कॉमरेड्स पर फंदा कसने के लिए पर्याप्त हैं उन्हीं की लिखी चिट्ठियां!

भीमा-कोरेगांव साजिश मामले में पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार माओवादी विचारकों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से कुछ समय के लिए भले राहत मिल गई हो, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस के हाथ लगे उनके पत्र ही भविष्य में उन पर फंदा कसने के लिए पर्याप्त हैं। इन पत्रों से वाकई ऐसी साजिश का पर्दाफाश होता है, जिन्हें देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।भीमा-कोरेगांव साजिश मामले में पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार माओवादी विचारकों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से कुछ समय के लिए भले राहत मिल गई हो, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस के हाथ लगे उनके पत्र ही भविष्य में उन पर फंदा कसने के लिए पर्याप्त हैं। इन पत्रों से वाकई ऐसी साजिश का पर्दाफाश होता है, जिन्हें देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।   पुणे पुलिस को ये पत्र गिरफ्तार ‘कॉमरेडों’ के पास से बरामद उनके लैपटॉप, हार्ड डिस्क एवं पेन ड्राइव इत्यादि को डी-कोड करने से प्राप्त हुए हैं। ऐसे ही एक पत्र में फरीदाबाद से गिरफ्तार की गईं सुधा भारद्वाज सेंट्रल कमेटी के कॉमरेड भारद्वाज को लिखती हैं – “बहुत पैसा खर्च हो रहा है। आपके बताए अनुसार जेएनयू एवं टिस्स के छात्रों को अंदरूनी हिस्सों में भेजने के लिए हमें आर्थिक सहायता की तुरंत आवश्यकता है”  सुधा आगे लिखती हैं – “प्रशांत की गिरफ्तारी के बाद मुझे पैसा मिलना बंद हो गया है। नागपुर की मीटिंग में सुरेंद्र रेड्डी ने पैसा देने से इंकार कर दिया। कॉमरेड प्रशांत द्वारा पीपीएस के काम के लिए नियुक्त किए गए कॉमरेड स्टेन स्वामी से भी मैंने बात की। लेकिन उन्होंने भी पैसा देने का कोई निश्चित वायदा नहीं किया”।

पुणे पुलिस को ये पत्र गिरफ्तार ‘कॉमरेडों’ के पास से बरामद उनके लैपटॉप, हार्ड डिस्क एवं पेन ड्राइव इत्यादि को डी-कोड करने से प्राप्त हुए हैं। ऐसे ही एक पत्र में फरीदाबाद से गिरफ्तार की गईं सुधा भारद्वाज सेंट्रल कमेटी के कॉमरेड भारद्वाज को लिखती हैं – “बहुत पैसा खर्च हो रहा है। आपके बताए अनुसार जेएनयू एवं टिस्स के छात्रों को अंदरूनी हिस्सों में भेजने के लिए हमें आर्थिक सहायता की तुरंत आवश्यकता है”

सुधा आगे लिखती हैं – “प्रशांत की गिरफ्तारी के बाद मुझे पैसा मिलना बंद हो गया है। नागपुर की मीटिंग में सुरेंद्र रेड्डी ने पैसा देने से इंकार कर दिया। कॉमरेड प्रशांत द्वारा पीपीएस के काम के लिए नियुक्त किए गए कॉमरेड स्टेन स्वामी से भी मैंने बात की। लेकिन उन्होंने भी पैसा देने का कोई निश्चित वायदा नहीं किया”।

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