यहा के लोग भालू का खून-मांस खाते हैं, फिर किसलिए करते हैं उसके ही कंकाल की पूजा

मुर्गे-बकरे की बलि के बारे में आपने सुना होगा। मगर क्या कभी जंगली जानवरों की बलि होते देखी है। दुनिया में कई जगहें ऐसी हैं, जहां लोग जंगली जानवरों की बलि देते हैं। उन्हीं में से कई जगह भालू की बलि भी दी जाती है। लोग उनका खून पीते हैं। मांस खाते हैं और बाद में कंकाल को पूजते हैं। हमें-आपको सुनने में बेहद अजीब लगे। लेकिन यह सब परंपरा का हिस्सा है, पर कहां, यही सोच रहे हैं।

यहा के लोग भालू का खून-मांस खाते हैं, फिर किसलिए करते हैं उसके ही कंकाल की पूजा

दुनिया में आयनू (Ainu) नाम की जनजाति होती है। यह उत्तरी जापान के होक्कायडो द्वीप, मध्य और उत्तरी साइबेरिया और रूस के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। इन लोगों में सालों से एक खास किस्म की परंपरा चली आ रही है। भालुओं की बलि देकर उनके कंकाल को पूजने की। हां, यह बिल्कुल सच है।

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ये लोग भालुओं की बलि देते हैं। उनका खून पीते हैं और मांस खाते हैं। बाद में उनके कंकाल को खाल में लपेट कर एक जगह रखते हैं। एकजुट होते हैं और फिर उसकी विधि-विधान से पूजा करते हैं। यह जनजाति मानती है कि भालू और भगवान इंसान के बीच चलते हैं। उनकी बलि देने से इंसानियत का भला होगा, इसलिए वे ऐसा करते आ रहे हैं।

परंपरा के मुताबिक आयनू लोग सबसे पहले मादा भालू को गुफा में मार देते हैं। फिर वे उसके बच्चों को दो साल तक पालते-पोसते हैं। आगे जब वे बड़े हो जाते हैं, तो वे उन्हें भाले से मौत के घाट उतार देते हैं। इतना ही नहीं, वे उनका खून पीते और मांस खाते हैं। उनके कंकाल को खाल में लपेटकर एक जगह रखते हैं और फिर उसकी पूजा करते हैं। मगर वक्त के साथ यह परंपरा अब कुछ ही जगहों तक सिमट गई है।

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