और वॉइस टैलेंट के रूप में भी होती है. मेधा अमेरिका के ओहियो में सबसे ज्यादा मशहूर ‘Dave and Show’ की प्रोड्यूसर रह चुकी हैं.

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इसके अलावा भी वे कई शो प्रोड्यूस कर चुकी हैं. अमेरिकन यूनिवर्सिटी के पढ़ाई करने के बाद मेधा अब अपने प्रोड्यूसिंग के करियर पर ही ध्यान दे रही हैं। फिलहाल वे ‘Matty in the morning show’ को प्रोड्यूस कर रही हैं. मेधा की खूबसूरती के है लाखो दीवाने.

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इस अनोखे मंदिर में हर साल राष्ट्रपति भवन से आता है नमक, रहस्य जानकर उड़ जायेगे होश… https://tosnews.com/every-year-this-unique-temple-comes-from-rashtrapati-bhawan/67044 Sat, 26 Aug 2017 07:31:27 +0000 https://tosnews.com/?p=67044 देहरादून से 190 किमी और मसूरी से 156 किमी दूर स्थित महासू मंदिर चकराता के पास हनोल गांव में टोंस नदी के पूर्वी तकट

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देहरादून से 190 किमी और मसूरी से 156 किमी दूर स्थित महासू मंदिर चकराता के पास हनोल गांव में टोंस नदी के पूर्वी तकट पर स्थित है। इनदिनों जौनसार बावर में जागड़ा पर्व की धूम रही। हनोल स्थित महासू देवता मंदिर में देव दर्शनों के लिए आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। हजारों की संख्या में लोगों ने पूजा-अर्चना कर सुख-शांति की कामना की। हम आपको बताते हैं, इस मंदिर के जुड़े कई रहस्य… इस अनोखे मंदिर में हर साल राष्ट्रपति भवन से आता है नमक, रहस्य जानकर उड़ जायेगे होश...

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दिलचस्प है कि यहां हर साल दिल्ली से राष्ट्रपति भवन को ओर से नमक भेंट किया जाता है। मिश्रित शैली की स्थापत्य कला को संजोए यह मंदिर उत्तराखंड की लोक परंपरा के मद्देनजर काफी अहम है। 

महासू देवता के मंदिर के गर्भ गृह में भक्तों का जाना मना है। केवल मंदिर का पुजारी ही मंदिर में प्रवेश कर सकता है। यह बात आज भी रहस्य है। मंदिर में हमेशा एक ज्योति जलती रहती है जो दशकों से जल रही है। मंदिर के गर्भ गृह में पानी की एक धारा भी निकलती है, लेकिन वह कहां जाती है, कहां से निकलती है यह अज्ञात है। 

दरअसल ‘महासू देवता’ एक नहीं चार देवताओं का सामूहिक नाम है और स्थानीय भाषा में महासू शब्द ‘महाशिव’ का अपभ्रंश है। चारों महासू भाइयों के नाम बासिक महासू, पबासिक महासू, बूठिया महासू (बौठा महासू) और चालदा महासू है, जो कि भगवान शिव के ही रूप हैं। 

उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी, संपूर्ण जौनसार-बावर क्षेत्र, रंवाई परगना के साथ साथ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, सोलन, शिमला, बिशैहर और जुब्बल तक महासू देवता की पूजा होती है। इन क्षेत्रों में महासू देवता को न्याय के देवता और मन्दिर को न्यायालय के रूप में माना जाता है। वर्तमान में महासू देवता के भक्त मन्दिर में न्याय की गुहार करते हैं जो उनकी पूरी होती है। 

यह मंदिर 9वीं शताब्दी में बनाया गया था। वर्तमान में यह मंदिर पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के संरक्षण में है। महासू देवता भगवान भोलेनाथ के रूप हैं। मान्यता भी है कि महासू ने किसी शर्त पर हनोल का यह मंदिर जीता था। महासू देवता जौनसार बावर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ईष्ट देव हैं। 

