फेसबुक कर रहा ‘things in common’ फीचर की टेस्टिंग, अब एक जैसे लोग जुड़ सकेंगे यहां

फेसबुक अपने 200 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स के लिए एक नया फीचर टेस्ट कर रहा है जिसका नाम होगा ‘थिंग्स इंन कॉमन’. जैसा कि नाम से साफ है इस फीचर में आपको ऐसे यूजर्स की सजेशन दी जाएगी जो आपके साथ कुछ समानताएं रखते हों. कंपनी ने शुक्रवार को इस नए फीचर की टेस्टिंग की जानकारी दी है.फेसबुक अपने 200 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स के लिए एक नया फीचर टेस्ट कर रहा है जिसका नाम होगा 'थिंग्स इंन कॉमन'. जैसा कि नाम से साफ है इस फीचर में आपको ऐसे यूजर्स की सजेशन दी जाएगी जो आपके साथ कुछ समानताएं रखते हों. कंपनी ने शुक्रवार को इस नए फीचर की टेस्टिंग की जानकारी दी है.   दरअसल इस फीचर का मकसद आपको ऐसे यूजर्स से जोड़ते हुए आपका दायरा बढ़ाना हो जो एक जैसे इंटरेस्ट रखते हैं या कुछ खास समानताओं के साथ आते हैं. ये फीचर एक लेबल या टैग के रुप में नज़र आएगा. उदाहरण के लिए किसी पेज के पोस्ट पर यदि कोई ऐसा शख्स कमेंट करता है जो आपकी फ्रेंड लिस्ट में नहीं है लेकिन मुमकिन है कि वह भी उसने भी उसी कॉलेज से पढ़ाई की हो जहां से आपने की है. या आप भी उसी शहर से आते हों जिस शहर से वह यूजर ताल्लुक रखता हैं तो इस कमेंट करने वाले यूजर के साथ आपको ये 'थिंग्स इंन कॉमन' का टैग नजर आएगा. मसलन "You both went to the XYZ University'.     तस्वीर-Cnet फेसबुक ने साफ किया है कि इस फीचर की टेस्टिंग अभी सिर्फ अमेरिका में की जा रही है. दुनियाभर में कब आएगा इसे लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है. फेसबुक ने अपने बयान में बताया, '' थिंग्स इंन कॉमन की मदद से लोगों के एक-दूसरे से जुड़ने का मौका मिलेगा. हम इस फीचर की टेस्टिंग कर रहे हैं जो कमेंट के ऊपर एक लेबल के रूप में दिखाई देगा. ये उन लोगों के लिए होगा जो फेसबुक पर जुड़े नहीं हैं लेकिन कुछ समानताएं समेटे हुए है.   फेसबुक लगातार नए-नए फीचर की टेस्टिंग करता रहता है ताकि यूजर एक्सपरियंस को बेहतर बनाया जा सके लेकिन 'थिंग्स इंन कॉमन' फीचर के साथ एक और चीज़ सामने आती है कि आखिर ये सोशल नेटवर्किंग साइट आपके बारे में कितना जानती है या तकनीक की भाषा में कहें तो आपके कितने डेटा उसके पास हैं. एक ऐसे समय में जब यूजर्स के डेटा कंट्रोल को लेकर विवाद छिड़ गया है और फेसबुक अबतक के सबसे बड़े डेटा ब्रीच कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल में फंस चुका है. फेसबुक के यूजर्स को ये भी देखना होगा कि कितनी जानकारी इस प्लेफॉर्म पर दर्ज की जाए.

दरअसल इस फीचर का मकसद आपको ऐसे यूजर्स से जोड़ते हुए आपका दायरा बढ़ाना हो जो एक जैसे इंटरेस्ट रखते हैं या कुछ खास समानताओं के साथ आते हैं. ये फीचर एक लेबल या टैग के रुप में नज़र आएगा. उदाहरण के लिए किसी पेज के पोस्ट पर यदि कोई ऐसा शख्स कमेंट करता है जो आपकी फ्रेंड लिस्ट में नहीं है लेकिन मुमकिन है कि वह भी उसने भी उसी कॉलेज से पढ़ाई की हो जहां से आपने की है. या आप भी उसी शहर से आते हों जिस शहर से वह यूजर ताल्लुक रखता हैं तो इस कमेंट करने वाले यूजर के साथ आपको ये ‘थिंग्स इंन कॉमन’ का टैग नजर आएगा. मसलन “You both went to the XYZ University’.

फेसबुक ने साफ किया है कि इस फीचर की टेस्टिंग अभी सिर्फ अमेरिका में की जा रही है. दुनियाभर में कब आएगा इसे लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है. फेसबुक ने अपने बयान में बताया, ” थिंग्स इंन कॉमन की मदद से लोगों के एक-दूसरे से जुड़ने का मौका मिलेगा. हम इस फीचर की टेस्टिंग कर रहे हैं जो कमेंट के ऊपर एक लेबल के रूप में दिखाई देगा. ये उन लोगों के लिए होगा जो फेसबुक पर जुड़े नहीं हैं लेकिन कुछ समानताएं समेटे हुए है.

फेसबुक लगातार नए-नए फीचर की टेस्टिंग करता रहता है ताकि यूजर एक्सपरियंस को बेहतर बनाया जा सके लेकिन ‘थिंग्स इंन कॉमन’ फीचर के साथ एक और चीज़ सामने आती है कि आखिर ये सोशल नेटवर्किंग साइट आपके बारे में कितना जानती है या तकनीक की भाषा में कहें तो आपके कितने डेटा उसके पास हैं. एक ऐसे समय में जब यूजर्स के डेटा कंट्रोल को लेकर विवाद छिड़ गया है और फेसबुक अबतक के सबसे बड़े डेटा ब्रीच कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल में फंस चुका है. फेसबुक के यूजर्स को ये भी देखना होगा कि कितनी जानकारी इस प्लेफॉर्म पर दर्ज की जाए.

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