SC में भी ख़ारिज हुआ कांग्रेस का महाभियोग प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस द्वारा दाखिल की गई याचिका एक दिन भी नहीं टिक सकी, कांग्रेस की इस अपील को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने खारिज कर दिया है. पीठ द्वारा महाभियोग प्रस्ताव पर फैसला सुनाने के बाद कपिल सिब्बल ने याचिका वापस ले ली. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भी कांग्रेस बौखलाई हुई नज़र आई और कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट की कार्य प्रणाली पर सवाल भी खड़े किए. सिब्बल ने कहा कि सिब्बल ने कहा कि याचिका को अभी नंबर नहीं मिला. एडमिट नहीं हुई, लेकिन रातों रात ये पीठ किसने बनाई? उन्होंने कहा कि यह जानना बेहद जरुरी है कि इस पीठ का गठन किसने किया है.सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस द्वारा दाखिल की गई याचिका एक दिन भी नहीं टिक सकी, कांग्रेस की इस अपील को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने खारिज कर दिया है. पीठ द्वारा महाभियोग प्रस्ताव पर फैसला सुनाने के बाद कपिल सिब्बल ने याचिका वापस ले ली. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भी कांग्रेस बौखलाई हुई नज़र आई और कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट की कार्य प्रणाली पर सवाल भी खड़े किए. सिब्बल ने कहा कि सिब्बल ने कहा कि याचिका को अभी नंबर नहीं मिला. एडमिट नहीं हुई, लेकिन रातों रात ये पीठ किसने बनाई? उन्होंने कहा कि यह जानना बेहद जरुरी है कि इस पीठ का गठन किसने किया है.  सिब्बल ने कहा कि चीफ जस्टिस इस मामले में प्रशासनिक या न्यायिक स्तर पर कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता, सभी मामलों को संविधान पीठ को रेफर किया जाता है, जब कानून का कोई सवाल उठा हो, लेकिन यहां फिलहाल कानून का कोई सवाल नहीं है. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ न्यायिक आदेश के जरिए ही संविधान पीठ को भेजा जा सकता है, प्रशासनिक आदेश के जरिए नहीं. उन्होंने इस याचिका को 5 जजों की पीठ के पास भेजने वाले आदेश की मांग भी की, उन्होंने कहा कि आदेश मिलने के बाद उस आदेश को चुनौती देने के बारे में विचार किया जाएगा.  इस मामले में अदालत ने कहा है कि राजनीति में रहकर वकालत नहीं की जा सकती है. कपिल सिब्बल के वकालत करने पर आर पी लूथरा और अश्विनी उपाध्याय ने विरोध करते हुए कहा कि भारत की बार कौंसिल राजनितिक वकीलों को प्रतिबंधित करती है. जिसके बाद कपिल सिब्बल ने याचिका वापिस ले ली. आपको बता दें कि इससे पहले सभापति वेंकैया नायडू द्वारा भी महाभियोग प्रस्ताव को ख़ारिज किया जा चुका है, जिसके बाद ही कांग्रेस के 2 सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी

सिब्बल ने कहा कि चीफ जस्टिस इस मामले में प्रशासनिक या न्यायिक स्तर पर कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता, सभी मामलों को संविधान पीठ को रेफर किया जाता है, जब कानून का कोई सवाल उठा हो, लेकिन यहां फिलहाल कानून का कोई सवाल नहीं है. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ न्यायिक आदेश के जरिए ही संविधान पीठ को भेजा जा सकता है, प्रशासनिक आदेश के जरिए नहीं. उन्होंने इस याचिका को 5 जजों की पीठ के पास भेजने वाले आदेश की मांग भी की, उन्होंने कहा कि आदेश मिलने के बाद उस आदेश को चुनौती देने के बारे में विचार किया जाएगा.

इस मामले में अदालत ने कहा है कि राजनीति में रहकर वकालत नहीं की जा सकती है. कपिल सिब्बल के वकालत करने पर आर पी लूथरा और अश्विनी उपाध्याय ने विरोध करते हुए कहा कि भारत की बार कौंसिल राजनितिक वकीलों को प्रतिबंधित करती है. जिसके बाद कपिल सिब्बल ने याचिका वापिस ले ली. आपको बता दें कि इससे पहले सभापति वेंकैया नायडू द्वारा भी महाभियोग प्रस्ताव को ख़ारिज किया जा चुका है, जिसके बाद ही कांग्रेस के 2 सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी

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