O पनीरसेल्वम : ‘चाय की दुकान’ से ‘अम्मा का उत्तराधिकारी’ बनने तक का सफर

नई दिल्ली: O पनीरसेल्वम जे जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु के 19 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। जयललिता के बीमार होने के बाद पिछले ढाई महीनों से वह प्रदेश के कार्यवाहक मुख्यमंत्री की भूमिका में थे।

O पनीरसेल्वम : 'चाय की दुकान' से 'अम्मा का उत्तराधिकारी' बनने तक का सफर
उन्हें जयललिता का सबसे करीबी और विश्वासपात्र माना जाता था। जयललिता को भ्रष्टाचार के मामले में जब सुप्रीम कोर्ट ने साल 2001 में सजा सुनाई। उसके बाद 21 सितंबर 2001 को वो पहली बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। 1 मार्च 2002 तक वह तमिलनाडु के 13वें मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद साल साल 2014 में कर्नाटक हाइकोर्ट ने जब जयललिता को सजा सुनाई तब जयललिता ने एक बार फिर पनीरसेल्वम पर विश्वास जताया। इस तरह वह दूसरी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। 2014 में उन्होंने तमिलनाडु के 17वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
 
ह 11 मई 2015 तक मुख्यमंत्री के पद पर रहे जब कनार्टक हाईकोर्ट ने आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में उन्हें बरी नहीं कर दिया। इसके बाद जयललिता 6वीं बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। जयललिता के मंत्रिमंडल के वह सबसे कद्दावर मंत्री थे। उनके पास वित्त, योजना, संसदीय कार्य, चुनाव, पासपोर्ट और प्रशासनिक सुधार जैसे मंत्रालय थे।
14 जनवरी 1951 को जन्मे ओ पनीरसेल्वम एक चाय की दुकान चलाते थे। उन्होंने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत प्रेरियाकुलम नगरपालिका अध्यक्ष के रूप में की थी। 1996 में वह नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद वह प्रेरियाकुलम से विधायक निर्वाचित हुए। इस बार वह थेनी जिले की बोडनियाकन्नूर सीट से विधायक चुने गए हैं।  
 
 
 पनीरसेल्वम जयललिता के प्रति वफादारी दिखाते रहे हैं। मुख्‍यमंत्री बनने के बाद जयललिता को दंडवत प्रणाम करने की तस्‍वीरें सुर्खियां बटोरती रही हैं।वह जयललिता की तस्वीर को सामने रखकर कैबिनेट मीटिंग की अध्‍यक्षता करते रहे थे।  कई बार सार्वजनिक रूप से जयललिता के लिए रोते हुए देखा गया।
 

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