बजट 2018: आम आदमी के लिए सरकार बढ़ा सकती है टैक्स छूट

केंद्र सरकार 1 फरवरी को बजट पेश करने की तैयारी कर रही है. जीएसटी लागू होने के बाद पेश किए जा रहे इस बजट में टैक्स के मार्चे पर बदलाव संभव है. ऐसे में सरकार मौजूदा हालातों को देखकर होम लोन समेत अन्य मोर्चों पर टैक्स को लेकर कुछ जरूरी बदलाव कर सकती है.बजट 2018: आम आदमी के लिए सरकार बढ़ा सकती है टैक्स छूट

कारोबारियों और आम आदमी को टैक्स व वित्तीय मामलों में सहयोग मुहैया कराने वाले ऑनलाइन पोर्टल क्ल‍ियरटैक्स के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता कहते हैं कि नोटबंदी के बाद ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. हालांकि टैक्स से प्राप्त होने वाले राजस्व में बढ़ोतरी हुई है. जीएसटी के लागू होने के बाद अप्रत्यक्ष कर का कलेक्शन लक्ष्य से भी कम रहा है. इसका असर बजट में आम आदमी को टैक्स के मोर्चे पर मिलने वाली राहत पर पड़ सकता है.

अर्चित ने Aajtak.in से बातचीत में बताया कि इसके बावजूद भी सरकार टैक्स के मोर्चे पर कुछ अहम कदम उठा सकती है. मौजूदा हालात में ये बदलाव न सिर्फ काफी अहम साबित होंगे, बल्क‍ि आम आदमी को राहत प्रदान करने का काम भी करेंगे. अर्चित ने बजट  से अपेक्षाओं के साथ कुछ सुझाव भी दिए हैं, जिन्हें सरकार बजट में शामिल करे तो आम आदमी को काफी राहत मिलेगी.

एनपीएस को टैक्स फ्रेंडली बनाया जाए :

भारत में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) रिटायरमेंट के लिए बचत करने का सबसे पुख्ता माध्यम है. केंद्र सरकार टैक्स नीतियों के जरिये इस स्कीम में निवेश को बढ़ावा दे सकती है. इसके लिए सरकार एन्युटी रेट्स बढ़ा सकती है. इसके अलावा एनपीएस के टियर 2 शहरों के खातों को लेकर स्थ‍िति साफ करने की भी जरूरत है.

मौजूदा समय में एनपीएस में निवेश ईपीएफ और पीपीएफ के मुकाबले काफी ज्यादा बोझिल है. मौजूदा समय में एनपीएस से 20 फीसदी विद्ड्रॉअल टैक्सेबल है. वहीं, 40 फीसदी रकम एन्युटी में रखी जाती है. इस वजह से ज्यादा लोग इसमें निवेश नहीं करते.  

मेडिकल रिइंबर्समेंट की सीमा बढ़ेगी ?

सरकार इस बजट में मेडिकल रिइंबर्समेंट (चिकित्सा प्रतिपूर्ति) की सीमा भी बढ़ा सकती है. मौजूदा समय में चिकित्सा खर्च काफी ज्यादा बढ़ गया है. ऐसे समय में मेडिकल खर्च पर 15 हजार रुपये तक की टैक्स फ्री छूट नाकाफी साबित हो रही है. ऐसे में उम्मीद है कि सरकार इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर सकती है. 

मेडिकल रिइंबर्समेंट टैक्स फ्री लिमिट के तहत क्लेम किया जाता है. फिलहाल क्लेम करने की सीमा 15 हजार रुपये तय है.  इसकी सीमा बढ़ाकर सरकार चिक‍ित्सा पर होने वाले खर्च में थोड़ी राहत देने में मदद कर सकती है.

होम लोन की ब्याद दर पर टैक्स छूट

केंद्र सरकार बजट में होम लोन की ब्याज दर पर मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ा सकती है. प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें और अन्य खर्च को देखते हुए सरकार इस लिमिट को बढ़ा सकती है. सरकार इसे बढ़ाती है, तो इसे 2 लाख की जगह 3 से 4 लाख कर दिया जाना चाहिए.

LTCG का होल्डिंग पीर‍ियड बढ़ाया जाए

दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (Long term capital gains or LTCG) का फायदा उठाने के लिए इक्व‍िटी शेयर और इक्व‍िटी म्युचुअल फंड का सबसे कम होल्‍डिंग पीरियड है. पिछले दिनों खबरें आई थीं कि सरकार इन LTCG पर टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है. मौजूदा समय में ये पूरी तरह टैक्स छूट के दायरे में आते हैं.

अगर सरकार इन्हें टैक्स के दायरे में लाती है, तो इससे उस मध्यमवर्गीय तबके को झटका लगेगा, जिसने इनमें निवेश करना शुरू किया है. नोटबंदी के बाद लोगों ने काफी ज्यादा पैसा इनमें लगाया है. ऐसे में मध्यम वर्ग के लिए ये निवेश के साधन काफी अहमियत रखते हैं. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इन्हें टैक्स के दायरे में लाने की बजाय इनका होल्ड‍िंग पीरिएड बढ़ा द‍िया जाए. इसे दो साल तक कि‍या जा सकता है, लेक‍िन इस पर मिलने वाली टैक्स छूट को जस का तस रहने दें.

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