बकरी पालने वाले के बेटे ने बनाई अरबों की संपत्ति, छापे में मिला था 163 करोड़ कैश

उसकी तरक्की की कहानी से आप चकित हो जाएंगे और कहेंगे कि ऐसा तो सिर्फ फिल्मों में होते देखा है. लेकिन यह सच है. जिसके पिता कभी गांव में बकरी पालन करते थे, आज वह तमिलनाडु के दिग्गज अरबपति कारोबारियों में शामिल है. उसके ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे में करोड़ 163 करोड़ रुपये कैश और 90 किलो गोल्ड बरामद हुआ है.उसकी तरक्की की कहानी से आप चकित हो जाएंगे और कहेंगे कि ऐसा तो सिर्फ फिल्मों में होते देखा है. लेकिन यह सच है. जिसके पिता कभी गांव में बकरी पालन करते थे, आज वह तमिलनाडु के दिग्गज अरबपति कारोबारियों में शामिल है. उसके ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे में करोड़ 163 करोड़ रुपये कैश और 90 किलो गोल्ड बरामद हुआ है.  तकदीर बदलने की कहानी  यह चकित करने वाली कहानी है नागराजन सेय्यादुरई की जो इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद अपने पिता के कारोबार से जुड़ गया था. उसके पिता सेय्यादुरई राज्य के विरुधुनगर जिले के अरुप्पुकोटाई से आते हैं, जहां वह बकरी पालन करते थे. इन बकरियों को कसाइयों को बेचकर जो पैसा आता था, उनसे परिवार का खर्च चलता था. बाद में वह राज्य के राजमार्ग विभाग में ठेकेदार हो गए.  यहीं पर वह सुगन्या रामकृष्णन और सुंदरराज रेड्ड‍ियार नामक दो ठेकेदारों के संपर्क में आए. इन तीनों ने मिलकर ठेकेदारी से अच्छा पैसा बनाया और कल्लाकुरिची में एक कताई मिल स्थापित किया. बाद में इन दोनों से कुछ मतभेद होने पर सुंदरराज अलग हो गया. इसके बाद सेय्यादुरई और सुगन्या ने राज्य के हाईवे विभाग में अपना काम जारी रखा. पांच साल पहले सुगन्या भी इस साझेदारी से अलग हो गया. इसके बाद सेय्यादुरई ने अकेले ही दो सड़क परियोजनाओं की ठेकेदारी की.  उसके एक स्थानीय माफिया पोट्टू सुरेश से संबंध थे जिसकी मदद से उसकी डीएमके के कद्दावर नेता अड़ागिरी से करीबी हो गई. इस तरह डीएमके सरकार में भी सेय्यादुरई को प्रोजेक्ट मिलने लगे.  मंत्री के बेटे से दोस्ती  पोट्टू सुरेश के निधन के बाद सेय्यादुरई ने AIADMK नेताओं से करीबी बनाई. उसका बेटा नागार्जुन कारोबार संभाल चुका था और उसने सत्तारूढ़ AIADMK सरकार के नेताओं से अपने करीबी संबंध बनाए. धीरे-धीरे नागार्जुन ने राज्य के एक बड़े मंत्री के बेटे से दोस्ती बढ़ाई, जो सड़क और हाईवे प्रोजेक्ट के ठेके में रुचि रखता था. इस तरह पिता- पुत्र सेय्यादुरई-नागार्जुन का कारोबार तेजी से बढ़ने लगा और ज्यादातर ठेके उन्हें ही मिलने लगे. बेटा अक्सर राज्य के सचिवालय में जाने लगा और राजनीतिक हलके में उसकी अच्छी पकड़ हो गई.  आज नागार्जुन तीन कंपनियों- एसपीके स्प‍िनर्स प्राइवेट लिमिटेड, श्रीबालाजी टोलवेज और एसपीकेएंडको एक्सप्रेसवे- में डायरेक्टर है. एसपीके समूह को पिछले कुछ साल में राज्य के अरबों रुपये के टेंडर हासिल हुए हैं. डीएमके ने इन ठेकों में भ्रष्टाचार की शिकायत राज्य के सतर्कता और भ्रष्टाचार रोधी निदेशालय में की, जिसके बाद आयकर विभाग ने नागार्जुन के यहां छापा डाला और बताया कि इस छापे में तमाम अघोषित संपत्त‍ि का पता चला है.  दोस्तों, रिश्तेदारों के यहां छुपाई थी नकदी  आयकर विभाग ने प्रेस रिलीज में बताया कि नागार्जुन के घर में सिर्फ 24 लाख की नकदी मिली, लेकिन उसने 10 विभिन्न स्थानों पर अपने कर्मचारियों, सहयोगियों के ठिकानों करोड़ों की नकदी और गोल्ड छुपाई थी. एक दोस्त के घर में उसने 2 बीएमडब्ल्यू कारें छिपा रखीं थी. इस तरह इन सभी ठिकानों पर छापे में कुल 163 करोड़ रुपये की नकदी और 100 किलो गोल्ड बरामद किया गया.

