PGI के नाम एक और रिकॉर्ड, 12 घंटे में किए चार किडनी ट्रांसप्लांट…

 पीजीआई के रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी डिपार्टमेंट ने हासिल की एक और उपलब्धि। मात्र 12 घंटे में छह ऑपरेशन कर चार मरीजों को नई जिंदगी दी। तीन डॉक्टरों की टीम ने चार किडनी ट्रांसप्लांट किए, जो इतने कम समय में संभव नहीं है। दो दिवंगत डोनरों से पहले किडनी सुरक्षित निकालकर चार मरीजों में ट्रांसप्लांट किए गए।PGI के नाम एक और रिकॉर्ड, 12 घंटे में किए चार किडनी ट्रांसप्लांट...आंदोलनकारियों ने पंचायत भवन में लगाई आग, सरकारी वाहन में तोड़फोड़…

इस प्रकार से कुल छह ऑपरेशन किए गए।विभाग के एचओडी डा. आशीष शर्मा ने बताया कि इससे पहले 24 घंटे में चार ऑपरेशन किए गए थे, लेकिन इस बार सिर्फ12 घंटे में ही टीम ने कमाल कर दिया।डॉक्टरों ने बताया कि शुक्रवार को विभाग के एचओडी डा. आशीष शर्मा और डा. दीपेश छुट्टी पर थे। सिर्फ डा. सर्वजीत ड्यूटी पर थे। शुक्रवार शाम को पता चला कि हरियाणा के कैथल और अंबाला से दो ब्रेन डेड पेशेंट आए हैं। डा. सर्वजीत ने दिवंगत डोनर और रीसिपिएंट (वह मरीज, जिनमें ट्रांसप्लांट होना था) की जांच की।

सब कुछ सही निकला, लेकिन अब समस्या यह थी कि साथी डाक्टर छुट्टी पर थे। एक साथ इतने सारे आपरेशन कैसे किए जाए। डा. सर्वजीत ने इस बारे में डा. आशीष को बताया। उन्होंने तत्काल छुट्टी रद्द कर पीजीआई पहुंचने की बात कही। साथ ही डा. दीपेश भी छुट्टी रद्द कर पीजीआई पहुंच गए। ऑपरेशन की सभी तैयारियां डॉ. सर्वजीत ने कर रखी थी। शुक्रवार सुबह साढ़े सात बजे आपरेशन शुरू किया गया और रात आठ बजे तक जाकर ऑपरेशन खत्म हुआ।

सिर्फ स्नैक्स के सहारे ओटी में रहे

12 घंटे तक आपरेशन के दौरान डाक्टर सिर्फ स्नैक्स के सहारे ओटी में रहे। तीन टीमों को एक-एक डाक्टरों ने संभाला और ऑपरेशन किया। इससे न सिर्फ दिवंगत डोनरों के परिजनों की इच्छा पूरी हुई बल्कि चार उन मरीजों को नई जिंदगी मिली, जो डायलिसिस के सहारे जिंदगी बसर कर रहे थे। रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी टीम का ही कमाल है कि मात्र 14 दिन में 11 दिवंगत डोनरों से ट्रांसप्लांट किया गया है।

हरियाणा के थे दोनों दिवंगत डोनर 
हरियाणा के अंबाला निवासी अवतार सिंह एक्सीडेंट में घायल हो गए थे। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें पीजीआई लाया गया। 11 जुलाई को उन्हें ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनकी किडनी और कोर्नियां सुरक्षित निकाली गईं और साथ ही दोनों किडनी ट्रांसप्लांट कर दी गई। उसके बाद दूसरे दिवगंत डोनर कुलदीप सिंह जो अंबाला के थे, वह भी एक्सीडेंट में घायल हुए थे। ब्रेन डेड होने के बाद उनकी दोनों किडनी, लिवर और दो कोर्निया सुरक्षित निकाली गईं। दोनों किडनियों को रीनल ट्रांसप्लांट की टीम ने ट्रांसप्लांट किए।

इसमें दिवंगत डोनर के परिजनों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे मुश्किल वक्त में इतने मजबूत फैसले लेना किसी भी साहस से कम नहीं है। साथ ही पीजीआई डाक्टरों और स्टाफ के समपर्णता को मैं सलाम करता हूं कि वे बिना वक्त गंवाए 12 घंटे तक ओटी में रहे और मरीजों को नया जीवन दिया।

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