Thai Cave Rescue : मौत की गुफा से निकलना चमत्कार जैसा

थाइलैंड की पानी से भरी एक गुफा में 18 दिनों तक फंसे रहने के बाद सुरक्षित निकाले गए वाइल्ड बोअर फुटबॉल टीम के बच्चों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। बुधवार को अस्पताल से बाहर आने के बाद उन्होंने पहली बार मीडिया से बातचीत की और अपने सलामत रहने को चमत्कार बताया। गुफा से निकालने के बाद बच्चों को उत्तरी थाइलैंड में चियांग राई प्रांत के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।थाइलैंड की पानी से भरी एक गुफा में 18 दिनों तक फंसे रहने के बाद सुरक्षित निकाले गए वाइल्ड बोअर फुटबॉल टीम के बच्चों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। बुधवार को अस्पताल से बाहर आने के बाद उन्होंने पहली बार मीडिया से बातचीत की और अपने सलामत रहने को चमत्कार बताया। गुफा से निकालने के बाद बच्चों को उत्तरी थाइलैंड में चियांग राई प्रांत के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।  अस्पताल से निकलने के समय वहां मौजूद लोगों ने बच्चों का जोरदार स्वागत किया। बाहर आने के बाद बच्चों ने एक छोटे से अस्थायी पिच पर फुटबाल खेला और उसके बाद अपनी जगह पर बैठे। थाम लुआंग गुफा में 12 बच्चे अपने फुटबॉल कोच समेत फंस गए थे। डरावनी गुफा में मौत से लड़कर निकले बच्चों ने मीडिया से बात करते हुए उन खौफनाक दिनों को याद किया। 14 साल के अदुल सैम-ऑन ने कहा कि यह एक चमत्कार है। हम लोगों के पास कई दिनों तक खाने का कोई सामान नहीं था। प्यास लगने पर बाढ़ का पानी पीना पड़ता था। उसने उस पल को भी याद किया, जब दो ब्रिटिश गोताखोरों ने उन लोगों को गुफा जाकर खोजा था।   Thai Cave Rescue : गुफा से निकाले गए बच्चों के सामने अब उम्मीदों का बोझ यह भी पढ़ें  उसने कहा कि मुझे उनके सवालों का जवाब देने से पहले बहुत कुछ सोचना पड़ा रहा था। टीम के एक अन्य बच्चे ने कहा कि शुरू के एक-दो दिन तो ज्यादा बुरा नहीं लगा। लेकिन, बाद में हम लोग थकने लग गए। टीम के सबसे छोटे सदस्य टाइटन ने बताया कि मैं बिल्कुल शक्तिहीन हो गया था। मैं कोशिश कर रहा था कि खाने के बारे में कुछ न सोचूं, ताकि भूख ज्यादा न लगे।  एक अन्य ने कहा कि मैं तो बहुत डर गया था कि अब घर नहीं जा पाऊंगा। और यदि चला गया, तो मां से बहुत डांट पड़ेगी। इससे पहले टीम के बच्चों को तीन मिनी बसों में सवार होकर अस्पताल से निकलते देखा गया। इन बच्चों को निर्धारित समय से एक दिन पहले ही छुट्टी दे दी गई। बच्चे बुधवार को अपने-अपने घर पहुंच गए।   थाइलैंड रेस्क्यू : थाई सरकार ने भारत को कहा शुक्रिया, जानिए बच्चों का हाल यह भी पढ़ें  इस बीच, चिकित्सकों ने बच्चों के परिजनों से कहा है कि वे कम से कम एक महीने तक उन्हें पत्रकारों के संपर्क में नहीं आने दें। हालांकि, बताया जा रहा है कि बच्चे और उनके कोच की मानसिक और शारीरिक स्थिति ठीक है।  गुफा तोड़ने का किया था प्रयास -   Thai Cave Rescue : आस्ट्रेलियाई डॉक्टर की दवा ने बच्चों को निडर बनाया था यह भी पढ़ें  -23 जून को फुटबॉल का प्रैक्टिस मैच खेलने के बाद वाइल्ड बोअर टीम के बच्चे अपने कोच के साथ एक घंटे के लिए गुफा में घुसे थे।  -लेकिन, बारिश होने लगी और बच्चे गुफा में फंस गए। कोच एकापोल चांगथ्वांग ने बताया कि हमने गुफा को तोड़ने का प्रयास भी किया था। -   थाईलैंड : 18 दिन से गुफा में फंसे बच्चे निकले सुरक्षित, 8 देशों के 90 गोताखोरों ने की मदद यह भी पढ़ें  -उसने कहा कि हम लोगों ने पत्थर से गुफा की दीवार को तोड़ना शुरू किया। तीन-चार मीटर तक खोद भी डाला। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।  -उसने यह भी कहा कि लगभग हर किसी को तैरना आता था। हालांकि, कुछ बच्चे अच्छे तैराक नहीं थे। इसलिए तैरकर निकलने का प्रयास नहीं किया।

