ड‍िमांड ड्राफ्ट पर होगा बनवाने वाले का भी नाम, RBI का नया नियम 15 सितंबर से होगा लागू

काले धन और मनी लॉन्ड्र‍िंग के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा फैसला लिया है. आरबीआई के मुताबिक 15 सितंबर से डिमांड ड्राफ्ट पर इसे बनवाने वाले का नाम भी शामिल होगा. अब तक सिर्फ जिसके खाते में पैसे जमा होते हैं, उसका नाम दिए जाने की व्यवस्था है.काले धन और मनी लॉन्ड्र‍िंग के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा फैसला लिया है. आरबीआई के मुताबिक 15 सितंबर से डिमांड ड्राफ्ट पर इसे बनवाने वाले का नाम भी शामिल होगा. अब तक सिर्फ जिसके खाते में पैसे जमा होते हैं, उसका नाम दिए जाने की व्यवस्था है.  भारतीय रिजर्व बैंक को उम्मीद है कि इससे बैंक‍िंग व्यवस्था में पारदर्श‍िता आएगी. इस संबंध में गुरुवार को अध‍िसूचना जारी की है. अध‍िसूचना के मुताबिक अब बैंक जब भी डिमांड ड्राफ्ट, पे ऑर्डर और बैंक चेक बनवाता है, तो उस पर बनवाले वाले शख्स का नाम भी दर्ज करना अनिवार्य होगा.   रिजर्व बैंक ने सभी कमर्श‍ियल बैंकों , कोऑपरेटिव बैंकों और जिला केंद्रीय कोऑपरेटिव बैंकों समेत पेमेंट्स बैंकों को भी इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं. इन बैंकों को साफ लहजे में कहा गया है क‍ि इन्हें 15 सितंबर से इस नये नियम को लागू करना होगा.  आरबीआई ने इसके लिए नो योर कस्‍टमर (KYC) के नियमों में संशोधन किया है. यह संशोधन केवाईसी के मास्टर डायरेक्शन की धारा 66 में किया गया है.  बता दें कि आरबीआई समय-समय पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों को काले धन पर अंकुश लगाने और मनी लॉन्ड्र‍िंग पर लगाम कसने के लिए कदम उठाने के लिए कहता रहता है.

भारतीय रिजर्व बैंक को उम्मीद है कि इससे बैंक‍िंग व्यवस्था में पारदर्श‍िता आएगी. इस संबंध में गुरुवार को अध‍िसूचना जारी की है. अध‍िसूचना के मुताबिक अब बैंक जब भी डिमांड ड्राफ्ट, पे ऑर्डर और बैंक चेक बनवाता है, तो उस पर बनवाले वाले शख्स का नाम भी दर्ज करना अनिवार्य होगा.

 रिजर्व बैंक ने सभी कमर्श‍ियल बैंकों , कोऑपरेटिव बैंकों और जिला केंद्रीय कोऑपरेटिव बैंकों समेत पेमेंट्स बैंकों को भी इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं. इन बैंकों को साफ लहजे में कहा गया है क‍ि इन्हें 15 सितंबर से इस नये नियम को लागू करना होगा.

आरबीआई ने इसके लिए नो योर कस्‍टमर (KYC) के नियमों में संशोधन किया है. यह संशोधन केवाईसी के मास्टर डायरेक्शन की धारा 66 में किया गया है.

बता दें कि आरबीआई समय-समय पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों को काले धन पर अंकुश लगाने और मनी लॉन्ड्र‍िंग पर लगाम कसने के लिए कदम उठाने के लिए कहता रहता है.

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