तकदीर बदलने की कहानी

यह चकित करने वाली कहानी है नागराजन सेय्यादुरई की जो इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद अपने पिता के कारोबार से जुड़ गया था. उसके पिता सेय्यादुरई राज्य के विरुधुनगर जिले के अरुप्पुकोटाई से आते हैं, जहां वह बकरी पालन करते थे. इन बकरियों को कसाइयों को बेचकर जो पैसा आता था, उनसे परिवार का खर्च चलता था. बाद में वह राज्य के राजमार्ग विभाग में ठेकेदार हो गए.

यहीं पर वह सुगन्या रामकृष्णन और सुंदरराज रेड्ड‍ियार नामक दो ठेकेदारों के संपर्क में आए. इन तीनों ने मिलकर ठेकेदारी से अच्छा पैसा बनाया और कल्लाकुरिची में एक कताई मिल स्थापित किया. बाद में इन दोनों से कुछ मतभेद होने पर सुंदरराज अलग हो गया. इसके बाद सेय्यादुरई और सुगन्या ने राज्य के हाईवे विभाग में अपना काम जारी रखा. पांच साल पहले सुगन्या भी इस साझेदारी से अलग हो गया. इसके बाद सेय्यादुरई ने अकेले ही दो सड़क परियोजनाओं की ठेकेदारी की.

उसके एक स्थानीय माफिया पोट्टू सुरेश से संबंध थे जिसकी मदद से उसकी डीएमके के कद्दावर नेता अड़ागिरी से करीबी हो गई. इस तरह डीएमके सरकार में भी सेय्यादुरई को प्रोजेक्ट मिलने लगे.

मंत्री के बेटे से दोस्ती

पोट्टू सुरेश के निधन के बाद सेय्यादुरई ने AIADMK नेताओं से करीबी बनाई. उसका बेटा नागार्जुन कारोबार संभाल चुका था और उसने सत्तारूढ़ AIADMK सरकार के नेताओं से अपने करीबी संबंध बनाए. धीरे-धीरे नागार्जुन ने राज्य के एक बड़े मंत्री के बेटे से दोस्ती बढ़ाई, जो सड़क और हाईवे प्रोजेक्ट के ठेके में रुचि रखता था. इस तरह पिता- पुत्र सेय्यादुरई-नागार्जुन का कारोबार तेजी से बढ़ने लगा और ज्यादातर ठेके उन्हें ही मिलने लगे. बेटा अक्सर राज्य के सचिवालय में जाने लगा और राजनीतिक हलके में उसकी अच्छी पकड़ हो गई.

आज नागार्जुन तीन कंपनियों- एसपीके स्प‍िनर्स प्राइवेट लिमिटेड, श्रीबालाजी टोलवेज और एसपीकेएंडको एक्सप्रेसवे- में डायरेक्टर है. एसपीके समूह को पिछले कुछ साल में राज्य के अरबों रुपये के टेंडर हासिल हुए हैं. डीएमके ने इन ठेकों में भ्रष्टाचार की शिकायत राज्य के सतर्कता और भ्रष्टाचार रोधी निदेशालय में की, जिसके बाद आयकर विभाग ने नागार्जुन के यहां छापा डाला और बताया कि इस छापे में तमाम अघोषित संपत्त‍ि का पता चला है.

दोस्तों, रिश्तेदारों के यहां छुपाई थी नकदी

आयकर विभाग ने प्रेस रिलीज में बताया कि नागार्जुन के घर में सिर्फ 24 लाख की नकदी मिली, लेकिन उसने 10 विभिन्न स्थानों पर अपने कर्मचारियों, सहयोगियों के ठिकानों करोड़ों की नकदी और गोल्ड छुपाई थी. एक दोस्त के घर में उसने 2 बीएमडब्ल्यू कारें छिपा रखीं थी. इस तरह इन सभी ठिकानों पर छापे में कुल 163 करोड़ रुपये की नकदी और 100 किलो गोल्ड बरामद किया गया.

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