अर्द्ध कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण के जरिये पानी से बन सकेगा ईंधन

जितनी तेजी से आबादी बढ़ रही है उतनी ही रफ्तार से ईंधन की खपत में भी इजाफा हो रहा है। दुनिया भर के वैज्ञानिक वैकल्पिक ईंधन को तैयार करने में प्रयासरत हैं। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उन्होंने एक ऐसी अद्र्घ कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण प्रणाली विकसित की है, जिससे सूरज की रोशनी का इस्तेमाल कर पानी से हाइड्रोजन ईंधन तैयार किया जा सकता है। इस प्रणाली की खोज से वैज्ञानिक बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है कि यह प्रणाली ईंधन की समस्या को खत्म करने सफल साबित हो सकती है।

हमारे ग्रह पर होने वाली महत्वपूर्ण रासायनिक क्रिया

प्रकाश संश्लेषण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें पेड़-पौधे सूरज की रोशनी को ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। इस प्रक्रिया में जब पेड़-पौधों द्वारा अवशोषित किया गया पानी विभाजित होता है तो सह उत्पाद के रूप में ऑक्सीजन मुक्त होती है। हमारे ग्रह पर होने वाली यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण रासायनिक क्रिया है क्योंकि दुनिया को इसी के जरिये ऑक्सीजन मिलती है। पानी के विभाजित होने के बाद बनी हाइड्रोजन का प्रयोग नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जा सकता है।

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