जानिए इस जन्माष्टमी से जुडी बेहद खाश बाते

हिन्दुओं के लिए कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार का बहुत महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के अष्टमी पर आधी रात को हुआ था। कृष्ण जन्म के दौरान 8 अंक का जो संयोग बना उसमें कई रहस्य छुपे हैं। भगवान श्रीकृष्ण का 8 अंक से विशेष संबंध है। आइए जानते है कि भगवान श्री कृष्ण इस विशेष अंक से क्या संबंध है।जन्माष्टमी 2017: जानिए 8 अंक का भगवान श्रीकृष्ण से क्या है विशेष संबंध

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भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को महानिशीथ काल में वृष लग्न में हुआ था। उस समय चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में भ्रमण कर रहे थे।भगवान श्री कृष्ण की जन्मकुंडली में राहु को छोड़कर सभी ग्रह अपनी स्वयं राशि अथवा उच्च अवस्था में स्थित थे।  

कृष्ण जन्म के दौरान आठ का जो संयोग बना उसमें कई रहस्य छुपे हैं। श्री कृष्ण का जन्म रात्रि के सात मुहूर्त निकलने के बाद आठवें मुहूर्त में हुआ। तब रोहिणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि थी जिसके संयोग से जयंती नामक योग बन रहा था।

भगवान कृष्ण के रूप में विष्णु जी ने इस धरती पर 8वें अवतार लिया था इसलिए 8 का अंक भगवान कृष्ण के लिए विशेष महत्व रखता है।

 कंस का वध करने के लिए भविष्यवाणी हुई थी कि उसका नाश देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान करेगी और अंत में भगवान कृष्ण ने अपने मामा कंस का सर्वनाश किया था। 

श्री कृष्ण जी की आठ पत्नियां थी, जिन्हें अष्यभार्या का नाम दिया गया था। इसके आलावा भगवान श्रीकृष्ण ने 16,100 रानियो से विवाह किया था और इन 16100 रानियों का योग 8 आता हैं। 
भगवत गीता जो भगवान कृष्ण के उपदेश हैं, उसके आठवें अध्याय का आठवां श्लोक “परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्‌। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे” को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।
 भगवान कृष्ण करीब 125 साल तक जिंदा रहे और इस अंक का योग भी 8 आता है।
अंकशास्त्र में 8 का अंक शनिदेव का अंक माना जाता है इसलिए शनिदेव और भगवान कृष्ण का विशेष संबंध है। 

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