बीएमसी ने दे दी बकरीद पर हाईकोर्ट के कमरों में कुर्बानी की इजाजत, मांगा जवाब

आप सभी नील आर्म्‍सट्रांग को चंद्रमा पर जाने वाले पहले यात्री के तौर पर जानते होंगे लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि बृहन्न मुंबई म्युनिसपल कारपोरेशन (बीएमसी) ने आर्म्‍सट्रांग नाम के एक व्यक्ति को बाम्बे हाईकोर्ट के कमरा नंबर 13 में बकरीद पर पांच बकरों की कुर्बानी की ऑनलाइन इजाजत दी है। इतना ही नहीं, दो और लोगों को हाईकोर्ट में बकरीद पर कुर्बानी इजाजत दी गई है।आप सभी नील आर्म्‍सट्रांग को चंद्रमा पर जाने वाले पहले यात्री के तौर पर जानते होंगे लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि बृहन्न मुंबई म्युनिसपल कारपोरेशन (बीएमसी) ने आर्म्‍सट्रांग नाम के एक व्यक्ति को बाम्बे हाईकोर्ट के कमरा नंबर 13 में बकरीद पर पांच बकरों की कुर्बानी की ऑनलाइन इजाजत दी है। इतना ही नहीं, दो और लोगों को हाईकोर्ट में बकरीद पर कुर्बानी इजाजत दी गई है।   बाम्बे हाईकोर्ट ने मामला जानकारी में आने पर गहरी नाराजगी और आश्चर्य जताते हुए बीएमसी से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने न सिर्फ इन इजाजतों पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया बल्कि मामले की जांच का मन बनाते हुए बीएमसी से इस पर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट मामले पर सोमवार को फिर सुनवाई करेगा।  बकरीद का त्योहार 22 अगस्त को है। इस दिन मुस्लिम समुदाय अल्लाह को खुश करने के लिए जानवरों की कुर्बानी देते हैं। मुंबई में बीएमसी ने बकरीद पर ऑनलाइन कुर्बानी की इजाजत शुरू की है, जिसे जिव मैत्री ट्रस्ट ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। गत गुरुवार को हाईकोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताता कि बीएमसी ने हाईकोर्ट में ही बकरों की कुर्बानी की इजाजत कैसे दे दी। यहां तक कि जिस दिन (16 अगस्त) को कोर्ट मामले की सुनवाई कर रहा था, उसी तारीख का बीएमसी का इजाजत आदेश कोर्ट के सामने पेश किया गया जिसमें नील आर्म्‍सट्रांग को हाईकोर्ट के कमरा नंबर 13 में पांच बकरों की कुर्बानी की इजाजत दी गई थी।   बीएमसी ने दिए डॉक्टर की मौत के जांच आदेश यह भी पढ़ें इसके अलावा शान वाज नामक व्यक्ति को भी हाईकोर्ट के कमरा नंबर 13 में पांच बकरों की कुर्बानी की इजाजत दी गई थी। हाईकोर्ट के न्यायाधीश अभय एस ओका और रियाज आई आई छांगला की पीठ ने मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दस्तावेजों को देखने से साफ पता चलता है कि बिना सोच विचार के और बिना दिमाग लगाए बीएमसी ने ऑनलाइन अर्जी के आधार पर ये इजाजत दे दी है। जब कोर्ट मे पेश बीएससी के वकील को ऑनलाइन इजाजत का रिकॉर्ड दिखाया गया तो उसने निर्देश लेकर कोर्ट को बताया कि ऑनलाइन अनुमति की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाएगी। कोर्ट ने वकील के बयान को स्वीकार कर लिया।  कोर्ट ने कहा कि उन्हें याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि प्रिवेंशन आफ क्रुअलिटी टु एनीमल (स्लाटर हाउस) रूल 2001 के नियम 3 के मुताबिक कोई भी व्यक्ति म्युनिसपल एरिया के भीतर पंजीकृत कसाई घर के अलावा कहीं भी जानवर की कटाई नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से ऑनलाइन इजाजत दी गई है उसे देखते हुए मामले की जांच पड़ताल (स्क्रूटनी) जरूरी हो जाती है। कोर्ट ने बीएमसी के वकील से कहा कि वह निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित करे और मामले को लेकर 20 अगस्त को फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया है। कोर्ट जब ये आदेश पारित कर रहा था, तभी याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि एक अन्य वकील को बीएमसी की ओर से हाईकोर्ट के कमरा नंबर 52 में चार बकरों की कुर्बानी की इजाजत दी गई है।   सात साल तक के बच्चों की कस्टडी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनाया ये फैसला यह भी पढ़ें इस मामले में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया था कि कुछ वकीलों ने आफिस के पते पर कुर्बानी की इजाजत मांगी थी और उन्हें बीएमसी की ओर से इजाजत दे दी गई है। इसी क्रम में 14 अगस्त को मुंबई नारिमन प्वाइंट पर अरकाडिया बिल्डिंग में ऑफिस परिसर 805 में कुर्बानी की इजाजत दी गई थी। इसी तरह 16 अगस्त को एक वकील को फोर्ट क्षेत्र में राजा बहादुर मैंशन में पांच बकरों की कुर्बानी की इजाजत दी गई थी। लेकिन जब कोर्ट को नील आर्म्‍सट्रांग और अन्य लोगों को हाईकोर्ट परिसर में ही कुर्बानी की इजाजत की बात बताई गई तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।