किवदंती है कि त्यूनी-मोरी रोड पर बना महासू देवता का मंदिर जिस गांव में बना है उस गांव का नाम हुना भट्ट ब्राह्मण के नाम पर रखा गया है। इससे पहले यह जगह चकरपुर के रूप में जानी जाती थी। पांडव लाक्षा ग्रह( लाख का महल) से निकलकर यहां आए थे। हनोल का मंदिर लोगों के लिए तीर्थ स्थान के रूप में भी जाना जाता है।

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एक ऐसी क्वीन जो 10 साल की उम्र में हुई थी दर्जनो बार बलात्कार की शिकार https://tosnews.com/10-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0/66409 Thu, 24 Aug 2017 10:17:56 +0000 https://tosnews.com/?p=66409 बुन्देलखण्ड की एक ऐसी लड़की की कहानी आज आपको बताने जा रहे हैं जिसने 10 साल की छोटी सी उम्र से ही समाज का

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बुन्देलखण्ड की एक ऐसी लड़की की कहानी आज आपको बताने जा रहे हैं जिसने 10 साल की छोटी सी उम्र से ही समाज का वो भयानक रूप देखा है जिसके बारे में हम सोच भी नही सकते हैं.एक ऐसी क्वीन जो 10 साल की उम्र में हुई थी दर्जनो बार बलात्कार की शिकार

अगर आपको भी सेल्फी लेना है पसंद, तो जरुर जाने इसके नियम

18 साल की उम्र में ही इस लड़की के साथ दर्जनो लोगो ने कई दिनों तक लगातार बलात्कार किया. इसके बाद इस लड़की ने भी बदले की आग में हथियार उठा लिए और निकल पड़ी चम्बल के बीहड़ में. हम बात कर रहें हैं खूँखार डकैत फूलनदेवी की जिसकी मौत को आज 16 साल बीत चुके हैं.

ये है कि फूलन देवी के किस्से आज भी सुनाए जाते हैं. आपको बता दे कि, फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड के जालौन जिले के एक छोटे से गांव गोरहा का पूरवा में हुआ था.

आज हम आपको इस मासूम लड़की की पूरी दस्ता बताने जा रहे अभी तक की. आज भी कोई फूलन को अच्छा मानता है तो कोई खूंखार डकैत. 80 के दशक में चंबल के बीहड़ों में वो सबसे ख़तरनाक डाकू मानी जाती थीं.+

मनफेंक होते हैं इन राशि वाले लोग, इनको किसी से भी हो जाता है प्यार

उनके जीवन पर शेखर कपूर द्वारा बनाई गई फिल्म ने लोगो को सबसे ज्यादा प्रभावित किया. सरकार ने फूलन देवी को पकड़ने के खातिर पूरा जोर लगा दिया था लेकिन सरकार को कभी हाथ नही लगी लेकिन फिर खुद ही फूलन देवी ने कुछ शर्तों के साथ सरकार के सामने सरेंडर कर दिया.

फूलनदेवी की 25 जुलाई 2001 को उनके ही घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उस समय के अखबारों और पत्रकारों की मानें तो हालात ने ही फूलन देवी को इतना कठोर बना दिया कि जब उन्होंने बहमई में एक लाइन में खड़ा करके 22 ठाकुरों की हत्या की तो उन्हें ज़रा भी मलाल नहीं हुआ. इसके बाद तो मानो फूलनदेवी पूरे विश्व की नजर में आ गईं. 

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जानिए, आखिर हर साल अगस्त महीने के पहले रविावर को ही क्यों मनाया जाता है फ्रेंडशिप डे https://tosnews.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%86%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a4%b9/60095 Sun, 06 Aug 2017 09:55:03 +0000 https://tosnews.com/?p=60095 हर साल अगस्त महीने के पहले रविवार को मनाया जाने वाला ‘फ्रेंडशिप डे’ भारत में भी पिछले कुछ सालों से काफी पॉपुलर हो रहा

