अब नेशनल मिशन से जुड़ी डीआरडीओ की इस वूमेन पावर पर हर भारतीय को होगा नाज

भारत ने अंतरिक्ष में अपना मानव मिशन भेजने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही भारत ने अपनी इस ऊंची उड़ान के लिए टीम भी लगभग फाइनल कर ली है। 2022 में जाने वाले इस मिशन पर न सिर्फ भारत की कई उम्‍मीदें टिकी हैं बल्कि दुनियाभर के देशों की निगाह भी इस ओर लगी है। भारत के इस मिशन 2022 और गगनयान से जो लोग जुड़े उनमें कुछ नाम बेहद खास हैं। खास बात ये है कि यह डीआरडीओ की वह वूमेन पावर है जो कई मिशन को कामयाबी के साथ अंजाम दे चुकी है। इन वूमेन पावर पर हर किसी को नाज है।भारत ने अंतरिक्ष में अपना मानव मिशन भेजने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही भारत ने अपनी इस ऊंची उड़ान के लिए टीम भी लगभग फाइनल कर ली है। 2022 में जाने वाले इस मिशन पर न सिर्फ भारत की कई उम्‍मीदें टिकी हैं बल्कि दुनियाभर के देशों की निगाह भी इस ओर लगी है। भारत के इस मिशन 2022 और गगनयान से जो लोग जुड़े उनमें कुछ नाम बेहद खास हैं। खास बात ये है कि यह डीआरडीओ की वह वूमेन पावर है जो कई मिशन को कामयाबी के साथ अंजाम दे चुकी है। इन वूमेन पावर पर हर किसी को नाज है।   जे मंजुला वैज्ञानिक जे मंजुला को रक्षा मंत्रालय के संस्थान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में पहली बार किसी महिला को महानिदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं। उन्‍हें महानिदेशक (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली संकुल) बनाया गया है। उन्‍होंने अपना पदभार भी संभाल लिया है। इससे पहले वह जुलाई 2014 से ही रक्षा वैमानिकी अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीएआरई) का निदेशक के तौर पर नेतृत्व कर रही थीं।   रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार सतीश रेड्डी होंगे डीआरडीओ के नए अध्यक्ष यह भी पढ़ें वी आर ललिताम्बिका डॉक्टर वी आर ललिताम्बिका को अंतरिक्ष कार्यक्रम गगनयान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस अभियान में 10,000 करोड़ रुपए की लागत आने की बात कही जा रही है। डॉक्टर ललिताम्बिका अनुभवी कंट्रोल सिस्टम इंजीनियर हैं। वो लगभग तीन दशकों से इसरो से जुड़ी हुई हैं। 56 वर्षीय डॉक्टर ललिताम्बिका की पढाई -लिखाई केरल में हुई है। वो दो बच्चो की मां हैं। काम के प्रति उनकी लगन और कुशलता को देखते हुए ही उन्हें इस काम के लिए चुना गया है। उन्होंने सभी भारतीय रॉकेट्स पोलर सैटेलाइट लॉन्च वाहन (पीएसएलवी), जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वाहन (जीएसएलवी) और स्वदेशी अंतरिक्ष शटल पर काम किया है। ललिताम्बिका इसके पहले तिरूवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में बतौर उप निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं।  टेस्सी थॉमस  टेस्सी थॉमस को भारत की मिसाइल वुमन के तौर पर जाना जाता है। टेस्सी थॉमस डीआरडीओ की वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। वो भारत में मिसाइल कार्यक्रम की अगुवाई करने वाली पहली महिला वैज्ञानिक हैं। टेस्सी थॉमस 1988 में डीआरडीओ से जुड़ी। उन्‍होंने भारत के मिसाइल मैन के नाम से मशहूर एपीजे अब्दुल कलाम के साथ भी काम किया है। टेस्सी अग्नि-3 मिसाइल कार्यक्रम में एसोसिएट प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में जुडी थी। इसके बाद उन्होंने अग्नि -4 और अग्नि-5 मिसाइल कार्यक्रम की प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहीं। टेस्सी थॉमस का जन्म अप्रैल 1963 में केरल में हुआ था। मदर टेरेसा के नाम पर टेस्सी रखा गया।   अब न बिजली कटने की होगी चिंता न बिल भरने की निकलेगी समय सीमा यह भी पढ़ें शशिकला सिन्हा दुनिया में बैलिस्टिक मिसाइल शील्ड विकसित करने वाला भारत चौथा देश है और इस उपलब्धि के पीछे डीआरडीओ की वैज्ञानिक शशिकला सिन्हा है। शशिकला सिन्हा को भारत की दूसरी मिसाइल वुमेन भी कहा जाता है। शशिकला सिन्हा के हाथों में एडवांस्ड एयर डिफेंस के अलावा बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट की कमान है। ग्रैजुएशन पूरी करने के बाद शशिकला सिन्हा ने डीआरडीओ ज्वाइन किया, लेकिन तीन साल काम करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया बाद में 2001 में फिर डीआरडीओ के लिए काम करना शुरू किया। उस वक्त डीआरडीओ भारतीय सेना के लिए एवोनिक्स और गाइडेड हथियारों पर काम कर रहा था। इसी दौरान शशिकला को मिसाइल डिफेंस शील्ड का विचार आया। साल 2012 में शशिकला सिन्हा को भारत के बहुप्रतीक्षित बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट का डॉयरेक्टर नियुक्त किया गया। साल 2017 को ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट का पहला टेस्ट किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा

जे मंजुला
वैज्ञानिक जे मंजुला को रक्षा मंत्रालय के संस्थान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में पहली बार किसी महिला को महानिदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं। उन्‍हें महानिदेशक (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली संकुल) बनाया गया है। उन्‍होंने अपना पदभार भी संभाल लिया है। इससे पहले वह जुलाई 2014 से ही रक्षा वैमानिकी अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीएआरई) का निदेशक के तौर पर नेतृत्व कर रही थीं।

वी आर ललिताम्बिका
डॉक्टर वी आर ललिताम्बिका को अंतरिक्ष कार्यक्रम गगनयान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस अभियान में 10,000 करोड़ रुपए की लागत आने की बात कही जा रही है। डॉक्टर ललिताम्बिका अनुभवी कंट्रोल सिस्टम इंजीनियर हैं। वो लगभग तीन दशकों से इसरो से जुड़ी हुई हैं। 56 वर्षीय डॉक्टर ललिताम्बिका की पढाई -लिखाई केरल में हुई है। वो दो बच्चो की मां हैं। काम के प्रति उनकी लगन और कुशलता को देखते हुए ही उन्हें इस काम के लिए चुना गया है। उन्होंने सभी भारतीय रॉकेट्स पोलर सैटेलाइट लॉन्च वाहन (पीएसएलवी), जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वाहन (जीएसएलवी) और स्वदेशी अंतरिक्ष शटल पर काम किया है। ललिताम्बिका इसके पहले तिरूवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में बतौर उप निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं।

टेस्सी थॉमस 
टेस्सी थॉमस को भारत की मिसाइल वुमन के तौर पर जाना जाता है। टेस्सी थॉमस डीआरडीओ की वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। वो भारत में मिसाइल कार्यक्रम की अगुवाई करने वाली पहली महिला वैज्ञानिक हैं। टेस्सी थॉमस 1988 में डीआरडीओ से जुड़ी। उन्‍होंने भारत के मिसाइल मैन के नाम से मशहूर एपीजे अब्दुल कलाम के साथ भी काम किया है। टेस्सी अग्नि-3 मिसाइल कार्यक्रम में एसोसिएट प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में जुडी थी। इसके बाद उन्होंने अग्नि -4 और अग्नि-5 मिसाइल कार्यक्रम की प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहीं। टेस्सी थॉमस का जन्म अप्रैल 1963 में केरल में हुआ था। मदर टेरेसा के नाम पर टेस्सी रखा गया।

शशिकला सिन्हा
दुनिया में बैलिस्टिक मिसाइल शील्ड विकसित करने वाला भारत चौथा देश है और इस उपलब्धि के पीछे डीआरडीओ की वैज्ञानिक शशिकला सिन्हा है। शशिकला सिन्हा को भारत की दूसरी मिसाइल वुमेन भी कहा जाता है। शशिकला सिन्हा के हाथों में एडवांस्ड एयर डिफेंस के अलावा बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट की कमान है। ग्रैजुएशन पूरी करने के बाद शशिकला सिन्हा ने डीआरडीओ ज्वाइन किया, लेकिन तीन साल काम करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया बाद में 2001 में फिर डीआरडीओ के लिए काम करना शुरू किया। उस वक्त डीआरडीओ भारतीय सेना के लिए एवोनिक्स और गाइडेड हथियारों पर काम कर रहा था। इसी दौरान शशिकला को मिसाइल डिफेंस शील्ड का विचार आया। साल 2012 में शशिकला सिन्हा को भारत के बहुप्रतीक्षित बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट का डॉयरेक्टर नियुक्त किया गया। साल 2017 को ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट का पहला टेस्ट किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा

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