इसलिए भगवान शिव को पसंद हैं बिल्वपत्र

सावन का महीना जल्द ही शुरू होने वाला है और इस महीने को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना बताया गया हैं, जिसमें उनकी ख़ास तरीके से पूजा की जाती है. आपने अक्सर देखा होगा कि ज्यादातर भगवान शिव के मंदिर में बिल्वपत्र ही चढ़ाये जाते हैं. लेकिन कभी अपने ये जानने की कोशिश की आखिर ऐसा क्यों होता है.सावन का महीना जल्द ही शुरू होने वाला है और इस महीने को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना बताया गया हैं, जिसमें उनकी ख़ास तरीके से पूजा की जाती है. आपने अक्सर देखा होगा कि ज्यादातर भगवान शिव के मंदिर में बिल्वपत्र ही चढ़ाये जाते हैं. लेकिन कभी अपने ये जानने की कोशिश की आखिर ऐसा क्यों होता है.    अगर नहीं तो आज हम आपको बताएंगे कि भगवान शिव को बिल्वपत्र चढाने का रहस्य क्या है. शिव पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव से पार्वती ने पूछा कि स्वामी आपको बिल्व पत्र इतने प्रिय क्यों है?. इस दौरान शिव जी ने पार्वती को बड़े ही सहज अंदाज़ में कहा कि बिल्व के पत्ते उनकी जटा के समान हैं, उसका त्रिपत्र यानी 3 पत्ते ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद हैं.    इसके अलावा शिव ने बताया कि स्वयं महालक्ष्मी ने शैल पर्वत पर बिल्ववृक्ष रूप में जन्म लिया था. कहा जाता है कि अगर कोई भक्त भगवान शिव के पास बिल्वपत्र चढ़ाता है उसे भगवान शिव सभी पापों से मुक्त करके अपने लोक में स्थान देते हैं, यही नहीं बल्कि उस व्यक्ति को स्वयं लक्ष्मीजी भी नमस्कार करती हैं.    वर्षो से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार भगवान शिव की पूजा बिना बिल्वपत्र के पूरी नहीं मानी गई हैं. इसके अलावा भगवान शिव का दूध, दही, आंक के फूलों से अभिषेक किया जाता हैं. इस साल श्रावण महीने की शुरुआत 27 जुलाई से हो रही है और पहला सोमवार 30 जुलाई से शुरू होगा.

अगर नहीं तो आज हम आपको बताएंगे कि भगवान शिव को बिल्वपत्र चढाने का रहस्य क्या है. शिव पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव से पार्वती ने पूछा कि स्वामी आपको बिल्व पत्र इतने प्रिय क्यों है?. इस दौरान शिव जी ने पार्वती को बड़े ही सहज अंदाज़ में कहा कि बिल्व के पत्ते उनकी जटा के समान हैं, उसका त्रिपत्र यानी 3 पत्ते ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद हैं.

इसके अलावा शिव ने बताया कि स्वयं महालक्ष्मी ने शैल पर्वत पर बिल्ववृक्ष रूप में जन्म लिया था. कहा जाता है कि अगर कोई भक्त भगवान शिव के पास बिल्वपत्र चढ़ाता है उसे भगवान शिव सभी पापों से मुक्त करके अपने लोक में स्थान देते हैं, यही नहीं बल्कि उस व्यक्ति को स्वयं लक्ष्मीजी भी नमस्कार करती हैं.

वर्षो से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार भगवान शिव की पूजा बिना बिल्वपत्र के पूरी नहीं मानी गई हैं. इसके अलावा भगवान शिव का दूध, दही, आंक के फूलों से अभिषेक किया जाता हैं. इस साल श्रावण महीने की शुरुआत 27 जुलाई से हो रही है और पहला सोमवार 30 जुलाई से शुरू होगा.

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