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हर साल अगस्त महीने के पहले रविवार को मनाया जाने वाला ‘फ्रेंडशिप डे’ भारत में भी पिछले कुछ सालों से काफी पॉपुलर हो रहा है. फ्रेंडशिप डे मनाने का चलन पश्चिमी देशों से शुरु हुआ. इस दिन ग्रीटिंग कार्ड, व्हाट्सएप, फेसबुक के जरिए लोग एक दूसरे को बधाई देते हैं और सच्ची दोस्ती निभाने का वादा करते हैं.जानिए, आखिर हर साल अगस्त महीने के पहले रविावर को ही क्यों मनाया जाता है फ्रेंडशिप डे

इसे मनाने के पीछे की कहानी दुनिया के सबसे बड़े युद्धों मे से एक से जुड़ी है. कहा जाता है प्रथम विश्व युद्ध के बाद लोगों और देशों के बीच आपसी शत्रुता और नफरत की भावना ने जन्म ले लिया था और इन्हीं सब को खत्म करने के लिए फ्रेंडशिप डे की शुरुआत की गई.

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अमेरिकी सरकार ने फ्रेंडशिप डे की शुरुआत 1935 में की थी और उसी समय ये तय किया गया कि इस दिन को अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाएगा. कहा जाता है कि इस दिन को मनाने के लिए रविवार को ही चुनने का कारण ये है कि इस दिन छुट्टी होती है जिससे सभी लोग अपने दोस्तों से मिल सकेंगे.

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अगर देखा जाए तो भारत में रामायण और महाभारत के समय से ही दोस्ती का बड़ा महत्व रहा है. इसमें सबसे बड़ा उदाहरण कृष्ण और सुदामा की दोस्ती का रहा है. आज भी दोस्त का जिक्र होने पर इनकी दोस्ती की बात की जाती है. कृष्ण ने अपने गरीब मित्र की मित्रता का सम्मान भी रखा और उनकी गरीबी को भी हर लिया था.

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कैसे पता करूं कि मेरी होने वाली पत्नी कुंवारी है? https://tosnews.com/%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87/48513 Mon, 24 Jul 2017 09:58:39 +0000 https://tosnews.com/?p=48513 प्रश्न : मेरी शादी होने वाली है। सगाई के बाद एकांत में हमारे शारीरिक संबंध भी बन चुके हैं। लेकिन मैंने पहली बार जब

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प्रश्न :
मेरी शादी होने वाली है। सगाई के बाद एकांत में हमारे शारीरिक संबंध भी बन चुके हैं। लेकिन मैंने पहली बार जब उसके साथ सेक्स किया था तो उसकी योनि से खून नहीं निकला था। क्या ऐसा होना जरूरी है? मैने सुना है कि कुंवारी लड़की के साथ प्रथम संभोग में खून निकलता है। कहीं उसके किसी और लड़के से तो संबंध नहीं हैं? मेरी शंका का समाधान करें।

उत्तर : यदि लड़की कुंवारी है तो पहली बार संभोग करते समय योनि से रक्तस्राव होना चाहिए, लेकिन यह प्रत्येक मामले में जरूरी नहीं है। यदि खिलाड़ी है, साइकिल चलाती है या अन्य शारीरिक श्रम करती है तो ऐसी स्थिति में योनि की झिल्ली (हाइमेन) फट सकती है। ऐसी स्थिति में पहली बार संभोग के दौरान रक्त नहीं निकलता।

अगर आपकी पार्टनर स्कूल समय से ही शारिरिक गतिविधियों जैसे खेल-कूद या व्यायाम में सक्रिय रही है तो बहुत संभव है कि प्रथम संभोग में योनि से खून न आए। ऐसे में आप अपने मन से यह शंका पूरी तरह से निकाल दें कि उसके किसी अन्य लड़के से शारीरिक संबंध हो सकते हैं। अगर आपकी पार्टनर आपको धोखा देना चाहे तो आजकल बड़ी आसानी से हाइमेन सर्जरी से कौमार्य को दुबारा पाया जा सकता है।

यदि आप एक-दूसरे को प्यार करते हैं तो निश्चित ही आपको विवाह करना चाहिए और सुख से जीवन बिताएं।

 

