जानिए कैसे विश्वकर्मा ने भगवान शिव के त्रिशूल से लेकर सोने की लंका का किया था निर्माण

17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के सबसे पहले इंजीनियर और वास्तुकार विश्वकर्मा जी थे जिसके चलते सभी तरह के पौराणिक संरचनाएं भगवान विश्वकर्मा ने किया था। विश्वकर्माजी के शिल्प में गजब की महारथ हासिल थी जिसके कारण इन्हें शिल्पकला का जनक भी माना जाता है। आइए जानते है भगवान विश्वकर्मा की कुछ रचनाएं।जानिए कैसे विश्वकर्मा ने भगवान शिव के त्रिशूल से लेकर सोने की लंका का किया था निर्माण

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इस समस्त ब्रह्मांड की रचना भी विश्वकर्मा जी के हाथों से हुई है। ऋग्वेद के 10वे अध्याय के 121वे सूक्त में लिखा है कि विश्वकर्मा जी के द्वारा ही धरती, आकाश और जल की रचना की गई है।। विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की। 

भगवान विश्वकर्मा नें देवताओं के तमान तरह के अस्त्र-शस्त्रों, गहने, विमान आदि की भी रचना की। त्रेता युग में विश्वकर्मा जी ने भगवान शंकर व माता पार्वती के लिए सोने की लंका का निर्माण किया था। ग्रह प्रवेश के लिए भगवान शिव ने रावण को पंडित की भूमिका निभाई। दक्षिणा रूप में रावण ने भोलेनाथ से दक्षिणा में सोने की लंका ही मांग ली।

सतयुग के समय विश्वकर्मा जी ने ही दशरथ जी के आग्रह पर कनक महल की रचना की थी ये महल बहूमूल्य हीरे, पन्ने, माणिक आदि से बना था।
 

द्वापर युग में विश्वकर्मा जी ने भगवान कृष्ण के लिए द्वारका नगरी का निर्माण किया था और पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगर बनाया।
 

रावण के पुष्पक विमान का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा नें ही बनाया था साथ ही सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल,यमराज का कालदण्ड का निर्माण इन्होनें ही बनाया था।
 

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