बाम्बे हाईकोर्ट ने मामला जानकारी में आने पर गहरी नाराजगी और आश्चर्य जताते हुए बीएमसी से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने न सिर्फ इन इजाजतों पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया बल्कि मामले की जांच का मन बनाते हुए बीएमसी से इस पर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट मामले पर सोमवार को फिर सुनवाई करेगा।

बकरीद का त्योहार 22 अगस्त को है। इस दिन मुस्लिम समुदाय अल्लाह को खुश करने के लिए जानवरों की कुर्बानी देते हैं। मुंबई में बीएमसी ने बकरीद पर ऑनलाइन कुर्बानी की इजाजत शुरू की है, जिसे जिव मैत्री ट्रस्ट ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। गत गुरुवार को हाईकोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताता कि बीएमसी ने हाईकोर्ट में ही बकरों की कुर्बानी की इजाजत कैसे दे दी। यहां तक कि जिस दिन (16 अगस्त) को कोर्ट मामले की सुनवाई कर रहा था, उसी तारीख का बीएमसी का इजाजत आदेश कोर्ट के सामने पेश किया गया जिसमें नील आर्म्‍सट्रांग को हाईकोर्ट के कमरा नंबर 13 में पांच बकरों की कुर्बानी की इजाजत दी गई थी।

इसके अलावा शान वाज नामक व्यक्ति को भी हाईकोर्ट के कमरा नंबर 13 में पांच बकरों की कुर्बानी की इजाजत दी गई थी। हाईकोर्ट के न्यायाधीश अभय एस ओका और रियाज आई आई छांगला की पीठ ने मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दस्तावेजों को देखने से साफ पता चलता है कि बिना सोच विचार के और बिना दिमाग लगाए बीएमसी ने ऑनलाइन अर्जी के आधार पर ये इजाजत दे दी है। जब कोर्ट मे पेश बीएससी के वकील को ऑनलाइन इजाजत का रिकॉर्ड दिखाया गया तो उसने निर्देश लेकर कोर्ट को बताया कि ऑनलाइन अनुमति की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाएगी। कोर्ट ने वकील के बयान को स्वीकार कर लिया।

कोर्ट ने कहा कि उन्हें याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि प्रिवेंशन आफ क्रुअलिटी टु एनीमल (स्लाटर हाउस) रूल 2001 के नियम 3 के मुताबिक कोई भी व्यक्ति म्युनिसपल एरिया के भीतर पंजीकृत कसाई घर के अलावा कहीं भी जानवर की कटाई नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से ऑनलाइन इजाजत दी गई है उसे देखते हुए मामले की जांच पड़ताल (स्क्रूटनी) जरूरी हो जाती है। कोर्ट ने बीएमसी के वकील से कहा कि वह निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित करे और मामले को लेकर 20 अगस्त को फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया है। कोर्ट जब ये आदेश पारित कर रहा था, तभी याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि एक अन्य वकील को बीएमसी की ओर से हाईकोर्ट के कमरा नंबर 52 में चार बकरों की कुर्बानी की इजाजत दी गई है।

इस मामले में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया था कि कुछ वकीलों ने आफिस के पते पर कुर्बानी की इजाजत मांगी थी और उन्हें बीएमसी की ओर से इजाजत दे दी गई है। इसी क्रम में 14 अगस्त को मुंबई नारिमन प्वाइंट पर अरकाडिया बिल्डिंग में ऑफिस परिसर 805 में कुर्बानी की इजाजत दी गई थी। इसी तरह 16 अगस्त को एक वकील को फोर्ट क्षेत्र में राजा बहादुर मैंशन में पांच बकरों की कुर्बानी की इजाजत दी गई थी। लेकिन जब कोर्ट को नील आर्म्‍सट्रांग और अन्य लोगों को हाईकोर्ट परिसर में ही कुर्बानी की इजाजत की बात बताई गई तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।

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