ट्रॉमा सेंटर में 29 घटे गुल रही बिजली

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में दो तलों पर घटों बिजली गुल रही। क्रिटिकल केयर यूनिटों में सेंट्रलाइज एसी बंद हो गए। इससे वार्डो में नमी बढ़ गई। ऐसे में वेंटीलेटर पर भर्ती बच्चों समेत सभी गंभीर मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया। केजीएमयू का ट्रॉमा सेंटर पाच मंजिला है। इसमें विभिन्न विभागों की इमरजेंसी सेवा चल रही हैं। चतुर्थ व पाचवी मंजिल की बिजली केबिल में फॉल्ट आ गया। गुरुवार सुबह साढ़े दस बजे बाधित हुई विद्युत आपूर्ति शुक्रवार दोपहर बाद साढ़े तीन बजे बहाल हुई। इस दौरान जनरेटर से विद्युत आपूर्ति की गई। मगर उससे सेंट्रलाइज एसी नहीं चल सके। लिहाजा, चतुर्थ तल स्थित नियोनेटिल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआइसीयू), पीडियाटिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की दीवारों से पानी फर्श पर फैलने लगा। कई बार फर्श पर सफाई करवाई गई। मगर किचकिच बनी रही। यूनिटों में भर्ती थे सौ अतिगंभीर मरीजकेजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में दो तलों पर घटों बिजली गुल रही। क्रिटिकल केयर यूनिटों में सेंट्रलाइज एसी बंद हो गए। इससे वार्डो में नमी बढ़ गई। ऐसे में वेंटीलेटर पर भर्ती बच्चों समेत सभी गंभीर मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया। केजीएमयू का ट्रॉमा सेंटर पाच मंजिला है। इसमें विभिन्न विभागों की इमरजेंसी सेवा चल रही हैं। चतुर्थ व पाचवी मंजिल की बिजली केबिल में फॉल्ट आ गया। गुरुवार सुबह साढ़े दस बजे बाधित हुई विद्युत आपूर्ति शुक्रवार दोपहर बाद साढ़े तीन बजे बहाल हुई। इस दौरान जनरेटर से विद्युत आपूर्ति की गई। मगर उससे सेंट्रलाइज एसी नहीं चल सके। लिहाजा, चतुर्थ तल स्थित नियोनेटिल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआइसीयू), पीडियाटिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की दीवारों से पानी फर्श पर फैलने लगा। कई बार फर्श पर सफाई करवाई गई। मगर किचकिच बनी रही। यूनिटों में भर्ती थे सौ अतिगंभीर मरीज    इलेक्ट्रिक बस संचालन का रास्ता साफ, दुबग्गा में सब स्टेशन को मंजूरी यह भी पढ़ें चतुर्थ तल पर एनआइसीयू व पीआइसीयू के अलावा पाचवें तल पर क्रिटिकल केयर मेडिसिन व रेस्परेटरी मेडिसिन के आइसीयू में भी एसी बंद रहे। ऐसा ही हाल पीडियाटिक इमरजेंसी वार्ड का रहा। इन सभी यूनिटों में सौ के करीब अतिगंभीर मरीज थे, जिसमें 60 बच्चे थे। इन सभी की जिंदगी दाव पर बनी रही। बैकअप पर वेंटीलेटर, टला बड़ा हादसा  गुरुवार को केबिल फॉल्ट होने से डेढ़ घटे तक क्रिटिकल केयर यूनिटों के वेंटीलेटर जनरेटर से कनेक्ट नहीं हो सके। सिर्फ वार्ड में रोशनी ही हो पाई। शुक्र रहा कि वेंटीलेटर में लगा बैकअप सिस्टम चार्ज था। इससे डॉक्टरों ने राहत की सास ली। लोकेटर मंगवाकर तलाशी फॉल्ट  केजीएमयू का इलेक्टिक विभाग गुरुवार रात भर केबिल की फॉल्ट नहीं तलाश सका। ऐसे में इंजीनियरों ने लेसा से संपर्क किया। यहा काम करने वाले ठेकेदारों से सोमवार को लोकेटर मंगवाकर फॉल्ट ठीक किया गया। शताब्दी के 12 विभागों की बिजली कटी   इलेक्ट्रिक बसों का सफर अगले हफ्ते से यह भी पढ़ें ट्रॉमा सेंटर की केबिल फॉल्ट सही करने के लिए शताबदी फेज-टू की बिजली ठप हो गई। ऐसे में ब्लड बैंक, रेडियोथेरेपी विभाग, ट्रासफ्यूजन मेडिसिन, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर वार्ड, अंकोसर्जरी विभाग, हिमेटोलॉजी, न्यूरो सर्जरी विभाग, इंडोक्राइन मेडिसिन विभाग, गैस्ट्रोमेडिसिन विभाग, इंडोक्राइन सर्जरी विभाग, ट्रॉमा सर्जरी विभाग समेत 12 विभागों के वार्ड एसी बंद रहे। मरीज व स्टाफ गर्मी से बेहाल रहे। खासकर कैंसर के ऑपरेशन व रेडियोथेरेपी कराने वाले मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पानी का भी रहा संकट  बिजली न आने से शताब्दी के वार्डो में पानी का संकट गहरा गया। नौ मंजिला बने भवन में ऊपरी तलों तक जनरेटर से पानी नहीं पहुंच पा रहा था। इससे वार्ड में भर्ती मरीज बेहाल रहे। केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शखवार ने बताया कि अगले दिन दुरुस्त हो सकी आपूर्तिट्रॉमा के दो तलों पर बिजली चली गई थी। इंजीनियर को तुंरत फॉल्ट सही करने के निर्देश दिए गए थे। हो सकता है जनरेटर के लोड न लेने से एसी न चल पाई हों। केजीएमयू के विद्युत एवं यात्रिक अभियंता अखिलेश कुमार ने बताया कि गुरुवार को केबिल में फॉल्ट आ गया था। शुक्त्रवार को उसे ढूंढकर दुरुस्त किया गया। इस दौरान जनरेटर चलाया गया। इससे भी क्त्रिटिकल केयर की एसी कनेक्ट हैं। एसी न चलने की जानकारी नहीं है।

