Video: अखिलेश यादव का आत्मघाती कदम, खत्म हो जाएगी समाजवादी पार्टी !

यूपी चुनाव में हार के बाद से समाजवादी पार्टी में मंथन का दौर जारी है। कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव पार्टी में फिर से नई जान फूंकने के लिए कुछ नए कदम उठाने जा रहे हैं। लेकिन अब उन्होंने जिस बात का एलान किया है उस से समाजवादी पार्टी के अस्तित्व पर खतरा दिखने लगा है। अपने पिता की विरासत को जबरन हथियाने वाले अखिलेश अब वो कदम उठाने की बात कर रहे हैं मुलायम सिंह यादव जिसके सख्त खिलाफ थे। जी हां अखिलेश ने मायावती के साथ गठबंधन के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि देश में जो भी गठबंधन बनेेगा सपा उसमें अहम भूमिका निभाएगी। अखिलेश ने कहा कि ये गठबंधन झूठ के खिलाफ होगा। इसी के साथ अखिलेश ने यूपी की योगी सरकार पर भी हमला बोला।

अखिलेश यादव ने कहा कि योगी सरकार जिस तरह से कााम कर रही है उस से लग रहा है कि उसके पास कोई नई योजना नहीं है। योगी सरकार जनता को धोखा दकर बनी है। उन्होंने कहा कि ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए। साफ है कि चुनाव में हार के बाद भी अखिलेश यादव जनता के जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. जनादेश का सम्मान नहीं करके अखिलेश एक तरह से जनता का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था खराब है। अखिलेश ने कहा कि एंटी रोमियो स्क्वाड के नाम पर युवाओं को दौड़ा दौड़ा कर पीटा जा रहा है। पुलिस ज्यादती कर रही है। अखिलेश ने योगी सरकार के 24 घंटे बिजली देने की बात पर कहा कि अभी जिन ट्रांसफॉर्मरों से बिजली दी जा रही है वो सपा सरकार के दौरान लगाए गए थे।
अखिलेश ने कहा कि योगी सरकार जिन योजनाओं का दम भर रही है वो सब सपा सरकार के दौरान शुरू हो चुकी हैं। इसके अलावा अखिलेश ने बीजेपी पर निशाना साधा कि बीजेपी वाले हमें हिंदू ही नहीं समझते हैं। लगता है कि मंदिर जाने के बाद उसकी फोटो शेयर करनी पड़ेगी। अखिलेश ने संघ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब दिन के हिसाब से कपड़े पहनने पड़ेंगे। अखिलेश ने कहा कि रविवार को निक्कर और टीशर्ट पहननी पड़ेगी। साफ है कि अखिलेश के पास जनता को बताने के लिए कुछ नहीं है। वो अपनी सरकार की नाकामियों को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर उनके पास प्रदेश के विकास का विजन था तो उसे लागू क्यों नहीं किया। अखिलेश यादव के बयान से जो सबसे अहम संकेत मिल रहा है वो गठबंंधन का है।
आपको बता दें कि अंबेडकर जयंती के मौके पर मायावती ने भी गठबंधन के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि वो बीजेपी के खिलाफ किसी से भी हाथ मिलाने को तैयार हैं। मायावती के बाद अब अखिलेश ने भी गठबंधन के संकेत दे दिए हैं। लेकिन गठबंधन कितने दलों के बीच होगा और क्या सबकी महत्वकांक्षा गठबंधन के आड़े नहीं आएगी। जिस तरह से केवल बीजेपी को रोकने के लिए सभी दल एक गठबंधन की बात कर रहे हैं क्या वो जनता से छुपा रह पाएगा। किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करने की ललक जनता भी समझने लगी है। पांच साल के कार्यकाल के दौरान अखिलेश ने ऐसा कुछ नहीं किया है जिसके दम पर वो जनता को कहें कि हमने काम किया था लेकिन आपने दूसरा मौका नहीं दिया कोई बात नहीं। जनता के जनादेश को सस्वीकार करके अखिलेश और बड़े नेता बन सकते थे। लेकिन उन्होंने राजनीति का शॉर्टकट चुना।

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