लिंचिंग केसः खेद के बाद जयंत ने दी राहुल गांधी को बहस की चुनौती

लिंचिंग का मामला अब सत्ता पक्षा और विपक्ष के बीच बहस का नया विषय बनता जा रहा है. लिंचिंग मामले के 8 दोषियों को माला पहनाने के कारण खेद जताने वाले केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इस मसले पर खुली बहस की चुनौती दी है.लिंचिंग का मामला अब सत्ता पक्षा और विपक्ष के बीच बहस का नया विषय बनता जा रहा है. लिंचिंग मामले के 8 दोषियों को माला पहनाने के कारण खेद जताने वाले केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इस मसले पर खुली बहस की चुनौती दी है.  देश में लिंचिंग मामले को लेकर सत्ता पक्ष मुखर होती जा रही है. पिछले दिनों 2 केंद्रीय मंत्री लिंचिंग मामले के आरोप में जेल की हवा खाने वालों से मिलने गए तो मामले ने तूल पकड़ लिया. लेकिन अब सत्ता पक्ष इसे भुनाने की कोशिशों में जुट गई है.  पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने झारखंड के रामगढ़ में एक मुस्लिम मीट व्यापारी को पीट-पीटकर मारने के आरोपी 8 हिंदूओं को माला पहनाकर सम्मानित किया था, जिसके बाद विवाद बढ़ता ही चला गया. बाद में उन्होंने इसके लिए खेद भी जताया.   सामने से आकर लड़ें राहुल  लेकिन अब जयंत सिन्हा ने इस मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लिंचिंग केस पर बहस करने की चुनौती दे डाली है. उन्होंने कहा, 'यह इसलिए है क्योंकि वह (राहुल गांधी) निजी तौर उन पर हमला करने लगे हैं.'  सिन्हा ने ट्विटर के माध्यम से पूरे मामले पर खेद जताते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को यदि लगता है कि उनका व्यक्ति आचार-व्यवहार सही नहीं है तो उन्हें मामले में सभ्य तरीके से बहस करनी चाहिए.  नागर विमानन राज्य मंत्री सिन्हा ने लिखा, 'मैं राहुल गांधी को सीधी बहस का न्योता देता हूं.' साथ ही उन्होंने एक नोट भी साझा किया जिसमें 29 जून, 2017 को रामगढ़ में हुई घटना को 'परेशान करने वाला और भयानक' बताया गया है.'  सिन्हा ने कहा,  '(राहुल) गांधी को अपने सोशल मीडिया हैंडल के पीछे छुपकर लुका-छुपी वाली राजनीति से बाहर निकलने दें...' उन्होंने राहुल की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा, 'कांग्रेस अध्यक्ष ने उन पर 'व्यक्तिगत स्तर' पर हमला किया है.  सिन्हा ने कहा, 'उन्होंने मेरी शिक्षा, मूल्यों और मानवता की निंदा की है. मैं उनको रामगढ़ लिंचिंग केस के मामले में हिंदी या अंग्रेजी में सीधी बहस की चुनौती देता हूं.'  राहुल ने डिग्री पर उठाए थे सवाल  राहुल गांधी की ओर से मोर्चा खोलने के बाद लिंचिंग के आरोपियों को सम्मानित करने के बाद आरोपों में घिरे जयंत सिन्हा ने बाद में अपनी गलती स्वीकारी और इस पर खेद जताया.  खेद जताते हुए सिन्हा ने कहा था, 'मैंने कई बार कहा कि यह मामला सब-जुडिस है. इस मसले पर लंबी चर्चा करना सही नहीं होगा. सभी को न्याय मिलेगा और दोषियों को सजा मिलेगी. जो निर्दोष हैं, उनको न्याय जरूर मिलेगा. जहां तक माला पहनाने का मामला है, तो इससे गलत इम्प्रेशन गया है. इसका मुझे खेद और दुख है.'  इससे पहले राहुल ने ट्वीट कर जयंत सिन्हा को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र का ओहदा निरस्त करने वाली ऑनलाइन पिटीशन पर समर्थन मांगा. उन्होंने कहा, 'अगर एक सुशिक्षित सांसद और केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा का लिंचिंग के मामले में दोषी अपराधियों को माला पहनाने और सम्मानित करने का दृश्य आपको घृणा से भर देता है, तो इस लिंक पर क्लिक कर इस पिटीशन का समर्थन करें.'  पिता का नहीं मिला समर्थन  हालांकि इस प्रकरण पर जयंत को अपने पिता का समर्थन नहीं मिला. इस मामले पर यशवंत सिन्हा ने अपने बेटे की आलोचना की थी. यशवंत ने ट्वीट करके कहा था कि वह अपने बेटे के कृत्य का समर्थन नहीं करते. साथ ही उन्होंने ट्विटर पर आलोचना करने वालों को भी जवाब दिया.  29 जून 2017 को झारखंड के रामगढ़ में भीड़ ने बीफ ले जाने के शक में मारे गए युवक (अलीमुद्दीन अंसारी) की हत्या के 8 दोषियों को झारखंड हाई कोर्ट ने जमानत दे दी. जमानत मिलने के बाद जयंत ने पिछले हफ्ते (6 जुलाई) को माला पहनाकर स्वागत किया था. साथ ही बीजेपी जिला कार्यालय में मिठाई इनकी जमानत पर बांटी गई थी.  इस हत्‍याकांड में 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है. वहीं, एक नाबालिग भी इसमें शामिल है, जिसे बाल सुधार गृह भेजा गया है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता बीएन त्रिपाठी द्वारा दिए गए साक्ष्य और बहस को मानते हुए कोर्ट ने हत्या के दौरान बनाए गए वीडियो फुटेज को सबूत मानने से इनकार कर दिया.  इस वजह से 8 लोगों को जमानत मिल गई. 3 लोगों की जमानत के लिए अर्जी नहीं लगाई गई थी. इस वजह से उन्‍हें जमानत नहीं मिल सकी थी.

