इंडिया के सबसे खूबसूरत महलों में से एक है ताज फलकनुमा पैलेस, जानें इसकी खासियत

कभी हैदराबाद के निज़ाम की शानौ-शौकत का दीदार करना हो तो ताज फलकनुमा पैलेस आएं। जो  चारमीनार से सिर्फ 5 किमी की दूरी पर है। फलकनुमा का हिंदी में मतलब है ‘आसमान की तरह’ और उर्दू में ‘स्टार ऑफ हेवन’। इस महल को नवाब वकार उल उमर ने बनवाया था जो हैदराबाद के प्रधानमंत्री थे। और इसे बनने में पूरे 9 साल का वक्त लगा था। अपनी खूबसूरती और बनावट की वजह से ये महल यहां आने वाले टूरिस्टों की लिस्ट में टॉप पर रहता है। कभी हैदराबाद के निज़ाम की शानौ-शौकत का दीदार करना हो तो ताज फलकनुमा पैलेस आएं। जो  चारमीनार से सिर्फ 5 किमी की दूरी पर है। फलकनुमा का हिंदी में मतलब है 'आसमान की तरह' और उर्दू में 'स्टार ऑफ हेवन'। इस महल को नवाब वकार उल उमर ने बनवाया था जो हैदराबाद के प्रधानमंत्री थे। और इसे बनने में पूरे 9 साल का वक्त लगा था। अपनी खूबसूरती और बनावट की वजह से ये महल यहां आने वाले टूरिस्टों की लिस्ट में टॉप पर रहता है।    फलकनुमा पैलेस का इतिहास  महल की रचना सर बाइकर द्वारा की गई थी जो एक अंग्रेजी शिल्पकार थे। बनने के कुछ समय बाद तक उन्होंने महल को अपने निवास स्थान के तौर पर इस्तेमाल किया था। बाद में सन् 1897-98 में इसे हैदराबाद के निज़ाम को सौंप दिया गया। जिसके पीछे वजह बताई जाती है कि इसे बनाने में बहुत ज्यादा लगात आई थी इसका अहसास सर बाइकर को बाद में हुआ। तो उनकी पत्नी लेडी उमरा ने ये महल निज़ाम को उपहार में देने की योजना बनाई जिससे महल को बनाने में जितने भी पैसे खर्च हुए थे वो निज़ाम से वापस मिल गए।   त्रिपुरा के हर एक रंग की झलक देखने को मिलती है 'उज्जयंता पैलेस' में यह भी पढ़ें   महल की बनावट    ट्रैवल न्यूज : पैलेस क्वीन हमसफर एक्सप्रेस की हुई शुरूआत, जानें किस रूट पर चलेगी ट्रेन यह भी पढ़ें साल 2000 तक ये महल निज़ाम फैमिली की संपत्ति का हिस्सा था जिसे बाद में ताज होटल को सौंप दिया गया। अब इसकी देखरेख का पूरा जिम्मा इनका है। फाइव स्टार लक्जरी होटल में तब्दील हो चुका ये महल 32 एकड़ में फैला हुआ है। राजा-महाराजाओं के समय में यहां जनता दरबार लगता था। साथ ही ये महल उस समय में होने वाले शानदार जश्नों का भी गवाह है। महल में कुल 22 हॉल और 60 कमरे हैं। यहां के डाइनिंग हॉल दुनिया का सबसे बड़ा डाइनिंग हॉल है जिसमें एक साथ 101 लोग बैठकर खाना खा सकते हैं। महल के अंदर की कारीगरी इतनी शानदार है जिसका अंदाजा आपको यहां आने के बाद ही लगेगा। महल की दीवारों को ब्रोकेड से सजाया गया है तो वहीं इसमें इस्तेमाल किए गए मार्बल्स इटालियन हैं।  महल में एक बहुत बड़ी टेबल है जिसके बारे में कहा जाता है कि ऐसी अभी तक सिर्फ दो टेबल ही बनाई गई है एक जो इस महल में है और दूसरी बर्किंघम पैलेस में। महल के कई भागों में बदलाव के बाद साल 2010 में इसे आम नागरिकों के लिए खोल दिया गया था।   ट्रैवल करने से आप में होते हैं ये बदलाव, निखरता है व्यक्तित्व यह भी पढ़ें   कब जाएं- यहां साल में कभी भी जाने का प्लान कर सकते हैं। लेकिन एक खास बात का ध्यान रखें कि यहां घूमने के लिए आपको तेलंगाना टूरिज्म से इज़ाजत लेनी पड़ती है। सिर्फ शनिवार और रविवार को ही यहां घूम सकते हैं। घूमने का समय शाम 4 बजे से 5.30 बजे तक ही होता है। बड़ों के लिए अलग और बच्चों के लिए अलग एंट्री फीस है। जिसके बारे में आप ऑनलाइन पता कर सकते हैं।

