ई-कॉमर्स की बढ़ती धमक के बीच कुछ इस तरह बदल रहे शॉपिंग मॉल…

ई-कॉमर्स से आधुनिक व्यापार प्रतिष्ठानों समेत पारंपरिक खुदरा कारोबार को हो रहे नुकसान के बीच शॉपिंग मॉल खुद को पुनर्व्यवस्थित कर रहे हैं और उपभोक्ताओं को खरीदारी के साथ मनोरंजन (शॉप-एंटरटेनमेंट) की सुविधा दे रहे हैं. उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने ये बातें कही. नाइट फ्रैंक के अनुसार, चूंकि युवा वर्ग खरीदारी की जरूरतों के लिए ऑनलाइन माध्यमों को तरजीह दे रहा है, ऐसे में यदि मॉल को बचे रहना है तो उसे फैंसी स्टोरों का समूह बने रहने से इतर जाकर बदलती इच्छाओं के मुताबिक खुद को ढालने की जरूरत है.

उद्योग जगत के विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य एवं पेय, मनोरंजन, संगीत, सिनेमा एवं अन्य गतिविधियां अब मॉल में अधिक जगह घेर रही हैं. इनका योगदान अभी के 8-9 प्रतिशत से बढ़कर करीब 30 प्रतिशत तक हो जाने का अनुमान है.

इनफिनिटी मॉल्स के मुख्य कार्यकारी मुकेश कुमार ने कहा, ‘‘पिछले कुछ सालों में यह पता चला है कि कोई उपभोक्ता संभव है खरीदारी नहीं करना चाहता हो, लेकिन यदि मॉल उन्हें विभिन्न प्रचार कार्यक्रमों तथा गतिविधियों से जोड़े और खाद्य समारोह तथा कंसर्ट आदि के आयोजन के लिए अधिक जगह रखे तो वे अधिक लोगों को आकर्षित कर सकेंगे जो अंतत: खरीदारी में बदल सकती है.’’

उन्होंने कहा कि कंपनी खाद्य एवं पेय, पॉप-अप स्टोर तथा मनोरंजन के लिए मॉल की करीब 50 प्रतिशत जगह आवंटित करने की योजना बना रही है. डीएलएफ शॉपिंग मॉल्स की प्रमुख पुष्पा बेक्टर ने कहा कि बुनियादी संरचना के साथ ऐसे स्मार्ट मॉल बनाने की जरूरत है जिनमें प्रौद्योगिकी पर जोर हो और वह ऊर्जा दक्षता के साथ उपभोक्ता यंत्र के जरिये संवाद कर सके.

उन्होंने कहा, ‘‘अच्छी किस्म के माल की मांग है. इसलिये यदि हमें वर्तमान प्रतिस्पर्धी बाजार में बने रहना है तो समावेशी स्मार्ट माल बनाना जरूरी हो गया है.’

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