रैमकी कंपनी पर गुपचुप तरीके से फिर 25 लाख की ‘मेहरबानी’

शीशमबाड़ा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसाइक्लिंग प्लांट की जिम्मेदारी देख रही ‘दागी’ रैमकी कंपनी पर नगर निगम ने गुपचुप ढंग से फिर पचीस लाख रुपये की ‘मेहरबानी’ कर डाली। प्लांट में दुर्गंध को रोकने की जिम्मेदारी वैसे तो कंपनी की है, लेकिन कंपनी ने इसे निभाने से हाथ खड़े कर दिए। कंपनी का दावा है कि निगम के अनुबंध में ऐसी कोई शर्त नहीं है कि यह काम कंपनी देखेगी।शीशमबाड़ा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसाइक्लिंग प्लांट की जिम्मेदारी देख रही 'दागी' रैमकी कंपनी पर नगर निगम ने गुपचुप ढंग से फिर पचीस लाख रुपये की 'मेहरबानी' कर डाली। प्लांट में दुर्गंध को रोकने की जिम्मेदारी वैसे तो कंपनी की है, लेकिन कंपनी ने इसे निभाने से हाथ खड़े कर दिए। कंपनी का दावा है कि निगम के अनुबंध में ऐसी कोई शर्त नहीं है कि यह काम कंपनी देखेगी।   दुर्गंध रोकने को राज्य सरकार ने प्लांट की चाहरदीवारी चार-पांच फीट ऊपर करने के आदेश दिए हैं। कंपनी के पल्ला झाड़ लेने के बाद अब दीवार का काम नगर निगम 25 लाख रुपये के बजट से करा रहा है। निवर्तमान पार्षद के सवाल हैं कि अगर देखरेख निगम को ही करनी है तो फिर प्लांट को पीपीपी मोड में संचालन करने का क्या मकसद था। रैमकी कंपनी पहले से ही उत्तराखंड में दागी रही है। देहरादून आइएसबीटी निर्माण के हालात से हर कोई वाकिफ है। इसलिए निर्माण क्षेत्र में इस कंपनी से कोई भी काम नहीं लिया जा रहा था। बावजूद इसके नगर निगम ने 2016 में रैमकी कंपनी को प्लांट का जिम्मा सौंप दिया। उस दौरान भी नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठे थे, मगर अधिकारियों ने बड़े-बड़े दावे कर सवालों को शांत करा दिया।    28 दिन में पड़ोस के कमरे तक पहुंचा जांच का आदेश, जानिए पूरा मामला यह भी पढ़ें यही नहीं, प्लांट तैयार करने को जिंदल ग्रुप भी राजी था, लेकिन निगम की ओर से इतनी शर्ते लगा दीं गई कि जिंदल गु्रप पीछे हट गया। बाद में यही शर्ते रैमकी कंपनी के लिए हटा दी गई थीं। नगर निगम के अफसरों की रैमकी कंपनी से 'सांठगांठ' का नतीजा प्लांट के निर्माण के दौरान भी सामने आया। कंपनी मनमर्जी करती रही और प्लांट समय से तैयार नहीं हुआ। इसके लिए निगम को सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी में देरी को लेकर हुई शिकायत की सुनवाई में खड़ा रहना पड़ा। अब सूबे का यही पहला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट राज्य सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है।   दरअसल, दावा किया गया था कि यह देश का पहला ऐसा वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट है, जो पूरी कवर्ड है। इससे कोई दुर्गध बाहर नहीं आएगी, मगर नगर निगम और रैमकी कंपनी का ये दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। दुर्गध इतनी उठ रही कि लोग परेशान हैं और लगातार जन विरोध बढ़ता जा रहा। बाजार तक बंद कराए जा रहे। पिछले दिनों नगर निगम ने वहां अपने खर्च पर 500 पेड़ लगवाए थे। अब 25 लाख रुपये और खर्च कर रहा।   छात्र सीख रहे वर्षा जल संचय का पाठ, उगा रहे सब्जियां यह भी पढ़ें सीएम खुद उठा चुके हैं सवाल प्लांट के उद्घाटन पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व सहसपुर के विधायक सहदेव पुंडीर ने भी दुर्गंध उठना गलत बताया था। मुख्यमंत्री ने दुर्गंध खत्म करने को एंजाइम प्रयोग करने के लिए कहा था, लेकिन नगर निगम और कंपनी ने ऐसा नहीं किया। यही वजह है कि स्थानीय लोगों ने जल्द प्लांट पर ताला लगाने का अल्टीमेटम दिया हुआ है। नगर निगम ने रैमकी कंपनी को नोटिस भेजकर दुर्गंध दूर करने संबंधी उपाए करने के आदेश देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की लेकिन कंपनी ने गेंद निगम के पाले में ही सरका दी।  नई मुसीबत भी हो रही तैयार नगर निगम ने सहस्रधारा रोड से ट्रंचिंग ग्राउंड हटाकर वहां के ग्रामीणों की सालों पुरानी मुसीबत तो खत्म कर दी पर दूसरी जगह ग्रामीणों को स्थायी रूप से मुसीबत दे दी। लंबी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंचिंग ग्राउंड बंद करने के लिए बीती 30 नवंबर की तारीख तय की थी। इसके बाद एक दिसंबर से शहर का कूड़ा शीशमबाड़ा में डंप किया जा रहा है। इससे पहले शहर के कूड़े को हरिद्वार बाइपास स्थित ट्रांसफर स्टेशन ले जाया जा रहा। अब हाल यह हैं कि हरिद्वार बाइपास पर नया कूड़ाघर बनता जा रहा। यहां के लोग भी आंदोलन करने की रणनीति बना रहे।    सड़क हादसों की वजह है ट्रिपल ओ, जानिए क्या है ये यह भी पढ़ें अपर नगर आयुक्त डॉ. नीरज जोशी का कहना है कि कंपनी से अनुबंध के दौरान यह तय ही नहीं किया गया कि प्लांट से अलग निर्माण कार्य की देखरेख कौन करेगा। अब कंपनी इसका का अनुचित फायदा उठा रही। चूंकि जनसमस्या को देखकर दीवार तो बनानी ही है, लिहाजा निगम यह निर्माण कराएगा।

