बच्चों को बताया ‘गुड टच और बैड टच’ का अंतर

अधिकांश मामलों में रिश्तेदार और करीबी ही बच्चों का शोषण करते हैं। यदि कोई करीबी ऐसी हरकत है जो अच्छा नहीं लग रहा है तो बच्चों को उसकी जानकारी अपने परिजनों को जरूर देनी चाहिए।अधिकांश मामलों में रिश्तेदार और करीबी ही बच्चों का शोषण करते हैं। यदि कोई करीबी ऐसी हरकत है जो अच्छा नहीं लग रहा है तो बच्चों को उसकी जानकारी अपने परिजनों को जरूर देनी चाहिए।  शहर के राप्ती नगर चौराहा स्थित सरस्वती बाल विहार स्कूल और खजांची चौक स्थित गोरखपुर सिटी स्कूल में परमात्मा सेवा संस्थान की ओर से 'बाल यौन शोषण' विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें सवालों के माध्यम से बच्चों के जीवन में हुई यौन शोषण से जुड़ी घटनाओं को जानने का प्रयास किया गया।   खुला मंच मिला तो बच्चों ने भी अपने साथ हुई हर छोटी-बड़ी घटनाओं को साझा किया। ज्यादातर मामलों में नजदीकी लोग ही कटघरे में खड़े दिखाई पड़े। सवालों के माध्यम से बच्चों के मन की बात जानने के बाद संस्थान की सचिव चेतना पांडेय ने उन्हें यौन शोषण से बचने का तरीका बताया। कहा कि यौन शोषण की शुरुआत परिवार और आसपास रहने वाले लोगों से ही होती है। ऐसे में न केवल इस बात को लेकर सजग रहने की जरूरत है बल्कि बच्चों को 'गुड टच और बैड टच' का अंतर बताने की भी जरूरत है। इसके लिए उन्होंने अभिभावकों को विशेष तौर से जागरूक रहने की सलाह दी। बच्चों से कहा कि वह अपने-अपने अभिभावकों से हर छोटी-बड़ी बातों को जरूर साझा करें। अभिभावकों से भी अनुरोध किया गया कि वे बच्चों की बातों को गंभीरता से लें और अपने बच्चों के आसपास रहने वाले लोगों के बारे में ठीक से पता भी करें।   दोस्ताना व्यवहार से बच्चों को समझाएं 'गुड टच और बैड टच' यह भी पढ़ें इस अवसर पर प्रीति श्रीवास्तव, शिप्रा श्रीवास्तव, सुषमा वर्मा, वंदना श्रीवास्तव, सुशीला विश्वकर्मा, वीपी गुप्ता, शिखा जायसवाल, जितेंद्र कुमार, राजू निषाद, पूजा तिवारी आदि मौजूद रहे।

शहर के राप्ती नगर चौराहा स्थित सरस्वती बाल विहार स्कूल और खजांची चौक स्थित गोरखपुर सिटी स्कूल में परमात्मा सेवा संस्थान की ओर से ‘बाल यौन शोषण’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें सवालों के माध्यम से बच्चों के जीवन में हुई यौन शोषण से जुड़ी घटनाओं को जानने का प्रयास किया गया।

खुला मंच मिला तो बच्चों ने भी अपने साथ हुई हर छोटी-बड़ी घटनाओं को साझा किया। ज्यादातर मामलों में नजदीकी लोग ही कटघरे में खड़े दिखाई पड़े। सवालों के माध्यम से बच्चों के मन की बात जानने के बाद संस्थान की सचिव चेतना पांडेय ने उन्हें यौन शोषण से बचने का तरीका बताया। कहा कि यौन शोषण की शुरुआत परिवार और आसपास रहने वाले लोगों से ही होती है। ऐसे में न केवल इस बात को लेकर सजग रहने की जरूरत है बल्कि बच्चों को ‘गुड टच और बैड टच’ का अंतर बताने की भी जरूरत है। इसके लिए उन्होंने अभिभावकों को विशेष तौर से जागरूक रहने की सलाह दी। बच्चों से कहा कि वह अपने-अपने अभिभावकों से हर छोटी-बड़ी बातों को जरूर साझा करें। अभिभावकों से भी अनुरोध किया गया कि वे बच्चों की बातों को गंभीरता से लें और अपने बच्चों के आसपास रहने वाले लोगों के बारे में ठीक से पता भी करें।

इस अवसर पर प्रीति श्रीवास्तव, शिप्रा श्रीवास्तव, सुषमा वर्मा, वंदना श्रीवास्तव, सुशीला विश्वकर्मा, वीपी गुप्ता, शिखा जायसवाल, जितेंद्र कुमार, राजू निषाद, पूजा तिवारी आदि मौजूद रहे।

English News

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com