US : भारतवंशी वैज्ञानिक के अंतिम संस्कार में पत्नी ने गाया भजन

नौ बार भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित हुए प्रख्यात भारतवंशी वैज्ञानिक ईसी जॉर्ज सुदर्शन का अमेरिका के टेक्सास प्रांत में अंतिम संस्कार कर दिया गया। 86 वर्षीय भौतिक विज्ञानी का 13 मई को टेक्सास के ऑस्टिन शहर में निधन हो गया था। अंतिम संस्कार के दौरान पत्नी भामती ने सुदर्शन का पसंदीदा भजन गाकर उन्हें भावभीनी विदाई दी। इस दौरान परिजनों के साथ उनके दोस्त और टेक्सास यूनिवर्सिटी के कई छात्र मौजूद रहे। सुदर्शन के परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे एलेक्स और अशोक हैं।नौ बार भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित हुए प्रख्यात भारतवंशी वैज्ञानिक ईसी जॉर्ज सुदर्शन का अमेरिका के टेक्सास प्रांत में अंतिम संस्कार कर दिया गया। 86 वर्षीय भौतिक विज्ञानी का 13 मई को टेक्सास के ऑस्टिन शहर में निधन हो गया था। अंतिम संस्कार के दौरान पत्नी भामती ने सुदर्शन का पसंदीदा भजन गाकर उन्हें भावभीनी विदाई दी। इस दौरान परिजनों के साथ उनके दोस्त और टेक्सास यूनिवर्सिटी के कई छात्र मौजूद रहे। सुदर्शन के परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे एलेक्स और अशोक हैं।  1931 में केरल में जन्मे सुदर्शन पिछले चालीस वर्षों से टेक्सास यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। पांच दशक लंबे करियर में उन्होंने क्वांटम ऑपटिक्स, क्वांटम जीनो इफेक्ट और क्वांटम कंप्यूटेशन से जुड़े कई सिद्धांत प्रतिपादित किए। सुदर्शन और उनके छात्र वीके देशपांडे ने प्रकाश से भी अधिक तेजी से चलने वाले कण टैकयॉन्स की मौजूदगी का दावा किया था जो आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती देता है।  सुदर्शन करीब दो दशक तक इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज में सीनियर प्रोफेसर और 1984 से 1991 तक चेन्नई के इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिकल साइंसेज के निदेशक भी रहे। शोध और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने 2007 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

1931 में केरल में जन्मे सुदर्शन पिछले चालीस वर्षों से टेक्सास यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। पांच दशक लंबे करियर में उन्होंने क्वांटम ऑपटिक्स, क्वांटम जीनो इफेक्ट और क्वांटम कंप्यूटेशन से जुड़े कई सिद्धांत प्रतिपादित किए। सुदर्शन और उनके छात्र वीके देशपांडे ने प्रकाश से भी अधिक तेजी से चलने वाले कण टैकयॉन्स की मौजूदगी का दावा किया था जो आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती देता है।

सुदर्शन करीब दो दशक तक इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज में सीनियर प्रोफेसर और 1984 से 1991 तक चेन्नई के इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिकल साइंसेज के निदेशक भी रहे। शोध और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने 2007 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

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