जियो ने बदली टेलीकॉम सेक्टर की तस्वीर – TOS News https://tosnews.com Latest Hindi Breaking News and Features Tue, 21 Aug 2018 08:43:15 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=4.9.8 https://tosnews.com/wp-content/uploads/2017/03/tosnews-favicon-45x45.png जियो ने बदली टेलीकॉम सेक्टर की तस्वीर – TOS News https://tosnews.com 32 32 जियो ने बदली टेलीकॉम सेक्टर की तस्वीर, एक्सपर्ट से समझें कैसे हैं कंपनियों के हालात https://tosnews.com/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d/140177 Sat, 04 Aug 2018 07:22:40 +0000 https://tosnews.com/?p=140177 5 सितंबर 2016, इंडियन टेलीकॉम सेक्टर के इतिहास की अहम तारीख है। इसने पूरे सेक्टर की तस्वीर को बदलकर रख दिया। सिम लॉन्चिंग से

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5 सितंबर 2016, इंडियन टेलीकॉम सेक्टर के इतिहास की अहम तारीख है। इसने पूरे सेक्टर की तस्वीर को बदलकर रख दिया। सिम लॉन्चिंग से शुरू हुए जियो के खेल ने फोन लॉन्चिंग तक आते-आते कंपनियों को मर्जर और सेक्टर से एग्जिट होने को मजबूर कर दिया। बीते दो सालों में सेक्टर के हालात हम सभी ने देखे हैं, जिसका असर अब तक जारी है। वोडाफोन और आइडिया मर्जर करने की तैयारी में हैं, आरकॉम अपना मोबाइल बिजनेस बंद कर चुका है और एयरसेल की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। वह दिवालिया होने के करीब पहुंच चुकी है और वो इंट्रा सर्कल रोमिंग समझौतों के लिए भारती एयरटेल और रिलायंस जियो इन्फोकॉम के साथ बातचीत कर रही है।5 सितंबर 2016, इंडियन टेलीकॉम सेक्टर के इतिहास की अहम तारीख है। इसने पूरे सेक्टर की तस्वीर को बदलकर रख दिया। सिम लॉन्चिंग से शुरू हुए जियो के खेल ने फोन लॉन्चिंग तक आते-आते कंपनियों को मर्जर और सेक्टर से एग्जिट होने को मजबूर कर दिया। बीते दो सालों में सेक्टर के हालात हम सभी ने देखे हैं, जिसका असर अब तक जारी है। वोडाफोन और आइडिया मर्जर करने की तैयारी में हैं, आरकॉम अपना मोबाइल बिजनेस बंद कर चुका है और एयरसेल की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। वह दिवालिया होने के करीब पहुंच चुकी है और वो इंट्रा सर्कल रोमिंग समझौतों के लिए भारती एयरटेल और रिलायंस जियो इन्फोकॉम के साथ बातचीत कर रही है।   ऐसे में देश के टेलिकॉम सेक्टर की स्थिति अगले कुछ सालों में कैसी रहेगी इस पर दैनिक जागरण के जागरण डॉट कॉम ने केपीएमजी के पार्टनर जॉयदीप घोष  के साथ विस्तार से बात की।  टेलीकॉम सेक्टर के लिए कैसा रहेगा साल 2018 और कितना दबाव में है सेक्टर?   देश में नेट न्यूट्रलिटी लागू करने के लिए नियम बना रही है सरकार यह भी पढ़ें देखिए सेक्टर दबाव में तो है। साल 2018 और 2019 में भी सेक्टर में यह दबाव की स्थिति देखने मिल सकती है। सितंबर 2016 में टेलीकॉम सेक्टर के भीतर जियो की एंट्री हुई थी और उसी के बाद से सभी टेलीकॉम कंपनियां दबाव में हैं। वहीं देश की प्रमुख टेलिकॉम कंपनी एयरटेल भी इसके कारण दबाव में है और उसके पास इतनी क्षमता नहीं है कि वो जियो से टक्कर ले सके। हालांकि आइडिया-वोडाफोन के मर्जर से बनने वाली कंपनी की स्थिति थोड़ी बेहतर हो सकती है। इस बीच टेलीकॉम सेक्टर की इस दबावपूर्ण स्थिति से यूजर्स को जरूर फायदा हो रहा है।  क्या देश में सिर्फ तीन ही कंपनियां रह जाएंगी?   कॉल ड्रॉप पूरे टेलीकॉम सेक्टर की नहीं, कंपनियों की समस्या यह भी पढ़ें हां, अगर निजी कंपनियों की बात की जाए तो सिर्फ तीन ही कंपनियां वोडाफोन आइडिया लिमिटेड , एयरटेल और जियो ही अस्तित्व में रह जाएंगी। लेकिन सरकारी कंपनी बीएसएनएल जरूर इस जंग में अपनी उपस्थिति को दर्ज कराती रहेगी। घोष ने कहा कि मैं पहले भी कई बार यह कह चुका हूं कि देश में सिर्फ तीन से चार मजबूत टेलीकॉम कंपनियां ही होनी चाहिए। साल 2008-09 के आस पास देश में 10 से 11 टेलीकॉम कंपनियां अपनी सेवाएं दे रही थीं, जबकि हमारे पड़ोसी देश चीन में सिर्फ 3 से 4 मजबूत टेलीकॉम कंपनियां भी अस्तित्व में हैं और ऐसा भारत में भी होना चाहिए। साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया था जिसके तहत साल 2008 में पूर्व टेलिकॉम मंत्री ए राजा की ओर से दिए गए 2 जी के सभी 122 लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया था। जिसके बाद कई कंपनियों ने विलय एवं सेक्टर से बाहर जाने का फैसला किया। हालांकि देश में एमटीएनएल भी एक सर्विस प्रोवाइडर है, लेकिन यह सिर्फ दिल्ली और मुंबई तक ही सीमित है।