चतुर्थ तल पर एनआइसीयू व पीआइसीयू के अलावा पाचवें तल पर क्रिटिकल केयर मेडिसिन व रेस्परेटरी मेडिसिन के आइसीयू में भी एसी बंद रहे। ऐसा ही हाल पीडियाटिक इमरजेंसी वार्ड का रहा। इन सभी यूनिटों में सौ के करीब अतिगंभीर मरीज थे, जिसमें 60 बच्चे थे। इन सभी की जिंदगी दाव पर बनी रही। बैकअप पर वेंटीलेटर, टला बड़ा हादसा

गुरुवार को केबिल फॉल्ट होने से डेढ़ घटे तक क्रिटिकल केयर यूनिटों के वेंटीलेटर जनरेटर से कनेक्ट नहीं हो सके। सिर्फ वार्ड में रोशनी ही हो पाई। शुक्र रहा कि वेंटीलेटर में लगा बैकअप सिस्टम चार्ज था। इससे डॉक्टरों ने राहत की सास ली। लोकेटर मंगवाकर तलाशी फॉल्ट

केजीएमयू का इलेक्टिक विभाग गुरुवार रात भर केबिल की फॉल्ट नहीं तलाश सका। ऐसे में इंजीनियरों ने लेसा से संपर्क किया। यहा काम करने वाले ठेकेदारों से सोमवार को लोकेटर मंगवाकर फॉल्ट ठीक किया गया। शताब्दी के 12 विभागों की बिजली कटी

ट्रॉमा सेंटर की केबिल फॉल्ट सही करने के लिए शताबदी फेज-टू की बिजली ठप हो गई। ऐसे में ब्लड बैंक, रेडियोथेरेपी विभाग, ट्रासफ्यूजन मेडिसिन, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर वार्ड, अंकोसर्जरी विभाग, हिमेटोलॉजी, न्यूरो सर्जरी विभाग, इंडोक्राइन मेडिसिन विभाग, गैस्ट्रोमेडिसिन विभाग, इंडोक्राइन सर्जरी विभाग, ट्रॉमा सर्जरी विभाग समेत 12 विभागों के वार्ड एसी बंद रहे। मरीज व स्टाफ गर्मी से बेहाल रहे। खासकर कैंसर के ऑपरेशन व रेडियोथेरेपी कराने वाले मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पानी का भी रहा संकट

बिजली न आने से शताब्दी के वार्डो में पानी का संकट गहरा गया। नौ मंजिला बने भवन में ऊपरी तलों तक जनरेटर से पानी नहीं पहुंच पा रहा था। इससे वार्ड में भर्ती मरीज बेहाल रहे। केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शखवार ने बताया कि अगले दिन दुरुस्त हो सकी आपूर्तिट्रॉमा के दो तलों पर बिजली चली गई थी। इंजीनियर को तुंरत फॉल्ट सही करने के निर्देश दिए गए थे। हो सकता है जनरेटर के लोड न लेने से एसी न चल पाई हों। केजीएमयू के विद्युत एवं यात्रिक अभियंता अखिलेश कुमार ने बताया कि गुरुवार को केबिल में फॉल्ट आ गया था। शुक्त्रवार को उसे ढूंढकर दुरुस्त किया गया। इस दौरान जनरेटर चलाया गया। इससे भी क्त्रिटिकल केयर की एसी कनेक्ट हैं। एसी न चलने की जानकारी नहीं है।

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