अब मदरसों के syllabus में होगा बदलाव, NCERT की किताबों से होगी पढ़ाई

मदरसों में पढ़ने वाले छात्र भी अब स्कूली छात्रों से कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे। तैतानिया (कक्षा 1 से 5) और फौकानिया (कक्षा 5 से 8) तक आधुनिक विषयों का ककहरा सिखाने के बाद मदरसा बोर्ड अब आलिया या उच्च आलिया स्तर (हाईस्कूल व उससे ऊपर) पर भी आधुनिक विषयों को अनिवार्य विषय के तौर पर शामिल करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव लागू होने के बाद मदरसों के छात्र एनसीईआरटी की किताबों से अपना भविष्य बनाएंगे।अब मदरसों के syllabus में होगा बदलाव, NCERT की किताबों से होगी पढ़ाईअभी-अभी रेलवे यात्रियों के लिए आई बड़ी खबर, 1 नवंबर से होने जा रहे है भारतीय रेलवे में ये बड़े बदलाव

मदरसों में गणित, विज्ञान, कंप्यूटर, इतिहास व भूगोल पढ़ाने की प्रदेश सरकार से मंजूरी मिलने के बाद मदरसा बोर्ड इन विषयों को अनिवार्य करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है। मदरसा बोर्ड के मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल में अरबी, फारसी व उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, नागरिक शास्त्र, कंप्यूटर विषय विकल्प के तौर पर पढ़ाए जा रहे हैं।

जबकि, तैतानिया और फौकानिया में सरकारी स्कूलों की तर्ज पर हिंदी, अंग्रेजी, गणित आदि विषय पाठयक्रम में शामिल हैं। बोर्ड तैतानिया और फौकानिया स्तर में भी शैक्षणिक सुधार की जरूरत महसूस कर रहा है, ताकि आलिया और उच्च आलिया स्तर पर आधुनिक विषयों को अनिवार्य करने पर छात्रों को समस्याओं का सामना न करना पड़े।

प्राथमिक स्तर पर मदरसों में ये पढ़ाए जाते हैं विषय 

मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार राहुल गुप्ता का कहना है कि प्राथमिक स्तर पर मदरसों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, साइंस, भूगोल अनिवार्य है,  लेकिन मुंशी, मौलवी यानी हाईस्कूल के बाद गणित, सामाजिक विज्ञान, इतिहास, भूगोल व साइंस के साथ तिब विषय वैकल्पिक तौर पर शामिल है।

उन्होंने बताया कि मुंशी, मौलवी में विज्ञान व गणित का विकल्प चुनने वाले छात्रों को भी कक्षा आठ के स्तर की शिक्षा दी जाती है। मदरसा छात्रों को स्कूलों के छात्रों के बराबर खड़ा करने के लिए आधुनिक विषयों को अनिवार्य कर स्तर सुधारने की कोशिश की जा रही है।

हिंदी व अंग्रेजी के अलावा अन्य विषयों की किताबें उर्दू में होंगी
रजिस्ट्रार ने बताया कि पाठ्यक्रम में सुधार के लिए सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। मदरसा बोर्ड पाठ्यक्रम में आधुनिक विषयों के लिए  एनसीईआरटी की किताबें शामिल होंगी। हिंदी व अंग्रेजी को छोड़ सभी विषयों की किताबें उर्दू में होंगी। उन्होंने बताया कि सभी कक्षाओं में दीनियात की किताबें बाजार में मुश्किल से मिलती हैं। इसके चलते बोर्ड ने दीनियात की अपनी किताबें तैयार करवाने का निर्णय लिया है।

सूबे में 19 हजार से ज्यादा मदरसे संचालित कर रहा है बोर्ड 

प्रदेश में बोर्ड से मान्यता प्राप्त तहतानिया (कक्षा 1 से 5), फौकानिया (कक्षा 6 से 8) और आलिया स्तर (मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल व  फाजिल) के कुल 19143 मदरसे हैं। इनमें से 560 मदरसे सरकार से अनुदानित हैं। जबकि, बोर्ड से मान्यता प्राप्त 3867 मदरसे भी संचालित हैं। रजिस्ट्रार ने बताया कि आलिया स्तर के मदरसों में इस साल कुल 3,77,295 छात्र-छात्राएं शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इसके अलावा,  तहतानिया स्तर के मदरसों में 8,33,400, फौकानिया स्तर के मदरसों में 5,87,100 छात्र शिक्षा ले रहे हैं।

इस तरह से संचालित होते हैं मदरसे
तहतानिया-कक्षा एक से पांच
फौकानिया-कक्षा छह से आठ
मुंशी-मौलवी-हाईस्कूल, यूपी सरकार की मान्यता
आलिम-इंटरमीडियट, यूपी सरकार से मान्यता
कामिल-बीए, यूजीसी की मान्यता नहीं
फाजिल-एमए, यूजीसी की मान्यता नहीं

तैतानिया व फौकानिया का पाठ्यक्रम
कुरान करीम, दीनियात व खिलाफियात, उर्दू, गणित, सामाजिक विज्ञान, सामान्य ज्ञान, खेलकूद, पीटी, विज्ञान और हिंदी।
मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल का पाठ्यक्रम
मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल में कुरान, हदीस, इस्लामी इतिहास, उर्दू अदब, सामान्य हिंदी, सामान्य अंग्रेजी अनिवार्य विषय के तौर पर शामिल हैं। विकल्प के तौर कंप्यूटर, सामाजिक विज्ञान, टाइपिंग, विज्ञान, गृह विज्ञान, गणित, तिब यानी वैकल्पिक चिकित्सा है।

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