मदर इंडिया की याद दिलाती है किसान जवाहर की कहानी – TOS News https://tosnews.com Latest Hindi Breaking News and Features Tue, 21 Aug 2018 08:43:15 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=4.9.8 https://tosnews.com/wp-content/uploads/2017/03/tosnews-favicon-45x45.png मदर इंडिया की याद दिलाती है किसान जवाहर की कहानी – TOS News https://tosnews.com 32 32 मदर इंडिया की याद दिलाती है किसान जवाहर की कहानी, बेटों को बना दिया बैल https://tosnews.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9/140311 Sat, 04 Aug 2018 12:10:03 +0000 https://tosnews.com/?p=140311 पेट की भूख और जिंदगी की जद्दोजहद में इंसान कुछ भी करता है। अगर आपको 1957 में बनी फिल्म मदर इंडिया याद हो, जिसे

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पेट की भूख और जिंदगी की जद्दोजहद में इंसान कुछ भी करता है। अगर आपको 1957 में बनी फिल्म मदर इंडिया याद हो, जिसे महबूब ख़ान द्वारा लिखा और निर्देशित किया गया है, तो उस फिल्म में एक मां के संघर्ष को जिस तरह से दिखाया गया वैसी ही जिंदगी और जीवन के संघर्ष को एक और कहानी दिखाती है वो है – किसान जवाहर राय की कहानी। लेकिन ये कहानी फिल्म की नहीं सच्चाई है।पेट की भूख और जिंदगी की जद्दोजहद में इंसान कुछ भी करता है। अगर आपको 1957 में बनी फिल्म मदर इंडिया याद हो, जिसे महबूब ख़ान द्वारा लिखा और निर्देशित किया गया है, तो उस फिल्म में एक मां के संघर्ष को जिस तरह से दिखाया गया वैसी ही जिंदगी और जीवन के संघर्ष को एक और कहानी दिखाती है वो है - किसान जवाहर राय की कहानी। लेकिन ये कहानी फिल्म की नहीं सच्चाई है।   मदर इंडिया की कहानी एक गरीबी से पीड़ित गांव में रहने वाली औरत राधा की कहानी थी जो कई मुश्किलों का सामना करते हुए अपने बच्चों का पालन पोषण करने और बुरे जागीरदार से बचने की मेहनत करती है। तो वहीं सारण जिले के किसान जवाहर राय गरीबी को झेलते हुए अपने बेटों को ही खेत में बैल बनाकर हल से खेत की जुताई करने को मजबूर हैं।     जवाहर बारिश की आस में बैठे थे और बारिश होते ही वो अपने खेत में मकई रोपने को परेशान हो जाते हैं। क्योंकि उनके पास खाने तक को पैसे नहीं तो बैल या ट्रैक्टर कहां से लाएंगे? उसके बाद बेटों ने परेशान पिता को देखा तो उन्होंने इसका हल निकाल लिया और कहा हम बैल बनेंगे। गरीबी से ग्रसित इस किसान की तस्वीर को देखकर आप भी सोचने को मजबूर हो सकते हैं।   ना एेसा देखा ना ही एेसा सुना, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ इज्जतघर का उद्घाटन यह भी पढ़ें बेटे बने बैल और पिता ने चलाया हल  बैल बने दोनों युवकों की मां और जवाहर राय की पत्नी लीलावती देवी ने कहा कि पैसे के अभाव में परिवार की परवरिश करने के लिए बेटों बैल की जगह लगाकर खेती करने की मजबूरी है। कोई अपने बच्चों से एेसा काम नहीं करा सकता। लेकिन, पेट की भूख एेसी ही होती है।

मदर इंडिया की कहानी एक गरीबी से पीड़ित गांव में रहने वाली औरत राधा की कहानी थी जो कई मुश्किलों का सामना करते हुए अपने बच्चों का पालन पोषण करने और बुरे जागीरदार से बचने की मेहनत करती है। तो वहीं सारण जिले के किसान जवाहर राय गरीबी को झेलते हुए अपने बेटों को ही खेत में बैल बनाकर हल से खेत की जुताई करने को मजबूर हैं। 

जवाहर बारिश की आस में बैठे थे और बारिश होते ही वो अपने खेत में मकई रोपने को परेशान हो जाते हैं। क्योंकि उनके पास खाने तक को पैसे नहीं तो बैल या ट्रैक्टर कहां से लाएंगे? उसके बाद बेटों ने परेशान पिता को देखा तो उन्होंने इसका हल निकाल लिया और कहा हम बैल बनेंगे। गरीबी से ग्रसित इस किसान की तस्वीर को देखकर आप भी सोचने को मजबूर हो सकते हैं।

बेटे बने बैल और पिता ने चलाया हल

बैल बने दोनों युवकों की मां और जवाहर राय की पत्नी लीलावती देवी ने कहा कि पैसे के अभाव में परिवार की परवरिश करने के लिए बेटों बैल की जगह लगाकर खेती करने की मजबूरी है। कोई अपने बच्चों से एेसा काम नहीं करा सकता। लेकिन, पेट की भूख एेसी ही होती है।

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