REVIEW: अच्छी नॉवेल पर बनी कमजोर कहानी है नूर

फिल्म का नाम: नूर
डायरेक्टर: सुनहिल सिप्पी
स्टार कास्ट: सोनाक्षी सिन्हा, कनन गिल, मनीष चौधरी, पूरब कोहली, शिबानी दांडेकर, स्मिता ताम्बे
अवधि: 1 घंटा 54 मिनट
सर्टिफिकेट: U/A
रेटिंग: 2 स्टा

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साल 2014 में पाकिस्तानी जर्नलिस्ट-राइटर सबा सैयद ने ‘कराची यू आर कीलिंग मीं’ नामक नॉवेल लिखा जो की बेस्टसेलर के रूप में भी सबके सामने आया. नॉवेल में कहानी 20 साल की जर्नलिस्ट आयशा की थी, जिसे ‘नूर’ फिल्म के जरिए सामने लाया गया है. उपन्यास पर आधारित और सोनाक्षी सिन्हा के लीड रोल के साथ कैसी बनी है यह फिल्म, आइए जानते हैं:

कहानी:
यह कहानी मुंबई की रहने वाली 28 साल की जर्नलिस्ट नूर रॉय चौधरी (सोनाक्षी सिन्हा) की है, जो अपने पिता के साथ रहती है. नूर की मां की बचपन में ही डेथ हो चुकी है. नूर की जिंदगी में उसके दो दोस्त जारा पटेल (शिबानी दांडेकर) और साद सहगल (कनन गिल) काफी अहमियत रखते हैं. नूर हमेशा रीयल मुद्दे पर आधारित स्टोरीज करना चाहती है लेकिन उसका बॉस शेखर दास (मनीष चौधरी) हमेशा ही उसे एंटरटेनमेंट की स्टोरी करने को कहता है.

इसी बीच नूर को एक ऐसे गैंग की कहानी का पता चलता है जो बहुत बड़ा रैकेट चलाता है और जिसमें शहर के बड़े-बड़े लोग भी इन्वॉल्व हैं. नूर ये स्टोरी करती भी है लेकिन उसकी स्टोरी चोरी हो जाती है. इसी बीच कहानी में अयान बनर्जी (पूरब कोहली) की एंट्री होती है. अंततः कहानी में कई मोड़ आते हैं और कहानी को अंजाम मिलता है.

कमजोर कड़ियां:
फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी कहानी है जो काफी बोरिंग है और बहुत ही धीरे धीरे चलती है , इसकी रफ़्तार तेज की जा सकती थी और साथ ही जिस नॉवेल पर आधारित यह फिल्म है उसमें कई सारे उतार चढ़ाव और थ्रिलिंग एलिमेंट्स होते हैं पर फिल्म को कोई और ही रूप दे दिया गया है जिसकी वजह से काफी फीकी फीकी सी कहानी बन गयी.

कोई भी किरदार न्यायसंगत सा नजर नहीं आता और कई जगहों पर काफी खींची खींची कहानी लगती है. फिल्म में मुंबई से रिलेटेड एक बड़ा मोनोलॉग है, जिसकी लिखावट तो कमाल की है लेकिन उसे और भी दमदार तरीके से पेच किया जा सकता था. एक जर्नलिस्ट की कहानी फिल्म में दर्शायी गयी है लेकिन जर्नलिस्ट के इर्द गिर्द या असल जिदंगी में चल रही कहानी को दर्शा पाने में सुनहिल असफल रहे हैं.

फिल्म क्यों देख सकते हैं:
फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा ने बहुत ही बढ़िया अभिनय किया है जो काफी दिलचस्प है. वहीं बाकी किरदार जैसे सोनाक्षी सिन्हा, कनन गिल, मनीष चौधरी, पूरब कोहली, शिबानी दांडेकर, स्मिता ताम्बे ने भी सहज अभिनय किया है. स्मिता ताम्बे ने कुछ सीन्स कमाल के किये हैं.

फिल्म की कहानी काफी दिलचस्प है और संवाद काफी हार्ड हीटिंग हैं. फिल्म का पहला और आखिरी सीन आपको सोचने पर विवश कर ही देता है. फिल्म का डायरेक्शन, लोकेशन अच्छा है और शूटिंग का तरीका बढ़िया है. संगीत ठीक ठाक है लेकिन ‘गुलाबी आंखें’ बेहतरीन सॉग है.

बॉक्स ऑफिस:
फिल्म का बजट लगभग 15 करोड़ बताया जा रहा है और डिजिटल और सैटेलाईट राइट्स के साथ फिल्म की कॉस्ट रिकवरी की उम्मीद भी है. फिल्म को 1300-1500 स्क्रीन्स के बीच रिलीज किया जाएगा जिसकी वजह से वीकेंड में कॉस्ट आराम से रिकवर होने के चांसेज बताए जा रहे हैं.

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