PNB घोटाले में थी टॉप लेवल पर मिलीभगत, छिपाता रहा बैंक

पंजाब नेशनल बैंक की आंतरिक जांच में खुलासा हुआ है कि हाल में 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले में बैंक के कुछ नहीं बल्कि कई शाखाओं की मिलीभगत है. आंतरिक जांच के मुताबिक पीएनबी के बैंकिंग ढांचे में कई गंभीर खामियां मौजूद हैं जिसके चलते हजारों करोड़ रुपये के इस घोटाले को पकड़ना बेहद मुश्किल काम था.  पंजाब नेशनल बैंक की आंतरिक जांच में खुलासा हुआ है कि हाल में 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले में बैंक के कुछ नहीं बल्कि कई शाखाओं की मिलीभगत है. आंतरिक जांच के मुताबिक पीएनबी के बैंकिंग ढांचे में कई गंभीर खामियां मौजूद हैं जिसके चलते हजारों करोड़ रुपये के इस घोटाले को पकड़ना बेहद मुश्किल काम था.    न्यूज एजेंसी राइटर के मुताबिक पीएनबी ने अपनी जांच रिपोर्ट में माना है कि इस घोटाले में बैंक के कुल 54 कर्मचारी जिम्मेदार है. इन कर्मचारियों में बैंक क्लर्क से लेकर विदेशी मुद्रा शाखा के अधिकारी और बैंक ऑडिटर से लेकर कई कई क्षेत्रीय शाखाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.  हालांकि इससे पहले अप्रैल में बैंक के सीईओ सुनील मेहता ने दावा किया था कि इस घोटाले में शामिल 21 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. इस रिपोर्ट के उजागर होने से पहले तक पीएनबी की दलील थी कि यह घोटाला मुंबई की महज एक ब्राडी हाउस ब्रांच के मुट्टी भर कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते संभव हुआ है. पीएनबी की दलील के मुताबिक इस ब्रांच के कुछ कर्मचारी बीते कई वर्षों से नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी जारी करने का काम करते थे जिसके आधार पर मोदी और चोकसी विदेश में पीएनबी को हजारों करोड़ डॉलर का नुकसान पहुंचाने का काम करते थे.  खास बात यह है कि अभीतक पीएनबी के प्रमुख इस घोटाले को एक छोटी सी घटना बताने का काम कर रहे थे लेकिन राइटर के हाथ लगी पीएनबी की आंतरिक रिपोर्ट से साफ हो गया है कि पीएनबी इस घोटालों की गंभीरता को नकारने में लगी थी. रिपोर्ट में ऐसे कई चौकाने वाले खुलासे किए गए हैं जिससे इस बात का अंदाजा लगता है कि कैसे सरकारी बैंक की लचर व्यवस्था को कायम रखते हुए बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारियों ने बड़े स्तर की मिलीभगत के साथ इस घोटाले को अंजाम देने का काम किया है.  इसे पढ़ें: रद्द पासपोर्ट पर घूम रहा नीरव मोदी, 7 पॉइंट में जानें किसकी चूक?  गौरतलब है कि बैंक की यह आंतरिक रिपोर्ट 5 अप्रैल तक तैयार हो गई थी और इस रिपोर्ट के साथ-साथ बैंक रिकॉर्ड से मिले दर्जनों संवेदनशील दस्तावेज जांच एजेंसियों के पास बतौर सुबूत मौजूद है. लेकिन इस रिपोर्ट की खास खुलासों का जिक्र फिलहाल आम नहीं किया गया और मौजूदा समय तक पीएनबी के वरिष्ठ अधिकारी इस घोटाले को एक छोटी घटना करार देते रहे.    पीएनबी की इस रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि जनवरी में घोटाले के खुलासे के बाद भी बैंक की तरफ से सख्त कदम नहीं उठाए गए हैं. न तो बैंक क ऊपर किसी तरह की पेनाल्टी लगाई गई है और न ही इसकी जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ अधिकारी पर तय की गई है जबकि आंतरिक जांच में यह साफ पता चला है कि इस मामले में बैंक के वरिष्ठ स्तर के अधिकारी भी लिप्त हैं.  इसे पढ़ें: नीरव का CBI को जवाब-बिजी हूं, जांच में नहीं हो सकता शामिल  आंतरिक रिपोर्ट ने यह भी माना है कि पीएनबी के नई दिल्ली स्थित हेडक्वार्टर में क्रेडिट रिव्यू और इंटरनेशनल बैंकिंग शाखा में कई सुरक्षा खामियों के चलते भी इस घोटाले को इतने लंबे समय तक नहीं पकड़ा जा सका. इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है बैंक की अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग शाखा और आईटी डिपार्टमेंट ने लंबे समय तक बैंक के आंतरिक सूचना संचार के काम को पूरा नहीं किया जिसके चलते मुबंई की शाखा से लगातार जारी हो रहे बैंक गारंटी की सूचना दबी रहती थी और किसी को इस घोटाले की भनक नहीं लगी.  हालांकि 2016 में बैंक ने एक एडवाइजरी भी जारी करते हुए कहा था कि सूचार संचार के काम को जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाए. इसके अलावा एक खास बात और इस रिपोर्ट से उजागर हो रही है कि मुंबई की ब्राडी हाउस ब्रांच पीएनबी की सबसे टॉप परफॉर्मिंग ब्रांच थी और यह तमगा उसे मोदी और चोकसी के अकाउंट के चलते ही मिला था. लिहाजा, यह भी साफ है कि बैंक के शीर्ष स्तर तक यह जानकारी थी कि बीते कुछ वर्षों से मुंबई की इस ब्रांच में बड़े स्तर पर कर्ज देने का काम हो रहा है लेकिन किसी ने इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश नहीं की.