अस्पताल से निकलने के समय वहां मौजूद लोगों ने बच्चों का जोरदार स्वागत किया। बाहर आने के बाद बच्चों ने एक छोटे से अस्थायी पिच पर फुटबाल खेला और उसके बाद अपनी जगह पर बैठे। थाम लुआंग गुफा में 12 बच्चे अपने फुटबॉल कोच समेत फंस गए थे। डरावनी गुफा में मौत से लड़कर निकले बच्चों ने मीडिया से बात करते हुए उन खौफनाक दिनों को याद किया। 14 साल के अदुल सैम-ऑन ने कहा कि यह एक चमत्कार है। हम लोगों के पास कई दिनों तक खाने का कोई सामान नहीं था। प्यास लगने पर बाढ़ का पानी पीना पड़ता था। उसने उस पल को भी याद किया, जब दो ब्रिटिश गोताखोरों ने उन लोगों को गुफा जाकर खोजा था।

उसने कहा कि मुझे उनके सवालों का जवाब देने से पहले बहुत कुछ सोचना पड़ा रहा था। टीम के एक अन्य बच्चे ने कहा कि शुरू के एक-दो दिन तो ज्यादा बुरा नहीं लगा। लेकिन, बाद में हम लोग थकने लग गए। टीम के सबसे छोटे सदस्य टाइटन ने बताया कि मैं बिल्कुल शक्तिहीन हो गया था। मैं कोशिश कर रहा था कि खाने के बारे में कुछ न सोचूं, ताकि भूख ज्यादा न लगे।

एक अन्य ने कहा कि मैं तो बहुत डर गया था कि अब घर नहीं जा पाऊंगा। और यदि चला गया, तो मां से बहुत डांट पड़ेगी। इससे पहले टीम के बच्चों को तीन मिनी बसों में सवार होकर अस्पताल से निकलते देखा गया। इन बच्चों को निर्धारित समय से एक दिन पहले ही छुट्टी दे दी गई। बच्चे बुधवार को अपने-अपने घर पहुंच गए।

इस बीच, चिकित्सकों ने बच्चों के परिजनों से कहा है कि वे कम से कम एक महीने तक उन्हें पत्रकारों के संपर्क में नहीं आने दें। हालांकि, बताया जा रहा है कि बच्चे और उनके कोच की मानसिक और शारीरिक स्थिति ठीक है।

गुफा तोड़ने का किया था प्रयास –

-23 जून को फुटबॉल का प्रैक्टिस मैच खेलने के बाद वाइल्ड बोअर टीम के बच्चे अपने कोच के साथ एक घंटे के लिए गुफा में घुसे थे।

-लेकिन, बारिश होने लगी और बच्चे गुफा में फंस गए। कोच एकापोल चांगथ्वांग ने बताया कि हमने गुफा को तोड़ने का प्रयास भी किया था। 

-उसने कहा कि हम लोगों ने पत्थर से गुफा की दीवार को तोड़ना शुरू किया। तीन-चार मीटर तक खोद भी डाला। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

-उसने यह भी कहा कि लगभग हर किसी को तैरना आता था। हालांकि, कुछ बच्चे अच्छे तैराक नहीं थे। इसलिए तैरकर निकलने का प्रयास नहीं किया।

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