पानी की कमी से होने वाले रोग व उनसे कैसे करें बचाव

स्किन प्रॉब्लम्स: पानी की कमी के कारण त्वचा से टॉक्सिन निकलने की क्रिया बाधित होती है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं, जैसे- डर्माटाइटिस, सोरायसिस आदि हो सकती हैं.स्किन प्रॉब्लम्स: पानी की कमी के कारण त्वचा से टॉक्सिन निकलने की क्रिया बाधित होती है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं, जैसे- डर्माटाइटिस, सोरायसिस आदि हो सकती हैं.  थकान: पानी शरीर में मौजूद ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है. इसकी कमी का सीधा असर शारीरिक ऊर्जा पर पड़ता है, जिससे हमारी कार्यक्षमता प्रभावित होती है.     हाइ ब्लड प्रेशर: खून में लगभग 92% हिस्सा पानी होता है और जब कोई व्यक्ति डिहाइड्रेशन का शिकार होता है, तब पानी की कमी से खून गाढ़ा होने लगता है, जो रक्तसंचार को प्रभावित करता है, नतीजतन हाइ ब्लड प्रेशर की समस्या शुरू हो जाती है.  अस्थमा और एलर्जी: सांस संबंधी समस्याओं का एक अहम् कारण डिहाइड्रेशन की समस्या है. जब शरीर में पानी की कमी होने लगती है, तब शरीर में हिस्टामाइन का स्तर बढ़ने लगता है, जिसका परिणाम अस्थमा व एलर्जी के रूप में दिखाई देता है. इसलिए एक्सपर्ट्स अस्थमा के मरीज़ों को पर्याप्त पानी पीने की सलाह देते हैं.     कब्ज़: शरीर में पानी की कमी का असर हमारी पाचनक्रिया पर भी पड़ता है, जिससे बड़ी आंत से निकलनेवाले वेस्ट की गति पहले के मुक़ाबले काफ़ी धीमी हो जाती है और कुछ गंभीर मामलों में रुक भी जाती है.  इस तरह करें बचाव  रोज़ाना 8-10 ग्लास पानी पीएं. घर से बाहर निकलते व़क्त पानी की बॉटल साथ ले जाएं. प्यास लगने पर कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय फ्रूट जूस, नारियल पानी, नींबू पानी, जलजीरा, छाछ आदि पीएं.

थकान: पानी शरीर में मौजूद ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है. इसकी कमी का सीधा असर शारीरिक ऊर्जा पर पड़ता है, जिससे हमारी कार्यक्षमता प्रभावित होती है.

हाइ ब्लड प्रेशर: खून में लगभग 92% हिस्सा पानी होता है और जब कोई व्यक्ति डिहाइड्रेशन का शिकार होता है, तब पानी की कमी से खून गाढ़ा होने लगता है, जो रक्तसंचार को प्रभावित करता है, नतीजतन हाइ ब्लड प्रेशर की समस्या शुरू हो जाती है.

अस्थमा और एलर्जी: सांस संबंधी समस्याओं का एक अहम् कारण डिहाइड्रेशन की समस्या है. जब शरीर में पानी की कमी होने लगती है, तब शरीर में हिस्टामाइन का स्तर बढ़ने लगता है, जिसका परिणाम अस्थमा व एलर्जी के रूप में दिखाई देता है. इसलिए एक्सपर्ट्स अस्थमा के मरीज़ों को पर्याप्त पानी पीने की सलाह देते हैं.

कब्ज़: शरीर में पानी की कमी का असर हमारी पाचनक्रिया पर भी पड़ता है, जिससे बड़ी आंत से निकलनेवाले वेस्ट की गति पहले के मुक़ाबले काफ़ी धीमी हो जाती है और कुछ गंभीर मामलों में रुक भी जाती है.

इस तरह करें बचाव 
रोज़ाना 8-10 ग्लास पानी पीएं. घर से बाहर निकलते व़क्त पानी की बॉटल साथ ले जाएं. प्यास लगने पर कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय फ्रूट जूस, नारियल पानी, नींबू पानी, जलजीरा, छाछ आदि पीएं. 

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