फलकनुमा पैलेस का इतिहास

महल की रचना सर बाइकर द्वारा की गई थी जो एक अंग्रेजी शिल्पकार थे। बनने के कुछ समय बाद तक उन्होंने महल को अपने निवास स्थान के तौर पर इस्तेमाल किया था। बाद में सन् 1897-98 में इसे हैदराबाद के निज़ाम को सौंप दिया गया। जिसके पीछे वजह बताई जाती है कि इसे बनाने में बहुत ज्यादा लगात आई थी इसका अहसास सर बाइकर को बाद में हुआ। तो उनकी पत्नी लेडी उमरा ने ये महल निज़ाम को उपहार में देने की योजना बनाई जिससे महल को बनाने में जितने भी पैसे खर्च हुए थे वो निज़ाम से वापस मिल गए।

महल की बनावट 

साल 2000 तक ये महल निज़ाम फैमिली की संपत्ति का हिस्सा था जिसे बाद में ताज होटल को सौंप दिया गया। अब इसकी देखरेख का पूरा जिम्मा इनका है। फाइव स्टार लक्जरी होटल में तब्दील हो चुका ये महल 32 एकड़ में फैला हुआ है। राजा-महाराजाओं के समय में यहां जनता दरबार लगता था। साथ ही ये महल उस समय में होने वाले शानदार जश्नों का भी गवाह है। महल में कुल 22 हॉल और 60 कमरे हैं। यहां के डाइनिंग हॉल दुनिया का सबसे बड़ा डाइनिंग हॉल है जिसमें एक साथ 101 लोग बैठकर खाना खा सकते हैं। महल के अंदर की कारीगरी इतनी शानदार है जिसका अंदाजा आपको यहां आने के बाद ही लगेगा। महल की दीवारों को ब्रोकेड से सजाया गया है तो वहीं इसमें इस्तेमाल किए गए मार्बल्स इटालियन हैं।

महल में एक बहुत बड़ी टेबल है जिसके बारे में कहा जाता है कि ऐसी अभी तक सिर्फ दो टेबल ही बनाई गई है एक जो इस महल में है और दूसरी बर्किंघम पैलेस में। महल के कई भागों में बदलाव के बाद साल 2010 में इसे आम नागरिकों के लिए खोल दिया गया था।

कब जाएं- यहां साल में कभी भी जाने का प्लान कर सकते हैं। लेकिन एक खास बात का ध्यान रखें कि यहां घूमने के लिए आपको तेलंगाना टूरिज्म से इज़ाजत लेनी पड़ती है। सिर्फ शनिवार और रविवार को ही यहां घूम सकते हैं। घूमने का समय शाम 4 बजे से 5.30 बजे तक ही होता है। बड़ों के लिए अलग और बच्चों के लिए अलग एंट्री फीस है। जिसके बारे में आप ऑनलाइन पता कर सकते हैं। 

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