pak की निर्भया के केस में चार दिन में आरोपी को फांसी की सजा, भारत में लगे थे 8 महीने

पाकिस्तान में जनवरी 2018 में सात साल की बच्ची जैनब अंसारी के रेप और मर्डर के दोषी इमरान अली को चार बार फांसी और उम्र कैद की सजा सुनाई है. इस मामले की सुनवाई भारत के फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह पाकिस्तान की आतंकरोधी अदालत में हुई.pak की निर्भया के केस में चार दिन में आरोपी को फांसी की सजा, भारत में लगे थे 8 महीने

पाकिस्तान की आतंक रोधी अदालत को ट्रायल कोर्ट का दर्जा प्राप्त है. इमरान की सुनवाई आतंकवाद की धाराओं के तहत की गई. इन मामलों में रोज सुनवाई होनी जरूरी है और फैसला सात दिनों (कार्यदिवस) के भीतर आ जाना चाहिए. पाकिस्तान में गैंगरेप और मर्डर के मामले अक्सर आतंकवाद रोधी अदालत के पास आते हैं.

केवल 4 दिन में आया फैसला

अली के मामले की सुनवाई बंद दरवाजों के अंदर हुई थी. इसकी वजह मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी करनी थी. यही वजह है कि इस मामले का फैसला केवल चार दिनों की सुनवाई के बाद ही आ गया. इस केस की सुनवाई 14 फरवरी को शुरू हुई और फैसला 17 फरवरी को आ गया. इस दौरान 56 गवाहों की सुनवाई हुई, फॉरेंसिक सबूतों की जांच हुई और सवाल-जवाब भी हुए.

लाहौर हाई कोर्ट के पास जाएगा केस

पाकिस्तान में ट्रायल कोर्ट से फांसी की सजा मिलने पर यह मामला अपने आप हाई कोर्ट के पास चला जाता है. इस मामले में भी यही होगा. यानी इमरान को तुरंत फांसी नहीं दी जाएगी. पाकिस्तान का यह मामला भारत के निर्भया गैंगरेप की तरह उबाल खा रहा है. दोनों मामलों में दोनों देशों के हजारों लोग अलग-अलग शहरों इसके विरोध में  सड़कों पर उतरे. 

निर्भया गैंगरेप में लगे थे 8 महीने

निर्भया गैंगरेप की बात करें तो यह 16 दिसंबर 2012 को हुआ था और 29 दिसंबर को निर्भया की मौत हो गई थी. 2 जनवरी 2013 को भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने यौन अपराधों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का उद्घाटन किया था. 17 जनवरी से दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले में पांच बालिग आरोपियों की सुनवाई शुरू की, जिसमें करीब 8 महीने बाद- 13 सितंबर 2013 को फैसला आया. इसमें सभी चार आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई. इससे पहले, 11 मार्च को मामले के मुख्य आरोपी राम सिंह ने दिल्ली की तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी.

अब भी जारी है सुनवाई

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना फैसला दिल्ली हाई कोर्ट को भेजा था और 13 मार्च 2014 को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा था. 2 जून को दो दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और 11 जुलाई 2016 से इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई. 5 मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा. इस मामले में अब भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है.

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