न्यूज एजेंसी राइटर के मुताबिक पीएनबी ने अपनी जांच रिपोर्ट में माना है कि इस घोटाले में बैंक के कुल 54 कर्मचारी जिम्मेदार है. इन कर्मचारियों में बैंक क्लर्क से लेकर विदेशी मुद्रा शाखा के अधिकारी और बैंक ऑडिटर से लेकर कई कई क्षेत्रीय शाखाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.

हालांकि इससे पहले अप्रैल में बैंक के सीईओ सुनील मेहता ने दावा किया था कि इस घोटाले में शामिल 21 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. इस रिपोर्ट के उजागर होने से पहले तक पीएनबी की दलील थी कि यह घोटाला मुंबई की महज एक ब्राडी हाउस ब्रांच के मुट्टी भर कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते संभव हुआ है. पीएनबी की दलील के मुताबिक इस ब्रांच के कुछ कर्मचारी बीते कई वर्षों से नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी जारी करने का काम करते थे जिसके आधार पर मोदी और चोकसी विदेश में पीएनबी को हजारों करोड़ डॉलर का नुकसान पहुंचाने का काम करते थे.

खास बात यह है कि अभीतक पीएनबी के प्रमुख इस घोटाले को एक छोटी सी घटना बताने का काम कर रहे थे लेकिन राइटर के हाथ लगी पीएनबी की आंतरिक रिपोर्ट से साफ हो गया है कि पीएनबी इस घोटालों की गंभीरता को नकारने में लगी थी. रिपोर्ट में ऐसे कई चौकाने वाले खुलासे किए गए हैं जिससे इस बात का अंदाजा लगता है कि कैसे सरकारी बैंक की लचर व्यवस्था को कायम रखते हुए बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारियों ने बड़े स्तर की मिलीभगत के साथ इस घोटाले को अंजाम देने का काम किया है.

गौरतलब है कि बैंक की यह आंतरिक रिपोर्ट 5 अप्रैल तक तैयार हो गई थी और इस रिपोर्ट के साथ-साथ बैंक रिकॉर्ड से मिले दर्जनों संवेदनशील दस्तावेज जांच एजेंसियों के पास बतौर सुबूत मौजूद है. लेकिन इस रिपोर्ट की खास खुलासों का जिक्र फिलहाल आम नहीं किया गया और मौजूदा समय तक पीएनबी के वरिष्ठ अधिकारी इस घोटाले को एक छोटी घटना करार देते रहे.  

पीएनबी की इस रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि जनवरी में घोटाले के खुलासे के बाद भी बैंक की तरफ से सख्त कदम नहीं उठाए गए हैं. न तो बैंक क ऊपर किसी तरह की पेनाल्टी लगाई गई है और न ही इसकी जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ अधिकारी पर तय की गई है जबकि आंतरिक जांच में यह साफ पता चला है कि इस मामले में बैंक के वरिष्ठ स्तर के अधिकारी भी लिप्त हैं.

आंतरिक रिपोर्ट ने यह भी माना है कि पीएनबी के नई दिल्ली स्थित हेडक्वार्टर में क्रेडिट रिव्यू और इंटरनेशनल बैंकिंग शाखा में कई सुरक्षा खामियों के चलते भी इस घोटाले को इतने लंबे समय तक नहीं पकड़ा जा सका. इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है बैंक की अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग शाखा और आईटी डिपार्टमेंट ने लंबे समय तक बैंक के आंतरिक सूचना संचार के काम को पूरा नहीं किया जिसके चलते मुबंई की शाखा से लगातार जारी हो रहे बैंक गारंटी की सूचना दबी रहती थी और किसी को इस घोटाले की भनक नहीं लगी.

हालांकि 2016 में बैंक ने एक एडवाइजरी भी जारी करते हुए कहा था कि सूचार संचार के काम को जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाए. इसके अलावा एक खास बात और इस रिपोर्ट से उजागर हो रही है कि मुंबई की ब्राडी हाउस ब्रांच पीएनबी की सबसे टॉप परफॉर्मिंग ब्रांच थी और यह तमगा उसे मोदी और चोकसी के अकाउंट के चलते ही मिला था. लिहाजा, यह भी साफ है कि बैंक के शीर्ष स्तर तक यह जानकारी थी कि बीते कुछ वर्षों से मुंबई की इस ब्रांच में बड़े स्तर पर कर्ज देने का काम हो रहा है लेकिन किसी ने इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश नहीं की.

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