आंध्र प्रदेश के किसान ने एक ही पेड़ में उगाए 18 किस्म के आम

उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद में रहने वाले हाजी कालीमुल्ला खान को मैंगो मैन कहा जाता है। उन्होंने एक पेड़ पर 300 से अधिक किस्म के आमों की पैदावार का कारनामा किया था। इस उपलब्धि के लिए उन्हें साल 2008 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इसी तरह का कारनामा हैदराबाद के एक किसान ने भी किया है। कृष्णा जिले के वदलामानु गांव के 24 वर्षीय किसान कुप्पाला राम गोपाला कृष्णा ने एक ही पेड़ में 18 किस्म के आम की पैदावार की है।उत्तर प्रदेश के आम उत्पादक कलीमुल्ला इससे पहले 'नमो आम' के अलावा बालीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्य राय और क्रिकेट के बादशाह कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के नाम पर आम की प्रजातियों का नाम रख चुके हैं। साल 1957 से आम का उत्पादन कर रहे कलीमउल्लाह का बाग मलिहाबाद में पांच एकड़ में फैला है, जहां वह आम की नई प्रजातियां विकसित करते हैं।  प्रदेश सरकार से उद्यान पंडित का खिताब मिल चुका है और केंद्र सरकार साल 2008 में पद्मश्री से सम्मानित कर चुकी है। बताया जाता है कि 80 के दशक में सऊदी अरब के एक शेख ने उन्हें वजन के बराबर सोना देने के बदले में सऊदी में रहकर आम के बागान लगाने की पेशकश दी थी। मगर, कलीमुल्लाह ने अपनी मिट्टी की मोहब्बत में उसे ठुकरा दिया था।  उन्होंने पिछले साल 2018 में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पर आम की एक प्रजाति का नाम 'योगी' आम रखा था। उन्होंने बताया कि 'योगी आम' देखने में बहुत ही खूबसूरत और छोटा है और पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से उगाया गया है। उनके आम की कुछ खास किस्मों के नाम- हुस्न आरा, शरबती, पुखराज, वलहजह पसंद, खासुल खास, मक्खन, श्याम सुन्दर, प्रिंस, और हिमसागर हैं।

कृष्णा की उपलब्धि न केवल स्थानीय किसानों को आकर्षित किया, बल्कि उसने सरकारी अधिकारियों का भी ध्यान खींचा है। इस खबर से प्रभावित होकर कृष्णा जिले के कलेक्टर बी लक्ष्मीकांतम ने कृष्णा के आम के खेत का दौरा किया। इसके साथ ही उन्होंने युवा किसान को अपने प्रयोग के लिए सुविधाएं भी मुहैया कराईं।

राज्य बागवानी अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि एक पेड़ पर 18 किस्मों के आम की फसल बड़ी उपलब्धि है। सामान्यतौर पर दो से तीन तरह के आम ही एक पेड़ पर उगते हैं। साल 2015 के अंत में कृष्णा के आम के खेत में अच्छी उपज नहीं हो रही थी। लोगों ने उसे सलाह दी कि सभी आम के पेड़ों को उसे काट देना चाहिए। मगर, उसके दिमाग में कुछ और योजना चल रही थी।

कृष्णा ने ग्राफ्टिंग की टेक्निक के बारे में पढ़ा। यह एक बागवानी तकनीक है, जिसमें विभिन्न पौधों के ऊतकों को ऐसे जोड़ा जाता है कि वे साथ में बढ़ें। इस तकनीक ने उसे इतना प्रेरित किया कि उसने अपने खेत में आमों के एक ही पेड़ में विभिन्न किस्मों के आम को लगाने का फैसला किया। कृष्णा कहते हैं कि जब यह बात मैंने अपने दोस्तों को बताई, तो वे मुझ पर हंस रहे थे।

मगर, आज मेरी फसल को देखने के लिए दूसरे गांवों से भी किसान आ रहे हैं। मुझे इस बात की खुशी है। आंध्र प्रदेश के मैंगो मैन के नाम से मशहूर हो चुके कृष्णा ने कहा कि अब मुझे आस-पास के गांवों के किसान इस तकनीक के बारे में सीखने के लिए बुला रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के आम उत्पादक कलीमुल्ला इससे पहले ‘नमो आम’ के अलावा बालीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्य राय और क्रिकेट के बादशाह कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के नाम पर आम की प्रजातियों का नाम रख चुके हैं। साल 1957 से आम का उत्पादन कर रहे कलीमउल्लाह का बाग मलिहाबाद में पांच एकड़ में फैला है, जहां वह आम की नई प्रजातियां विकसित करते हैं।

प्रदेश सरकार से उद्यान पंडित का खिताब मिल चुका है और केंद्र सरकार साल 2008 में पद्मश्री से सम्मानित कर चुकी है। बताया जाता है कि 80 के दशक में सऊदी अरब के एक शेख ने उन्हें वजन के बराबर सोना देने के बदले में सऊदी में रहकर आम के बागान लगाने की पेशकश दी थी। मगर, कलीमुल्लाह ने अपनी मिट्टी की मोहब्बत में उसे ठुकरा दिया था।

उन्होंने पिछले साल 2018 में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पर आम की एक प्रजाति का नाम ‘योगी’ आम रखा था। उन्होंने बताया कि ‘योगी आम’ देखने में बहुत ही खूबसूरत और छोटा है और पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से उगाया गया है। उनके आम की कुछ खास किस्मों के नाम- हुस्न आरा, शरबती, पुखराज, वलहजह पसंद, खासुल खास, मक्खन, श्याम सुन्दर, प्रिंस, और हिमसागर हैं। 

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