सावन में करें मृत्युंजय जाप, पर न करें ये गलती

भगवान शिव की पूजा करने के लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना होता बल्कि वो थोड़े में ही आपसे प्रसन्न हो जाते हैं। एक बेल पत्र से और दूध जल से भी आप उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं ताकि आप पर उनकी कृपा बनी रहे। सावन के महीने में लोग शिवजी को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग तरीके खोजते हैं और चाहते हैं सावन का महीना अच्छा बीते और हर बार ऐसा ही कुछ हो। भगवान शिव माता पार्वती की कृपा पाने के लिए आपको भगवान शिव के एक मंत्र को जपना होगा। कहा जाता है इस मंत्र से आपकी सभी मनोकामना पूरी होती है। इस मंत्र को जपने के लिए आपको कुछ बातें ध्यान में रखनी होंगी ताकि भगवान शिव आपसे रुष्ठ न हो।

आपने भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र के बारे में तो सुना ही होगा जिस पर ये कहा जाता है कि इस मंत्र को हमेशा ही सही पढ़ना चाहिए नहीं तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है। भगवान शिव आपसे नाराज़ हो सकते हैं और आपके काम बनने की जगह बिगड़ भी सकते हैं। तो इसी मंत्र को जपने के लिए कुछ नियम बता देते हैं जिन्हें आपको हमेशा याद रखना होगा।

* जाप करते समय आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि मंत्र का उच्चारण सही से हो और सुद्धता के साथ किया जाए। ऐसे में आप एक निर्धारित संख्या भी ध्यान में रखलें और उतनी ही बार जाप करें।

* मंत्र जाप की संख्या आप रोज़ बढ़ा सकते हैं लेकिन इसे कभी भी कम न करें। जाप करने बैठें तो पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठे।

* जाप करने के लिए आप कुश का आसान बिछा सकते हैं या फिर कोई भी साफ़ आसान। इसके लिए रोज़ जगह ना बदले एक ही जगह बैठकर जप करें।

* रुद्राक्ष शिवजी के प्रिय होते हैं इसलिए जाप इसी माला से करें और अपने मन को काबू में रखकर ये जाप करें।

* मंत्र का जाप करते समय धूप जलाएं। मंत्र का जाप करते वक्त आलस्य या उबासी को आस पास न भटकने दें।

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