मौसम की तरह जारी होगा पर्यावरण पूर्वानुमान, प्रदूषण का सटीक पता चलेगा

मौसम विभाग अब केवल मौसम का ही नहीं बल्कि वायु गुणवत्ता का भी पूर्वानुमान जारी करेगा। यह पूर्वानुमान तीन से सात दिन के लिए होगा एवं आइआइटी, दिल्ली के तकनीकी सहयोग से जारी किया जाएगा। इसकी शुरुआत एक अक्टूबर से की जाएगी।मौसम विभाग अब केवल मौसम का ही नहीं बल्कि वायु गुणवत्ता का भी पूर्वानुमान जारी करेगा। यह पूर्वानुमान तीन से सात दिन के लिए होगा एवं आइआइटी, दिल्ली के तकनीकी सहयोग से जारी किया जाएगा। इसकी शुरुआत एक अक्टूबर से की जाएगी।   दरअसल, सर्दियों के दौरान पिछले दो सालों से दिल्ली गैस चैंबर में तब्दील हो जा रही है। हालांकि, 15 अक्टूबर से 15 मार्च तक ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) भी लागू रहता है और केंद्रीय भूविज्ञान, वन एवं पर्यावरण मंत्रलय के अधीन सफर इंडिया भी वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान जारी करता है। हालांकि इसमें बहुत अधिक जानकारी नहीं होती है।  ऐसे में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) व पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) काफी समय से मौसम विभाग से सहयोग की मांग कर रहे थे। मौसम विभाग और आइआइटी, दिल्ली के वायुमंडलीय विज्ञान केंद्र के बीच इस आशय का पूर्वानुमान जारी करने के लिए तकनीकी सहयोग पर सहमति बन गई है। आइआइटी, दिल्ली और मौसम विभाग संयुक्त रूप से वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान जारी करेंगे, जो अपेक्षाकृत अधिक प्रामाणिक होगा।   जैन मुनि तरुण सागर की अंतिम यात्रा में उमड़ी भारी भीड़, अंतिम संस्कार कराने पहुंचे सौरभ सागर यह भी पढ़ें मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान तीन से सात दिन तक का होगा। इसमें पहले तीन दिन का सटीक एवं विस्तृत पूर्वानुमान होगा कि हवा में धूल का स्तर क्या होगा। हवा की गति क्या रहेगी। हवा किस दिशा से चलेगी तथा राजस्थान अथवा कहीं विदेश से तो धूल भरी आंधी आने के आसार नहीं हैं। इसके बाद के चार दिनों का मोटा-मोटा अनुमान रहेगा कि दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा उन दिनों में कैसी रहेगी। यह पूर्वानुमान नियमित तौर पर सीपीसीबी, ईपीसीए, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान सरकार को भेजा जाएगा। पूर्वानुमान के साथ ही एडवाइजरी जारी होगी कि इस दौरान स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।  मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ केजे रमेश ने बताया कि वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान जारी करने के लिए लगभग सारी तैयारी कर ली गई है। फिलहाल इसका ट्रायल करके देखा जा रहा है। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि इसके जरिये दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा बेहतर बनाए रखने में अधिक से अधिक मदद मिल सके।

दरअसल, सर्दियों के दौरान पिछले दो सालों से दिल्ली गैस चैंबर में तब्दील हो जा रही है। हालांकि, 15 अक्टूबर से 15 मार्च तक ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) भी लागू रहता है और केंद्रीय भूविज्ञान, वन एवं पर्यावरण मंत्रलय के अधीन सफर इंडिया भी वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान जारी करता है। हालांकि इसमें बहुत अधिक जानकारी नहीं होती है।

ऐसे में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) व पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) काफी समय से मौसम विभाग से सहयोग की मांग कर रहे थे। मौसम विभाग और आइआइटी, दिल्ली के वायुमंडलीय विज्ञान केंद्र के बीच इस आशय का पूर्वानुमान जारी करने के लिए तकनीकी सहयोग पर सहमति बन गई है। आइआइटी, दिल्ली और मौसम विभाग संयुक्त रूप से वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान जारी करेंगे, जो अपेक्षाकृत अधिक प्रामाणिक होगा।

मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान तीन से सात दिन तक का होगा। इसमें पहले तीन दिन का सटीक एवं विस्तृत पूर्वानुमान होगा कि हवा में धूल का स्तर क्या होगा। हवा की गति क्या रहेगी। हवा किस दिशा से चलेगी तथा राजस्थान अथवा कहीं विदेश से तो धूल भरी आंधी आने के आसार नहीं हैं। इसके बाद के चार दिनों का मोटा-मोटा अनुमान रहेगा कि दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा उन दिनों में कैसी रहेगी। यह पूर्वानुमान नियमित तौर पर सीपीसीबी, ईपीसीए, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान सरकार को भेजा जाएगा। पूर्वानुमान के साथ ही एडवाइजरी जारी होगी कि इस दौरान स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ केजे रमेश ने बताया कि वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान जारी करने के लिए लगभग सारी तैयारी कर ली गई है। फिलहाल इसका ट्रायल करके देखा जा रहा है। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि इसके जरिये दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा बेहतर बनाए रखने में अधिक से अधिक मदद मिल सके।

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