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भूत, प्रेत, जिन्न, बेताल और पिशाच को इन तांत्रिक साधनाओं से किए जाते है वश में https://tosnews.com/%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%b6/48380 Sat, 24 Jun 2017 12:07:40 +0000 https://tosnews.com/?p=48380 आज हम आपको सुलेमानी तंत्र और हिन्दू तंत्र की उन साधनाओं के बारे में बता रहे है जिनके बारे में कहा जाता है कि

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आज हम आपको सुलेमानी तंत्र और हिन्दू तंत्र की उन साधनाओं के बारे में बता रहे है जिनके बारे में कहा जाता है कि जो इन साधनाओं को साध लेता है उनकी बातें भूत, प्रेत, जिन्न, बेताल और पिशाच भी मानने लगते है। यह बातें हमें सुनने में असंभव लग सकती है पर तंत्र विज्ञान में कुछ भी असंभव नहीं है।भूत, प्रेत, जिन्न, बेताल और पिशाच को इन तांत्रिक साधनाओं से किए जाते है वश में

तंत्र साधना के नियम- सभी साधनाओं के कुछ कॉमन नियम होते है जो इस प्रकार है।

  1. ये सभी साधनाएं एकांत में या किसी विशेष स्थान पर की जाती हैं।
  2. गुरु के बिना इस तरह की साधनाएं नहीं की जाती हैं।
  3. साधना में साफ-सफाई रखना और ब्रह्मचर्य का पालन बहुत जरूरी होता है।
  4. साधना में खुद के हाथों से बना भोजन ही करना होता है।
  5. चमड़े के सामानों का उपयोग करना पूरी तरह वर्जित होता है।
  6. साधना के दौरान मांस, मदिरा व किसी भी तरह का नशा करने पर साधना फलीभूत नहीं होती है।

जिन्न साधना – सुलेमानी तंत्र में मुख्य रूप से माना जाता है कि 100 भूत-प्रेतों के बराबर ताकत एक जिन्न में होती है। इसे साध लेने पर ये दिखाई देता है और साधक अपनी इच्छा अनुसार जिन्न से अच्छा या बुरा काम करवा सकता है। वो इस साधना से किसी दूसरे इंसान की व्यक्तिगत चीज़ों की जानकारी भी हासिल कर सकता है।

परी साधना – सुलेमानी तंत्र  में ये एक प्रमुख साधना है वैसे तो परी साधना अनेक तरह की होती है, लेकिन शाह परी साधना सबसे बेहतर मानी जाती है। कहा जाता है कि यदि कोई ये साधना कर ले तो शाह परी उसके सामने हाज़िर होती है और उसकी हर इच्छा पूरी करती है। फिर चाहे वो इच्छा धन से जुडी हो या किसी अन्य चीज़ से।

कर्ण पिशाचनी साधना- मान्यता है कि अगर मौत के बाद मुक्ति ना मिले तो आत्मा की क्षमताओं में आश्चर्यजनक वृद्धि हो जाती है। इसलिए ऐसी शक्तियां पाने के लिए पिशाच साधना की जाती है। इस साधना की सिद्धि के बाद किसी भी प्रश्न का उत्तर कोई पिशाचनी कान में आकर देती है। इसे करने वाला इंसान सामने बैठे व्यक्ति की नितांत व्यक्तिगत जानकारी भी बता सकता है।

किंकरी साधना- प्रेत योनि में जाकर जीव कई बार उत्पाती हो जाता है। साधक इसका लाभ उठाते है। इसके लिए अनुष्ठान नहीं करना पड़ता, मन्त्र जाप ही काफी रहता है। ये साधना शव की पिंड पर होती है। इस साधना के सिद्ध होने पर प्रेत आदेश के अनुसार काम करता है।

बेताल साधना- यह साधना रात में निर्जन स्थान पर की जाती है। इसमें बहुत शक्तिशाली प्रेत यानी बेताल को अपने वश में किया जाता है। इसके लिए बेताल यंत्र व माला का उपयोग किया जाता है। तंत्र की मान्यता है कि इस साधना से जब बेताल प्रसन्न होता है तो वो साधना करने वाले की हर इच्छा को पूरा करता है और उसकी आज्ञा का पालन करता है।