ऐसे में देश के टेलिकॉम सेक्टर की स्थिति अगले कुछ सालों में कैसी रहेगी इस पर दैनिक जागरण के जागरण डॉट कॉम ने केपीएमजी के पार्टनर जॉयदीप घोष  के साथ विस्तार से बात की।

टेलीकॉम सेक्टर के लिए कैसा रहेगा साल 2018 और कितना दबाव में है सेक्टर?

देखिए सेक्टर दबाव में तो है। साल 2018 और 2019 में भी सेक्टर में यह दबाव की स्थिति देखने मिल सकती है। सितंबर 2016 में टेलीकॉम सेक्टर के भीतर जियो की एंट्री हुई थी और उसी के बाद से सभी टेलीकॉम कंपनियां दबाव में हैं। वहीं देश की प्रमुख टेलिकॉम कंपनी एयरटेल भी इसके कारण दबाव में है और उसके पास इतनी क्षमता नहीं है कि वो जियो से टक्कर ले सके। हालांकि आइडिया-वोडाफोन के मर्जर से बनने वाली कंपनी की स्थिति थोड़ी बेहतर हो सकती है। इस बीच टेलीकॉम सेक्टर की इस दबावपूर्ण स्थिति से यूजर्स को जरूर फायदा हो रहा है।

क्या देश में सिर्फ तीन ही कंपनियां रह जाएंगी?

हां, अगर निजी कंपनियों की बात की जाए तो सिर्फ तीन ही कंपनियां वोडाफोन आइडिया लिमिटेड , एयरटेल और जियो ही अस्तित्व में रह जाएंगी। लेकिन सरकारी कंपनी बीएसएनएल जरूर इस जंग में अपनी उपस्थिति को दर्ज कराती रहेगी। घोष ने कहा कि मैं पहले भी कई बार यह कह चुका हूं कि देश में सिर्फ तीन से चार मजबूत टेलीकॉम कंपनियां ही होनी चाहिए। साल 2008-09 के आस पास देश में 10 से 11 टेलीकॉम कंपनियां अपनी सेवाएं दे रही थीं, जबकि हमारे पड़ोसी देश चीन में सिर्फ 3 से 4 मजबूत टेलीकॉम कंपनियां भी अस्तित्व में हैं और ऐसा भारत में भी होना चाहिए। साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया था जिसके तहत साल 2008 में पूर्व टेलिकॉम मंत्री ए राजा की ओर से दिए गए 2 जी के सभी 122 लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया था। जिसके बाद कई कंपनियों ने विलय एवं सेक्टर से बाहर जाने का फैसला किया। हालांकि देश में एमटीएनएल भी एक सर्विस प्रोवाइडर है, लेकिन यह सिर्फ दिल्ली और मुंबई तक ही सीमित है।

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