दुर्गंध रोकने को राज्य सरकार ने प्लांट की चाहरदीवारी चार-पांच फीट ऊपर करने के आदेश दिए हैं। कंपनी के पल्ला झाड़ लेने के बाद अब दीवार का काम नगर निगम 25 लाख रुपये के बजट से करा रहा है। निवर्तमान पार्षद के सवाल हैं कि अगर देखरेख निगम को ही करनी है तो फिर प्लांट को पीपीपी मोड में संचालन करने का क्या मकसद था। रैमकी कंपनी पहले से ही उत्तराखंड में दागी रही है। देहरादून आइएसबीटी निर्माण के हालात से हर कोई वाकिफ है। इसलिए निर्माण क्षेत्र में इस कंपनी से कोई भी काम नहीं लिया जा रहा था। बावजूद इसके नगर निगम ने 2016 में रैमकी कंपनी को प्लांट का जिम्मा सौंप दिया। उस दौरान भी नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठे थे, मगर अधिकारियों ने बड़े-बड़े दावे कर सवालों को शांत करा दिया। 

यही नहीं, प्लांट तैयार करने को जिंदल ग्रुप भी राजी था, लेकिन निगम की ओर से इतनी शर्ते लगा दीं गई कि जिंदल गु्रप पीछे हट गया। बाद में यही शर्ते रैमकी कंपनी के लिए हटा दी गई थीं। नगर निगम के अफसरों की रैमकी कंपनी से ‘सांठगांठ’ का नतीजा प्लांट के निर्माण के दौरान भी सामने आया। कंपनी मनमर्जी करती रही और प्लांट समय से तैयार नहीं हुआ। इसके लिए निगम को सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी में देरी को लेकर हुई शिकायत की सुनवाई में खड़ा रहना पड़ा। अब सूबे का यही पहला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट राज्य सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। 

दरअसल, दावा किया गया था कि यह देश का पहला ऐसा वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट है, जो पूरी कवर्ड है। इससे कोई दुर्गध बाहर नहीं आएगी, मगर नगर निगम और रैमकी कंपनी का ये दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। दुर्गध इतनी उठ रही कि लोग परेशान हैं और लगातार जन विरोध बढ़ता जा रहा। बाजार तक बंद कराए जा रहे। पिछले दिनों नगर निगम ने वहां अपने खर्च पर 500 पेड़ लगवाए थे। अब 25 लाख रुपये और खर्च कर रहा।

सीएम खुद उठा चुके हैं सवाल प्लांट के उद्घाटन पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व सहसपुर के विधायक सहदेव पुंडीर ने भी दुर्गंध उठना गलत बताया था। मुख्यमंत्री ने दुर्गंध खत्म करने को एंजाइम प्रयोग करने के लिए कहा था, लेकिन नगर निगम और कंपनी ने ऐसा नहीं किया। यही वजह है कि स्थानीय लोगों ने जल्द प्लांट पर ताला लगाने का अल्टीमेटम दिया हुआ है। नगर निगम ने रैमकी कंपनी को नोटिस भेजकर दुर्गंध दूर करने संबंधी उपाए करने के आदेश देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की लेकिन कंपनी ने गेंद निगम के पाले में ही सरका दी।

नई मुसीबत भी हो रही तैयार नगर निगम ने सहस्रधारा रोड से ट्रंचिंग ग्राउंड हटाकर वहां के ग्रामीणों की सालों पुरानी मुसीबत तो खत्म कर दी पर दूसरी जगह ग्रामीणों को स्थायी रूप से मुसीबत दे दी। लंबी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंचिंग ग्राउंड बंद करने के लिए बीती 30 नवंबर की तारीख तय की थी। इसके बाद एक दिसंबर से शहर का कूड़ा शीशमबाड़ा में डंप किया जा रहा है। इससे पहले शहर के कूड़े को हरिद्वार बाइपास स्थित ट्रांसफर स्टेशन ले जाया जा रहा। अब हाल यह हैं कि हरिद्वार बाइपास पर नया कूड़ाघर बनता जा रहा। यहां के लोग भी आंदोलन करने की रणनीति बना रहे। 

अपर नगर आयुक्त डॉ. नीरज जोशी का कहना है कि कंपनी से अनुबंध के दौरान यह तय ही नहीं किया गया कि प्लांट से अलग निर्माण कार्य की देखरेख कौन करेगा। अब कंपनी इसका का अनुचित फायदा उठा रही। चूंकि जनसमस्या को देखकर दीवार तो बनानी ही है, लिहाजा निगम यह निर्माण कराएगा।

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