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कोटकपूरा फायरिंग केस मामले में एसआइटी की जांच को हाई कोर्ट द्वारा रद किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी पंजाब सरकार

बेअदबी मामले से जुड़े कोटकपूरा गोलीकांड की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) और उसकी जांच को रद करने के खिलाफ पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। नौ अप्रैल को आए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने में अब मात्र सात दिन ही बचे हैं। सुप्रीम कोर्ट में केस दायर करने के लिए मुख्यमंत्री ने फाइल क्लियर कर दी है।

उन्होंने कहा कि एडवोकेट जनरल (एजी) ही स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) तैयार करेंगे और वही केस लड़ने के लिए वकीलों की टीम बनाएंगे। इस केस से संबंधित जो भी जरूरतें हैं उसे पूरा भी वही करेंगे। तीन महीने पहले जब हाई कोर्ट ने कोटकपूरा गोलीकांड की जांच कर रही एसआइटी को रद कर दिया था, तभी मुख्यमंत्री ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला कर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी, लेकिन तब से यह फाइल एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) अनुराग अग्रवाल व एडवोकेट जनरल के दफ्तर के बीच फंसी रही। दोनों अधिकारियों के बीच सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी फाइल करने को लेकर काफी विवाद चलता रहा था।

 

विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि अनुराग अग्रवाल चाहते थे कि जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की जाए, जबकि एजी दफ्तर ऐसा नहीं चाहता था। उनकी दलील थी कि इस मामले में हाई कोर्ट ने डीजीपी को तीन विकल्प देकर उनकी राय पूछी थी, जिसमें उन्होंने एक विकल्प स्वीकार कर लिया। अब ऐसे में यह एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में कैसे स्टैंड करेगी।

हाई कोर्ट ने दिए थे तीन विकल्प

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए एसआइटी की जांच को राजनीति से प्रेरित बताते हुए तीन विकल्प दिए कि या तो इस केस की जांच दोबारा सीबीआइ के हवाले किया जाए। दूसरा विकल्प था कि इस केस की जांच हरियाणा पुलिस से करवाई जाए और तीसरा विकल्प था कि राज्य सरकार नई एसआइटी बना दे, जिसमें पहले वाली एसआइटी के वरिष्ठ सदस्य कुंवर विजय प्रताप सिंह न हों। पंजाब सरकार ने तीसरे विकल्प को चुन लिया। हाई कोर्ट ने एसआइटी को रद करके नई एसआइटी का गठन करने के आदेश दे दिए, लेकिन पंजाब सरकार का मानना था कि हाई कोर्ट का यह फैसला सही नहीं है। उन्होंने कई अहम नुक्ते अपने दायरे से बाहर जाकर उठाए हैं, इसलिए सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।

कैप्टन को करना पड़ा हस्तक्षेप

इस मामले को लेकर एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) अनुराग अग्रवाल व एडवोकेट जनरल (एजी) अतुल नंदा के बीच फाइल को लेकर तीखी बहस हो गई थी। आखिर मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए वीरवार शाम फाइल को क्लियर कर दिया। एजी अतुल नंदा ने बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री के आदेश मिल गए हैं। एसएलपी तैयार करने में तीन-चार दिन लग सकते हैं। हम जल्द ही यह फाइल कर देंगे।

 

क्या है कोटकपूरा गोलीकांड

फरीदकोट जिले के बरगाड़ी में श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ कोटकपूरा में धरना दे रहे लोगों पर 14 अक्टूबर, 2015 को पुलिस ने फायरिंग कर दी थी। इसमें 25 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे।

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