गणेश भगवान की इस रंग की मूर्ति हरेगी आपके कष्ट, जानिए कैसे…

समस्त देवी देवताओं में प्रथम पूज्य गणेश जी ही हैं. इनकी कृपा से हर विघ्न का नाश होता है और हर कार्य में सफलता मिलती है. शिक्षा से लेकर संतान तक सब कुछ इनकी कृपा से संभव है. यहां तक कि मात्र इनकी मूर्ति या चित्र के प्रयोग से घर के वास्तु दोष को नष्ट किया जा सकता है. गणेश जी की उपासना में इनकी अलग-अलग रंग की मूर्तियों का प्रयोग होता है. अलग अलग रंग के ये गणपति हर कामना पूरी करने में सक्षम हैं.गणेश भगवान की इस रंग की मूर्ति हरेगी आपके कष्ट, जानिए कैसे...

पीले रंग के गणपति

– यह छह भुजाधारी हैं, और इनको हरिद्रा गणपति कहा जाता है

– यह हल्दी के समान पीले होते हैं या हल्दी से बने हुए होते हैं

– इनको घर में मुख्य पूजा स्थल पर स्थापित करना चाहिए

– इनकी उपासना से हर तरह का मंगल होता है घर में सुख समृद्धि आती है

लाल रंग के गणपति

– लाल रंग के या रक्त वर्ण के कई सारे गणेश जी होते हैं

– परन्तु रक्तवर्ण के चार भुजाधारी गणेश जी ही मुख्य रूप से पूजित होते हैं

– इनको संकष्टहरण गणपति कहा जाता है

– इनकी स्थापना या तो अपने पूजा स्थान में करें या काम के स्थान पर

– इनको दूर्वा अर्पित करके प्रार्थना करने से हर संकट टल जाता है

सफेद रंग के गणपति

– इन गणेश जी को शुभ्र गणपति या द्विज गणपति कहा जाता है

– यह सफ़ेद रंग के चार भुजाधारी हैं

– इनकी उपासना से ज्ञान, विद्या और बुद्धि का वरदान मिलता है

– इनकी स्थापना छात्रों, विद्यार्थियों को अपने पढ़ने के स्थान पर करनी चाहिए

– पढाई और परीक्षा के पहले इनका स्मरण करने से सफलता निश्चित हो जाती है

नीले रंग के गणेश जी

– इन गणेश जी को “उच्छिष्ट गणपति” कहा जाता है, यह नीले रंग के चार भुजाधारी हैं 

– सामान्य दशाओं में इनकी पूजा नहीं की जाती

– इनकी पूजा तंत्र की विशेष पूजा है जिसमे शुद्धि अशुद्धि का विचार नहीं होता

– उच्च पद प्राप्ति, कामना सिद्धि और तंत्र मंत्र से बचाव के लिए इनकी उपासना विशेष होती है

– बिना किसी सदगुरु के निर्देशन के इनकी उपासना ना करें

ऋण मोचन गणपति

– इन गणेश जी का वर्ण पीला ही होता है

– परन्तु ये चार भुजाधारी होते हैं और लाल रंग का वस्त्र धारण करते हैं

– इनको अपने कार्य स्थल पर स्थापित करें

– नियमित रूप से इनके सामने घी का दीपक जलाएं

– कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें, लाभ होगा

महागणपति

– यह गणेश जी समस्त स्वरूपों को अपने अंदर समाहित किये रखते हैं

– यह त्रिनेत्रधारी , रक्तवर्ण के और दस भुजाधारी होते हैं

– सामान्य रूप से इनकी उपासना नहीं की जाती

– गणेश महोत्सव के अवसर पर या मंदिर में ही इनकी उपासना श्रेष्ठ होती है

– गणेश महोत्सव में इनका स्मरण और दर्शन पूजन करने से संतान का वरदान सरलता से मिल जाता है

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