कासगंज में मुश्किल हालात, दहशत की नींद, तिरपाल में बसेरा

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की आंखों में नींद है, लेकिन पलक बंद नहीं हो रहीं। दहशत से धड़कन बढ़ी हुई है और आशियाने दरक रहे है। ऐसे में लोगों ने फिर तिरपाल में ही अपना बसेरा बना लिया है।

कासगंज में गंगा नदी पार पटियाली क्षेत्र की चार ग्राम सभाओं के लगभग तीस गांव बाढ़ की चपेट में हैं। संपर्क मार्ग टूट जाने के कारण अधिकांश गांवों का आवागमन ठप है। पालतू पशु दलदल में बंधें हैं। पशुओं में संक्रामक रोग भी फैल रहे हैं। उनके सामने हरे चारे की किल्लत है। फसलों में बाढ़ का पानी भर जाने से बर्बादी चरम पर है। घर-घर मरीजों की चारपाइयां बिछी हैं। नगला डंबर, पनसोती, नगला बखूती में खुजली रोग से बाढ़ पीड़ित परेशान हैं। अंधेरे में बाढ़ पीड़ित: बाढ़ क्षेत्र में आवंटित केरोसिन उचित दर विक्रेताओं द्वारा न बांटे जाने से वा¨शदे अंधेरे में जीवन यापन कर रहे हैं। ग्राम सभा हिम्मत नगर बझेरा के प्रधान भूदेव का कहना है राशन डीलर रामबाबू ने आवंटित मिट्टी का तेल नहीं बांटा है, जिससे घरों में अंधेरा रहता है। क्षेत्र में बिजली की सुविधा ही नहीं है। पानी का डिस्चार्ज: हरिद्वार बैराज से 1.05, बिजनौर से 1.47 और नरौरा से 2 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। कछला पुल पर गंगा का स्तर 163.75 मीटर तक पहुंच गया है। कर रहे है निरीक्षण: बाढ़ प्रभावित ग्रामों में निरीक्षण किया जा रहा है। ग्रामीणों को बाढ़ से बचाव के तरीके बताए जा रहे है। पानी बढ़ रहा है।

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