भूटान किंग, PAK के मंत्री समेत ये नेता जुटेंगे अटल को अंतिम विदाई देने

भारत के महानतम नेताओं में से एक अटल बिहारी वाजपेयी को सार्क देशों सहित दुनिया भर के नेताओं ने श्रद्धांजलि दी है. उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के कानून मंत्री सहित सार्क देशों के कई नेता आ सकते हैं. अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भूटान के किंग जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक दिल्ली पहुंच चुके हैं.भूटान किंग, PAK के मंत्री समेत ये नेता जुटेंगे अटल को अंतिम विदाई देने

इंडिया टुडे-आजतक को सूत्रों ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) के अंतिम संस्कार में सार्क के कई देशों के मंत्री शामिल हो सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के कार्यवाहक कानून एवं सूचना मंत्री सईद जफर अली अपने देश के प्रतिनिधि के रूप में अंतिम संस्कार में शामिल होंगे.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार शाम 05:05 बजे दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. उनके निधन पर भारत सरकार ने सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है.

वाजपेयी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के मंत्री जफर अली विशेष विमान से आएंगे. वह कार्यवाह सरकार के मंत्री हैं, उन्हें सार्क देशों के मंत्रियों जैसी सुविधाएं (SAARC sticker ) हासिल नहीं हैं, इसलिए उन्हें भारतीय उच्चायोग से वीजा लेनी होगी. सार्क स्ट‍िकर रखने वाले मंत्रियों या सांसदों को सार्क देशों में आने-जाने के लिए वीजा की जरूरत नहीं होती.

वाजपेयी के अंतिम संस्कार में भूटान नरेश जिग्मे वांगचुक भी शामिल होंगे. इसके अलावा बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूद अली, नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली और श्रीलंका के कार्यवाह विदेश मंत्री लक्ष्मण किरिएला ने भी इस दौरान दिल्ली पहुंचने की पुष्ट‍ि कर दी है.

वाजपेयी के निधन पर दुनिया भर के नेताओं सहित सार्क देशों के नेताओं ने श्रद्धांजलि दी है. नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने कहा, ‘वह एक दूरदर्शी स्टेट्समैन थे जो भारत के लोगों के निस्वार्थ सेवा के लिए जाने जाते हैं. भारत और दुनिया ने एक शीर्ष राजनीतिक हस्ती को खो दिया है और नेपाल ने अपने सच्चे दोस्त और शुभेच्छु को.’  

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘वाजपेयी ने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में बदलाव के लिए काम किया था और वह विकास के लिए सार्क तथा अन्य क्षेत्रीय सहयोग के प्रयासों के समर्थक थे.’

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