स्कूल में छुट्टी के लिए छात्र ने दी बम होने की झूठी सूचना, मचा हड़कम्प!

लखनऊ: राजधानी लखनऊ के कृष्णानगर इलाके में बुधवार की सुबह एक स्कूल में बम रखे होने की सूचना मिली। स्कूल में बम की सूचना ने पुलिस के होश उड़ा दिये। इसके बाद भारी पुलिस, बम स्क्वायड व डाग स्क्वायड की टीम मौके पर पहुंची छानबीन की तो बम की सूचना गलत निकली।


एसपी पूर्वी सर्वेश कुमार मिश्र ने बताया कि कृष्णानगर के विजयनगर इलाके में कैम्ब्रिज नाम से एक प्राइवेट स्कूल है। रोज की तरह बुधवार को स्कूल खुला था और बच्चे मौजूद थे। इस बीच किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम पर फोन कर स्कूल में बम रखे होने की सूचना दी। पुलिस कंट्रोल रूम पर बम की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन के हाथ-पैर फूल गये।

आनन-फानन में भारी पुलिस मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने स्कूल प्रशासन को बम रखे होने के बारे में बताया पर बच्चों को इस बारे में कुछ नहीं बताया ताकि किसी तरह का कोई पैनिक ने बने। इसके बाद पुलिस ने स्कूल प्रशासन की मदद से पूरे स्कूल को खाली करा लिया।

पुलिस ने छानबीन के लिए मौके पर बम निरोधक दस्ते व डाग स्क्वायड को बुलाया। इसके बाद बम निरोधक दस्ते व डाग स्क्वायड ने स्कूल में चप्पे-चप्पे की तलाशी व चेकिंग की पर कहीं बम जैसी कोई वस्तु नहीं मिली। बम की सूचना झूठी निकले के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली।

अचानक स्कूल में भारी संख्या में पुलिस बल को देख वहां लोगों की भीड़ भी लग गयी। स्कूल प्रशासन ने फौरन बच्चों के अभिभावकों को फोन कर बताया। इसके बाद बच्चे के अभिभावक हैरान व परेशान मौके पर पहुंचे और अपने-अपने बच्चों को वहां से लेकर वापस घर चले गये। करीब दो घंटे की चेकिंग के बाद जब स्कूल में कुछ नहीं मिला तो पुलिस वापस लौट गयी।

 

कक्षा 6 के छात्रा ने दी थी झूठी सूचना
बम की सूचना देने वाले नम्बर को पुलिस ने जब सर्विलांस की मदद से पता किया तो वह बंद मिला। इसके बाद पुलिस ने जब उसकी लोकेशन पता की तो लोकेशन कनौसी के एकतानगर में मिली। सिमकार्ड किसी डीके मिश्र के नाम पर आवंटित था। इसके बाद पुलिस ने डीके मिश्र को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया तो पता चला कि उनका मोहित खुद कैम्ब्रिज स्कूल में कक्षा -6 में पढ़ता है। इसके बाद पुलिस पूरा माजरा समझ गयी। पुलिस ने डीके मिश्र के बेटे से बातचीत की तो उसने बताया कि सुबह उसने ही अपने पिता के मोबाइल नम्बर से पुलिस कंट्रोल रूम को स्कूल में बम की झूठी सूचना दी थी। मोहित का कहना है कि उसका स्कूल जाने का मन नहीं था और इसी के चलते उसने इस तरह की शरारत को अंजाम दिया था।

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