क्या आप फोन एडिक्शन से जूझ रहे हैं? ऐसे करें इसे दूर

मोबाइल फोन का जब आविष्कार हुआ, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन यह बहुत बड़ी संख्या में लोगों के लिए एक लत का रूप भी ले सकता है। ‘फोन एडिक्शन’ आज के दौर के बहुत बड़े रोग के रूप में उभरा है।मोबाइल फोन का जब आविष्कार हुआ, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन यह बहुत बड़ी संख्या में लोगों के लिए एक लत का रूप भी ले सकता है। 'फोन एडिक्शन' आज के दौर के बहुत बड़े रोग के रूप में उभरा है।  हालांकि इस एडिक्शन की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी जा सकती मगर इतना तो तय है कि यदि आप बार-बार, गैरजरूरी कार्यों के लिए अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से खुद को रोक नहीं पाते... इसके विपरीत परिणामों को जानते हुए भी, तो आप एडिक्ट हो चुके हैं। इस एडिक्शन का इलाज यह नहीं है कि फोन का इस्तेमाल ही बंद कर दिया जाए। सही उपचार तो यह है कि फोन का इस्तेमाल संतुलित तरीके से किया जाए।  फोन एडिक्शन के लक्षण  कई बातें इस ओर इशारा कर देती हैं कि आप फोन एडिक्शन के शिकार हैं। इनमें प्रमुख हैं...  - एक ही काम के लिए अधिक देर के लिए और अधिक बार फोन को इस्तेमाल करना।  - फोन का इस्तेमाल कम करने की कोशिशें नाकाम होना।  - अवसाद और व्यग्रता का मुकाबला करने के लिए फोन की शरण में जाना।  - फोन का इस्तेमालकरते हुए समय का होश न रहना।  - फोन उपयोग की अति के कारण रिश्तों व नौकरी का खतरे में पड़ जाना।  - नए से नए फोन, अधिक से अधिक एप, ज्यादा से ज्यादा स्टोरेज स्पेस की चाह रखना।  - थोड़ी देर के लिए भी यदि किसी कारण फोन पास न हो, तो बर्दाश्त न होना।  स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव  फोन एडिक्शन एक लत मात्र नहीं है। आपके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ये इस प्रकार हैं...  - आंखों में तनाव व दर्द महसूस होना। धुंधला दिखना। सिरदर्द।  - गर्दन व बांहों में दर्द रहना।  - नींद की कमी से जूझना। फोन की लत के कारण आप देर रात तक इसका इस्तेमाल करते रहते हैं, जिस कारण सो नहीं पाते।  - फोन के संपर्क में बहुत अधिक समय तक रहने के कारण, इसकी सतह पर मौजूद रोगाणुओं का शिकार होने की अधिक संभावना होती है।  - डिप्रेशन, व्यग्रता, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर आदि जैसे मनोरोग।  कैसे निपटें इस लत से?  अगर आपको फोन की लत लग ही चुकी है, तो आप अपने स्तर पर इस पर नियंत्रण पाने के लिए कुछ कदम उठा सकते हैं।  - नोटिफिकेशंस को डिसेबल कर दें। बार-बार नोटिफिकेशंस नहीं आएंगे, तो आप बार-बार फोन नहीं उठाएंगे।  - जिन एप्स की कोई ठोस उपयोगिता नहीं है, फिर भी आप उन पर काफी समय गुजार देते हैं, उन्हें अनइंस्टॉल कर दें।  - अपने फोन टाइम को ट्रैक करें। कुछ ऐसे एप्स उपलब्ध हैं, जो आपको बताते हैं कि आपने फोन पर कितना समय बिताया और आपको इस पर  अधिक समय बिताने से हतोत्साहित करते हैं।  - फोन को हमेशा अपने पास रखने के बजाए दूसरे कमरे में रखें। यदि यह हमेशा आपकी पहुंच में रहेगा, तो आप इसका इस्तेमाल करने से  खुद को रोक नहीं पाएंगे।  - यदि आप फोन में अलार्म सेट करके इसे अपने पास रखकर सोते हैं, तो संभव है कि रात को देर तक फोन का इस्तेमाल करने से खुद को रोक  नहीं पाएंगे। इसलिए फोन को बिस्तर से दूर कहीं रखें और अलार्म के लिए अलार्म घड़ी का इस्तेमाल करें।  - खुद से पूरी दृढ़ता से कहें कि मैं अगले एक घंटे तक फोन की ओर नहीं देखने वाला/वाली। फिर इस पर अमल करने में जुट जाएं।  - यह जानने का प्रयास करें कि आखिर आपको फोन की लत क्यों लगी है। अधिकांश लोगों में इसके पीछे जीवन में रहगई कोई कमी होती है। किसी  कमी, किसी समस्या से बचाव का उपाय आप फोन में तलाशते हैं। उस कमी को पहचानें व उसे दूर करने की कोशिश करें।  - यह सोचें कि जो समय आप फोन पर बर्बाद कर रहे हैं, उसका उपयोग आप और किन कामों में कर सकते हैं। फिर इन कामों में अपने समय का सदुपयोग करने की कोशिश करें।  - यदि कोई उपाय काम करता नजर न आए, तो मनोचिकित्सक से मिलने में न हिचकिचाएं।

