घूमने के लिए मशहूर है यह खूबसूरत झील “सूरजकुंड”

हरियाणा में फरीदाबाद जिमे सूरजकुंड  स्थित है. वसेसे तो यह जगह अपने मेले के कारण आकर्षण का केंद्र है पर यहाँ की झील भी मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है.सूरजकुंड अपने हस्तशिल्प-मेला के लिये प्रसिद्ध है.मेला मैदान के ग्रामीण परिवेश की अद्भुत रेंज आगंतुकों को आकर्षित कर रही है.हरियाणा में फरीदाबाद जिमे सूरजकुंड  स्थित है. वसेसे तो यह जगह अपने मेले के कारण आकर्षण का केंद्र है पर यहाँ की झील भी मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है.सूरजकुंड अपने हस्तशिल्प-मेला के लिये प्रसिद्ध है.मेला मैदान के ग्रामीण परिवेश की अद्भुत रेंज आगंतुकों को आकर्षित कर रही है.    दिल्ली से महज 20 किलोमीटर दूर हरियाणा राज्य में स्थित सूरजकुंड झील दूनियाभर में मशहूर है जो बेहद खूबसूरत और शांत है. इस झील को 10वीं शताब्दी में राजा सूरजमल ने बनवाया था. आपको बता दें कि सूरजकुंड का नाम यहां 10वीं सदी में तोमर वंश के राजा सूरज पाल द्वारा बनवाए गए एक प्राचीन रंगभूमि सूर्यकुंड से लिया गया है.     सूरजकुंड में हर साल फरवरी के महीने मं सूरजकुंड मेले का आयोजन किया जाता है.यह मेला देश की कला एवं संस्कृति का सबूत है.इस मेले में देश के कोने-कोने से कलाकार, श‍िल्पकार आदि शामिल होते हैं और अपनी कला का जौहर दिखाते हैं.वीकेंड एंजॉय करने के लिए यह भी एक बेहतरीन जगह हो सकती है.  वर्ष 2013 में सूरजकुंड शिल्प मेले को अंतर्राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिए जाने से इसके इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ. वर्ष 2016 में 30वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का भव्य आयोजन किया गया इसके साथ ही मेला पखवाड़े के दौरान शाम के समय प्रस्तुत किए जाने वाले रोमांचक सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर देते हैं.

दिल्ली से महज 20 किलोमीटर दूर हरियाणा राज्य में स्थित सूरजकुंड झील दूनियाभर में मशहूर है जो बेहद खूबसूरत और शांत है. इस झील को 10वीं शताब्दी में राजा सूरजमल ने बनवाया था. आपको बता दें कि सूरजकुंड का नाम यहां 10वीं सदी में तोमर वंश के राजा सूरज पाल द्वारा बनवाए गए एक प्राचीन रंगभूमि सूर्यकुंड से लिया गया है. 

सूरजकुंड में हर साल फरवरी के महीने मं सूरजकुंड मेले का आयोजन किया जाता है.यह मेला देश की कला एवं संस्कृति का सबूत है.इस मेले में देश के कोने-कोने से कलाकार, श‍िल्पकार आदि शामिल होते हैं और अपनी कला का जौहर दिखाते हैं.वीकेंड एंजॉय करने के लिए यह भी एक बेहतरीन जगह हो सकती है.

वर्ष 2013 में सूरजकुंड शिल्प मेले को अंतर्राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिए जाने से इसके इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ. वर्ष 2016 में 30वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का भव्य आयोजन किया गया इसके साथ ही मेला पखवाड़े के दौरान शाम के समय प्रस्तुत किए जाने वाले रोमांचक सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर देते हैं.

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