RTI से खुली केजरीवाल सरकार की बड़ी पोल, जिसे पढ़कर दिल्ली वालों का बढ़ जायेगा गुस्से का पारा

द‌िल्ली सरकार ने वसूला 787 करोड़ का ग्रीन टैक्स,पर्यावरण पर खर्च किए सिर्फ 93 लाख यानि खुद दिल्ली को प्रदुषण में धकेला गया …

दोस्तों  एक ओर दिल्लीवासी प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीँ दिल्‍ली के प्रदूषण को लेकर राजनीति जारी है. दरअसल राजधानी खतरनाक प्रदूषण की आगोश में है. प्रदूषण बढ़ते ही सरकार हर बार इसे दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने का दावा तो करती है लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है. ऐसा नहीं है कि सरकार के पास बजट नहीं है.

RTI से खुली केजरीवाल सरकार की बड़ी पोल, जिसे पढ़कर दिल्ली वालों का बढ़ जायेगा गुस्से का पारा सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर ढाई साल पहले दिल्ली आने वाले ट्रकों से ग्रीन टैक्स वसूलने का आदेश दिया था. लेकिन प्रदूषण के मुद्दे पर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार लगातार घिरती जा रही है. पहले ही केजरीवाल सरकार को एनजीटी से फटकार पड़ रही है और अब एक आरटीआई के जरिए खुलासा हुआ है कि सरकार ने पर्यावरण सेस के जरिए जो 700 करोड़ रुपए इकट्ठा किया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उसमें से वह सिर्फ 93 लाख रुपये ही खर्च कर पाई है.दिल्ली सरकार का कहना है कि सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग के पास सड़क निर्माण या उसे मेंटेन करने के लिए पर्याप्त बजट है इसलिए सेस का इस्तेमाल वहां नहीं किया गया है. सरकार इन पैसों का इस्तेमाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट को दुरुस्त करने में करेगी. सरकार जल्द ही 2000 बसों को खरीदने जा रही है.

PWD विभाग के पास पर्याप्त बजट !

जिसमें 1000 बसें डीटीसी और 1000 क्लस्टर बसों को खरीदा जाएगा. दिल्ली सरकार ने कहा है कि क्योंकि PWD विभाग के पास पर्याप्त बजट है इसलिए वहां बजट का प्रयोग नहीं हो सकता है. सरकार 787 करोड़ रुपए इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने में खर्च करेगी. आपको बता दें कि प्रदूषण के मुद्दे पर केजरीवाल सरकार लगातार मुश्किलों के घेरे में है.

एनजीटी कई दफा सरकार को फटकार लगा चुका है. दिल्ली सरकार ने जब ऑड इवन का प्रस्ताव रखा था, तब भी एनजीटी ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि आपने अभी तक बसों का इंतजाम क्यों नहीं किया है. इतना ही नहीं दिल्ली सरकार ने एनजीटी में ऑड इवन को लेकर 11 नवंबर के आदेश को पुनर्विचार के लिए याचिका डाली थी.

इसमें ऑड इवन से महिलाओं और टू-व्हीलर्स को छूट देने को कहा गया था. सरकार ने कहा था कि चूंकि अगर टू-व्हीलर्स को भी इस दायरे में लाया जाएगा, तो 30-35 लाख लोगों को ट्रांसपोर्ट की सुविधा देने के लिए 3500 अतिरिक्त बसों की जरूरत है.

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि 2015 से अब तक दिल्‍ली सरकार के खजाने में यह राशि करीब 787 करोड़ 12 लाख तक जा पहुंची है. इसमें से दिल्ली सरकार ने पिछले दो साल में जमा हुए खजाने में से सिर्फ 0.0011 फीसदी रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान के लिए खर्च किये.

 

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