PSB में सुधार के एजेंडे पर आगे बढ़ी मोदी सरकार, बैंकों को मिलेंगे एक लाख करोड़

केंद्र सरकार ने बैंकिंग सेक्टर में सुधार के लिए कमर कस लिया है. बैंकिंग सेक्टर में करीब एक लाख करोड़ रुपये की पूंजी डालकर सार्वजनिक बैंकों की हालत में सुधार करने की सरकार की योजना है. सरकार ने बुधवार को बैंकिेंग सेक्टर में सुधार का खाका जारी किया है. इस बारे में भी ब्योरा पेश किया गया है कि किस तरह से मार्च के अंत तक ही 20 सार्वजनिक बैंक रीकैपेटलाजेशन बॉन्ड के द्वारा 80,000 करोड़ रुपये जुटाएंगे.  

मोदी सरकार की योजना के मुताबिक 11 कमजोर बैंकों को ही कुल 52,311 करोड़ रुपये की पूंजी दी जाएगी, ताकि वे अपने न्यूनतम पूंजी जरूरत को बनाए रख पाएं. इसी तरह 9 मजबूत बैंकों को 35,828 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. ये ग्यारह कमजोर बैंक वे हैं जो लगातार न्यूनतम पूंजी, एनपीए, रिटर्न ऑफ एसेट आदि की शर्तों को पूरा नहीं कर पा रहे. बैंकों की व्यवस्था सुचारु रूप से चलाते रहने के लिए इन गाइडलाइन को लागू किया गया है.

खराब प्रदर्शन वाले को ज्यादा पूंजी

इेडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, आईडीबीआई बैंक को सबसे ज्यादा 10,610 करोड़ रुपये की पूंजी मिलेगी. इस बैंक का नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) 24.98 फीसदी तक पहुंच गया है. इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया को 9,232 करोड़ रुपये और भारतीय स्टेट बैंक को 8,800 करोड़ रुपये मिलेंगे. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को इस योजना की जानकारी देते हुए कहा कि कमजोर बैंकों को ज्यादा पैसा इसलिए दिया जा रहा है ताकि वे न्यूनतम पूंजी की ‘नियामक जरूरत’ को पूरा कर सकें. जेटली ने कहा कि सरकार उपयुक्त समय पर आईडीबीआई बैंक का पुर्नगठन करेगी.

माल्या जैसे कर्जदारों पर होगी खास नजर

पिछले साल अक्टूबर में सरकार ने यह घोषणा की थी कि बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डाली जाएगी. तब सरकार ने यह संकेत दिया था कि कमजोर बैंकों को प्राथमिकता दी जाएगी. हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि अब बैंकों के एसेट की गुणवत्ता पर गहरी नजर रखने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे. 250 करोड़ रुपये से ज्यादा के कॉरपोरेट लोन की एजेंसियों द्वारा ‘खास निगरानी’ की जाएगी.

सरकार सार्वजनिक बैंकों में ही एक लाख करोड़ रुपये की पूंजी डालेगी. 80 हजार करोड़ रुपये रीकैपेटलाइजेशन बॉन्ड, 8,139 करोड़ ग्रॉस बजटरी सपोर्ट के द्वरा दिए जाएंगे और 10,312 करोड़ रुपये बाजार से जुटाए जाएंगे. बैंकिंग सचिव राजीव कुमार ने बताया कि बैंकों में पूंजी डालने से आर्थिक तरक्की को बढ़ावा मिलेगा और समूची अर्थव्यवस्था में कम से कम पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज प्रवाह बढ़ेगा.

सरकार 10 से 15 साल की परिपक्वता वाले रीकैपेटलाइजेशन बॉन्ड जारी करेगी, जिन पर 8 फीसदी के आसपास ब्याज मिल सकेगा.

योजना के अनुसार यूको बैंक को 6,507 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 5,158 करोड़ रुपये, इंडियन ओवरसीज बैंक को 4,694 करोड़ रुपये, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स 3,571 करोड़ रुपये, देना बैंक को 3,045 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ महाराष्ट्र को 3,173 करोड़ रुपये, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को 2,364 करोड़ रुपये, कॉरपोरेशन बैंक को 2,187 करोड़ रुपये और इलाहाबाद बैंक को 1,500 करोड़ रुपये दिए जाएंगे.

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