वीर साधना – वीरों की संख्या 52 बताई गई है। इन्हें भैरव का गण कहा गया है। बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, पंजाब आदि प्रान्तों में वीरों के कई मंदिर है। वीर साधना किसी एकांत स्थान पर की जाती है। कई दिन, कई रातों तक महाकाली की पूजा करने के बाद एक ऐसा क्षण आता है, जब काली के दूत सामने आते है और साधक की मनोकामना पूरी करते है।

डाकिनी साधना – तंत्र जगत में डाकिनी का नाम प्रचलित है। ये नाम आते ही एक उग्र भावना दिमाग में आती है। एक भयानक रूप और गुण की महिला की आकृति उभरती है जो पैशाचिक गुण रखती है। वास्तव में ये काली का एक स्वरुप है। यह शक्ति मूलाधार के शिवलिंग का भी आधार है। डाकिनी साधना कर लेने पर साधक इससे अपने सारे काम पूरे करवा सकता है।

नोट-इस तरह की खबर से हमारा उद्देश्य किसी तरह का अंधविश्वास फैलाना नहीं है। हम सिर्फ गुप्त विद्याओं के बारे में जानकारी पाठकों को देना चाहते हैं।

 

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देखिए, मां के गर्भ में कैसे दीखते है एनिमल बेबी https://tosnews.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ad-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87/48233 Sat, 24 Jun 2017 08:14:42 +0000 https://tosnews.com/?p=48233 Animal Babies in The Womb : जियोग्राफिक चैनल की डॉक्युमेंट्री सीरीज ‘इन द वॉम्ब : एक्स्ट्रीम एनिमल्स’ के प्रोड्यूसर पीटर चिन ने दिखाया है

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Animal Babies in The Womb : जियोग्राफिक चैनल की डॉक्युमेंट्री सीरीज ‘इन द वॉम्ब : एक्स्ट्रीम एनिमल्स’ के प्रोड्यूसर पीटर चिन ने दिखाया है कि विभिन्न एनिमल्स के बच्चे मां के गर्भ में कैसे दिखते हैं। पीटर ने इन तस्वीरों को तैयार करने के लिए थ्री-डायमेंशनल अल्ट्रासाउंड स्कैन, नैनो कैमरा और कंप्यूटर ग्राफिक्स का इस्तेमाल किया है।

पीटर ने ‘इन द वॉम्ब’ डॉक्युमेंट्री 2006 में बनाई थी, लेकिन उन्होंने जानवरों के गर्भस्थ शिशुओं की तस्वीरें 2014 में इम्गुर पर शेयर कीं। इन्हें पूरी तरह से खींचे गए फोटोग्राफ तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन इन लाइफ-लाइक तस्वीरों से एक क्लीयर इमेज बनती है कि जानवरों के बच्चे मां के गर्भ में कैसे दिखते हैं।

पीटर की ‘इन द वॉम्ब’ डॉक्युमेंट्री सीरीज 1965 में आई, फोटोग्राफर लेनार्ट नील्सन की उस क्लासिक सीरीज से इंस्पायर थी, जिसमें उन्होंने मां के गर्भ में इंसान के भ्रूण से लेकर शिशु के रूप में विकसित होने तक का सफर दिखाया था।

हाथी (Elephant)

 देखिए, मां के गर्भ में कैसे दीखते है एनिमल बेबी
हाथियों में गर्भकाल 18 से 22 महीने का होता है, जो कि सभी स्तनधारियों (मैमल्स) में सबसे ज्यादा है।
 चीता (Cheeta)

 चीते में जेस्टेशनल पीरियड 90 से 98 दिनों का होता है। जन्म के समय शावक का वजन करीब 250 ग्राम होता है।

सांप (Snake)

सांप आमतौर पर अंडे देते हैं, लेकिन टाइगर स्नेक जैसी सांपों की कुछ प्रजातियां सीधे बच्चों को जन्म देती हैं।

भालू (Bear)

ध्रुवीय भालू के दो बच्चे मां के गर्भ में। इनमें गर्भकाल 195-265 दिनों का होता है। जंगली भालू में यह अवधि 180-270 दिन होती है।

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