अगला लोकसभा चुनाव संभल से लड़ेंगे रामगोपाल…

अखिलेश यादव के करीबी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ने शनिवार को अपने संभल दौरे के दौरान रामगोपाल यादव ने इस बात की घोषणा की कि वे अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में संभल लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे. एक कार्यक्रम के दौरान रामगोपाल यादव ने मंच से कहा, “वैसे तो यह ऐलान करने का अधिकार अखिलेश यादव का है.” आपको बता दें कि इससे पहले अखिलेश यादव से नाराज चल रहे उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव के बारे में भी चर्चा चली थी कि वे इस बार कन्नौज सीट से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं.अगला लोकसभा चुनाव संभल से लड़ेंगे रामगोपाल...

शिवपाल कन्नौज से लड़ सकते हैं चुनाव
दरअसल, कन्नौज सीट से फिलहाल अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव समाजवादी पार्टी के टिकट पर सांसद हैं. लेकिन, कुछ समय पूर्व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बात की घोषणा की थी कि डिंपल यादव अब चुनाव नहीं लड़ेंगी. इसलिए इस बात की उम्मीद ज्यादा थी कि शिवपाल यादवकन्नौज सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. क्योंकि कन्नौज सीट पर समाजवादी पार्टी की पकड़ काफी मजबूत है.

बीजेपी सरकार पर साधा निशाना
संभल में आयोजित एक कार्यक्रम में सभा को संबोधित करते हुए रामगोपाल यादव ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “अगला चुनाव यूपी सरकार हारेगी. यदि बीजेपी यूपी में हारती है तो केंद्र में बीजेपी की हार निश्चित है.” भाजपा की केन्द्र सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने आगे कहा, “इस सरकार ने लाखों लोगों को बेरोजगार कर दिया. नोटबंदी से 40 प्रतिशत उद्योग बंद हो गए.”

बदलना पड़ा रास्ता
इससे पूर्व संभल दौरे पर आए सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव को वहां भारी विरोध का सामना करना पड़ा. जानकारी के मुताबिक संभल दौरे पर आए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव का कई संगठनों ने विरोध किया. कार्यकर्ता हाथों में काले झंडे व तख्तियां लेकर सड़क पर खड़े हो गए. हालात को देखते हुए रामगोपाल यादव का काफिला दूसरे रास्ते से गुजारा गया. दरअसल, लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि संभल को जिला बने 6 साल से ऊपर हो चुके हैं लेकिन अभी तक जिला मुख्यालय कहां बनेगा इसकी घोषणा नहीं की गई है. नाराज लोगों का कहना है कि 5 साल समाजवादी पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में रही मगर बार-बार कहने के बावजूद संभल जनपद का मुख्यालय नहीं बनाया गया और विकास के मामले में भी संभल की उपेक्षा की गई.

 

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