हालांकि इस एडिक्शन की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी जा सकती मगर इतना तो तय है कि यदि आप बार-बार, गैरजरूरी कार्यों के लिए अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से खुद को रोक नहीं पाते… इसके विपरीत परिणामों को जानते हुए भी, तो आप एडिक्ट हो चुके हैं। इस एडिक्शन का इलाज यह नहीं है कि फोन का इस्तेमाल ही बंद कर दिया जाए। सही उपचार तो यह है कि फोन का इस्तेमाल संतुलित तरीके से किया जाए।

फोन एडिक्शन के लक्षण

कई बातें इस ओर इशारा कर देती हैं कि आप फोन एडिक्शन के शिकार हैं। इनमें प्रमुख हैं…

– एक ही काम के लिए अधिक देर के लिए और अधिक बार फोन को इस्तेमाल करना।

– फोन का इस्तेमाल कम करने की कोशिशें नाकाम होना।

– अवसाद और व्यग्रता का मुकाबला करने के लिए फोन की शरण में जाना।

– फोन का इस्तेमालकरते हुए समय का होश न रहना।

– फोन उपयोग की अति के कारण रिश्तों व नौकरी का खतरे में पड़ जाना।

– नए से नए फोन, अधिक से अधिक एप, ज्यादा से ज्यादा स्टोरेज स्पेस की चाह रखना।

– थोड़ी देर के लिए भी यदि किसी कारण फोन पास न हो, तो बर्दाश्त न होना।

स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव

फोन एडिक्शन एक लत मात्र नहीं है। आपके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ये इस प्रकार हैं…

– आंखों में तनाव व दर्द महसूस होना। धुंधला दिखना। सिरदर्द।

– गर्दन व बांहों में दर्द रहना।

– नींद की कमी से जूझना। फोन की लत के कारण आप देर रात तक इसका इस्तेमाल करते रहते हैं, जिस कारण सो नहीं पाते।

– फोन के संपर्क में बहुत अधिक समय तक रहने के कारण, इसकी सतह पर मौजूद रोगाणुओं का शिकार होने की अधिक संभावना होती है।

– डिप्रेशन, व्यग्रता, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर आदि जैसे मनोरोग।

कैसे निपटें इस लत से?

अगर आपको फोन की लत लग ही चुकी है, तो आप अपने स्तर पर इस पर नियंत्रण पाने के लिए कुछ कदम उठा सकते हैं।

– नोटिफिकेशंस को डिसेबल कर दें। बार-बार नोटिफिकेशंस नहीं आएंगे, तो आप बार-बार फोन नहीं उठाएंगे।

– जिन एप्स की कोई ठोस उपयोगिता नहीं है, फिर भी आप उन पर काफी समय गुजार देते हैं, उन्हें अनइंस्टॉल कर दें।

– अपने फोन टाइम को ट्रैक करें। कुछ ऐसे एप्स उपलब्ध हैं, जो आपको बताते हैं कि आपने फोन पर कितना समय बिताया और आपको इस पर

अधिक समय बिताने से हतोत्साहित करते हैं।

– फोन को हमेशा अपने पास रखने के बजाए दूसरे कमरे में रखें। यदि यह हमेशा आपकी पहुंच में रहेगा, तो आप इसका इस्तेमाल करने से

खुद को रोक नहीं पाएंगे।

– यदि आप फोन में अलार्म सेट करके इसे अपने पास रखकर सोते हैं, तो संभव है कि रात को देर तक फोन का इस्तेमाल करने से खुद को रोक

नहीं पाएंगे। इसलिए फोन को बिस्तर से दूर कहीं रखें और अलार्म के लिए अलार्म घड़ी का इस्तेमाल करें।

– खुद से पूरी दृढ़ता से कहें कि मैं अगले एक घंटे तक फोन की ओर नहीं देखने वाला/वाली। फिर इस पर अमल करने में जुट जाएं।

– यह जानने का प्रयास करें कि आखिर आपको फोन की लत क्यों लगी है। अधिकांश लोगों में इसके पीछे जीवन में रहगई कोई कमी होती है। किसी

कमी, किसी समस्या से बचाव का उपाय आप फोन में तलाशते हैं। उस कमी को पहचानें व उसे दूर करने की कोशिश करें।

– यह सोचें कि जो समय आप फोन पर बर्बाद कर रहे हैं, उसका उपयोग आप और किन कामों में कर सकते हैं। फिर इन कामों में अपने समय का सदुपयोग करने की कोशिश करें।

– यदि कोई उपाय काम करता नजर न आए, तो मनोचिकित्सक से मिलने में न हिचकिचाएं। 

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