देश में लिंचिंग मामले को लेकर सत्ता पक्ष मुखर होती जा रही है. पिछले दिनों 2 केंद्रीय मंत्री लिंचिंग मामले के आरोप में जेल की हवा खाने वालों से मिलने गए तो मामले ने तूल पकड़ लिया. लेकिन अब सत्ता पक्ष इसे भुनाने की कोशिशों में जुट गई है.

पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने झारखंड के रामगढ़ में एक मुस्लिम मीट व्यापारी को पीट-पीटकर मारने के आरोपी 8 हिंदूओं को माला पहनाकर सम्मानित किया था, जिसके बाद विवाद बढ़ता ही चला गया. बाद में उन्होंने इसके लिए खेद भी जताया.

सामने से आकर लड़ें राहुल

लेकिन अब जयंत सिन्हा ने इस मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लिंचिंग केस पर बहस करने की चुनौती दे डाली है. उन्होंने कहा, ‘यह इसलिए है क्योंकि वह (राहुल गांधी) निजी तौर उन पर हमला करने लगे हैं.’

सिन्हा ने ट्विटर के माध्यम से पूरे मामले पर खेद जताते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को यदि लगता है कि उनका व्यक्ति आचार-व्यवहार सही नहीं है तो उन्हें मामले में सभ्य तरीके से बहस करनी चाहिए.

नागर विमानन राज्य मंत्री सिन्हा ने लिखा, ‘मैं राहुल गांधी को सीधी बहस का न्योता देता हूं.’ साथ ही उन्होंने एक नोट भी साझा किया जिसमें 29 जून, 2017 को रामगढ़ में हुई घटना को ‘परेशान करने वाला और भयानक’ बताया गया है.’

सिन्हा ने कहा,  ‘(राहुल) गांधी को अपने सोशल मीडिया हैंडल के पीछे छुपकर लुका-छुपी वाली राजनीति से बाहर निकलने दें…’ उन्होंने राहुल की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष ने उन पर ‘व्यक्तिगत स्तर’ पर हमला किया है.

सिन्हा ने कहा, ‘उन्होंने मेरी शिक्षा, मूल्यों और मानवता की निंदा की है. मैं उनको रामगढ़ लिंचिंग केस के मामले में हिंदी या अंग्रेजी में सीधी बहस की चुनौती देता हूं.’

राहुल ने डिग्री पर उठाए थे सवाल

राहुल गांधी की ओर से मोर्चा खोलने के बाद लिंचिंग के आरोपियों को सम्मानित करने के बाद आरोपों में घिरे जयंत सिन्हा ने बाद में अपनी गलती स्वीकारी और इस पर खेद जताया.

खेद जताते हुए सिन्हा ने कहा था, ‘मैंने कई बार कहा कि यह मामला सब-जुडिस है. इस मसले पर लंबी चर्चा करना सही नहीं होगा. सभी को न्याय मिलेगा और दोषियों को सजा मिलेगी. जो निर्दोष हैं, उनको न्याय जरूर मिलेगा. जहां तक माला पहनाने का मामला है, तो इससे गलत इम्प्रेशन गया है. इसका मुझे खेद और दुख है.’

इससे पहले राहुल ने ट्वीट कर जयंत सिन्हा को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र का ओहदा निरस्त करने वाली ऑनलाइन पिटीशन पर समर्थन मांगा. उन्होंने कहा, ‘अगर एक सुशिक्षित सांसद और केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा का लिंचिंग के मामले में दोषी अपराधियों को माला पहनाने और सम्मानित करने का दृश्य आपको घृणा से भर देता है, तो इस लिंक पर क्लिक कर इस पिटीशन का समर्थन करें.’

पिता का नहीं मिला समर्थन

हालांकि इस प्रकरण पर जयंत को अपने पिता का समर्थन नहीं मिला. इस मामले पर यशवंत सिन्हा ने अपने बेटे की आलोचना की थी. यशवंत ने ट्वीट करके कहा था कि वह अपने बेटे के कृत्य का समर्थन नहीं करते. साथ ही उन्होंने ट्विटर पर आलोचना करने वालों को भी जवाब दिया.

29 जून 2017 को झारखंड के रामगढ़ में भीड़ ने बीफ ले जाने के शक में मारे गए युवक (अलीमुद्दीन अंसारी) की हत्या के 8 दोषियों को झारखंड हाई कोर्ट ने जमानत दे दी. जमानत मिलने के बाद जयंत ने पिछले हफ्ते (6 जुलाई) को माला पहनाकर स्वागत किया था. साथ ही बीजेपी जिला कार्यालय में मिठाई इनकी जमानत पर बांटी गई थी.

इस हत्‍याकांड में 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है. वहीं, एक नाबालिग भी इसमें शामिल है, जिसे बाल सुधार गृह भेजा गया है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता बीएन त्रिपाठी द्वारा दिए गए साक्ष्य और बहस को मानते हुए कोर्ट ने हत्या के दौरान बनाए गए वीडियो फुटेज को सबूत मानने से इनकार कर दिया.

इस वजह से 8 लोगों को जमानत मिल गई. 3 लोगों की जमानत के लिए अर्जी नहीं लगाई गई थी. इस वजह से उन्‍हें जमानत नहीं मिल सकी थी.

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