हथिनी कुंड बैराज के पानी का यमुना नगर में कहर, दोपहर बाद दिल्ली पर संकट

उत्तर भारत में मॉनसून ने धमाकेदार एंट्री ली है. मॉनसून की बारिश इतनी जबरदस्त हो रही है कि अब इसने आफत का रूप ले लिया है. देश की राजधानी दिल्ली पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. शनिवार शाम को ही दिल्ली में यमुना खतरे के निशान से 47 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी.उत्तर भारत में मॉनसून ने धमाकेदार एंट्री ली है. मॉनसून की बारिश इतनी जबरदस्त हो रही है कि अब इसने आफत का रूप ले लिया है. देश की राजधानी दिल्ली पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. शनिवार शाम को ही दिल्ली में यमुना खतरे के निशान से 47 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी.  रविवार सुबह 6 बजे दिल्ली में यमुना का जलस्तर 205.44 मीटर तक पहुंच गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि दोपहर 3 बजे तक ये 205.65 मीटर तक पहुंच जाएगा.      रविवार शाम तक दिल्ली के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने का खतरा है. हरियाणा के हथिनी कुंड से 6 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद शनिवार देर रात मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और बाढ़ से निपटने के इंतजामों का जायजा लिया.  दिल्ली में बाढ़ से बचाव की तैयारियां चल रही हैं, यमुना से सटे निचले इलाकों में रहनेवाले लोगों को हटाया जा रहा है. लेकिन, हथिनी कुंड से छोड़े गए पानी से बाढ़ का ट्रेलर दिल्ली से करीब पौने दो सौ किलोमीटर दूर यमुनानगर में दिखा. वहां के कई इलाके पानी में डूब गए हैं, अब प्रशासन लोगों को यमुना से दूर रहने के लिए सतर्क कर रहा है.  दरअसल, हथिनीकुंड और दिल्ली के बीच यमुनानगर पड़ता है. जहां बैराज से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी से निचले इलाकों में बाढ़ आ गयी है. जब दिल्ली ये पानी पहुंचेगा तो राजधानी के निचले इलाकों का भी हाल बिल्कुल यमुनानगर जैसे ही होने की आशंका है.  हथिनी कुंड से निकले पानी का प्रकोप यमुनानगर में तैनात अफसरों को भी झेलना पड़ा. बाढ़ का जायजा लेने निकले जिला विकास और पंचायत अधिकारी की गाड़ी पानी ज्यादा होने की वजह से आगे नहीं बढ़ पाई. बाढ़ की वजह से यमुनानगर के ज्यादातर इलाकों में लोग घर की छतों पर आसरा लेने के मजबूर है. प्रशासन ने भी मुनादी करवाकर लोगों को यमुना की लहरों से दूर रहने के लिए कहा है.     बारिश से बेहाल पहाड़  पानी से खतरा सिर्फ दिल्ली को ही नहीं है, पहाड़ भी पानी के प्रहार से बेहाल हैं. पहाड़ों पर बारिश और बाढ़ का कोहराम जारी है. हिमाचल प्रदेश में मनाली से मंडी तक कुल्लू से कांगड़ा तक बेहिसाब मूसलाधार से बेहाल हैं. बारिश के पानी से नदी-नाले उफान मार रहे हैं, सूबे के अलग-अलग हिस्सों से तबाही की खौफनाक तस्वीरें आ रही हैं.  हिमाचल जैसा ही हाल उत्तराखंड का भी है. जगह-जगह से पहाड़ से मलबा ऐसे ही गिर रहा है. पहाड़ों पर बादलों का बरसना बदस्तूर जारी है. मगर डर सिर्फ बरसात के बाद बाढ़ का ही नहीं है बल्कि बारिश और बाढ़ के साथ भूस्खलन की समस्या से जानलेवा खतरा मंडरा रहा है.पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने शिमला का हाल-बेहाल कर दिया है. जिंदगी ऐसे ही घर से बाहर छाते के साए में गुजर रही है. खूबसूरत शिमला में बारिश और तेज हवाओं में जगह-जगह पेड़ उखड़ गए हैं.  यूपी-बिहार में बारिश का कहर  यूपी और बिहार में भी रूक-रुक कर तेज बारिश हो रही है. शनिवार को बिहार में कुछ घंटे की बारिश ने कई शहरों को पानी-पानी कर दिया. आसमान से बरसती आफत से 6 राज्यों में 523 लोगों की मौत हो चुकी है.  गृह मंत्रालय के नेशनल इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर (एनईआरसी) के अनुसार बाढ़ एवं बारिश के चलते महाराष्ट्र में 138, केरल में 125, पश्चिम बंगाल में 116, गुजरात में 52 और असम में 34 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 58 लोगों की मौत हुई है.  ओलावृष्टि और बारिश से महाराष्ट्र के 26, पश्चिम बंगाल में 22, असम में 21, केरल में 14 और गुजरात में 10 जिले प्रभावित हैं. एनईआरसी के अनुसार असम में 10.17 लाख लोग बारिश एवं बाढ़ से त्रस्त हैं, जिनमें से 2.17 लाख लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं.

रविवार सुबह 6 बजे दिल्ली में यमुना का जलस्तर 205.44 मीटर तक पहुंच गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि दोपहर 3 बजे तक ये 205.65 मीटर तक पहुंच जाएगा.    

रविवार शाम तक दिल्ली के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने का खतरा है. हरियाणा के हथिनी कुंड से 6 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद शनिवार देर रात मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और बाढ़ से निपटने के इंतजामों का जायजा लिया.

दिल्ली में बाढ़ से बचाव की तैयारियां चल रही हैं, यमुना से सटे निचले इलाकों में रहनेवाले लोगों को हटाया जा रहा है. लेकिन, हथिनी कुंड से छोड़े गए पानी से बाढ़ का ट्रेलर दिल्ली से करीब पौने दो सौ किलोमीटर दूर यमुनानगर में दिखा. वहां के कई इलाके पानी में डूब गए हैं, अब प्रशासन लोगों को यमुना से दूर रहने के लिए सतर्क कर रहा है.

दरअसल, हथिनीकुंड और दिल्ली के बीच यमुनानगर पड़ता है. जहां बैराज से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी से निचले इलाकों में बाढ़ आ गयी है. जब दिल्ली ये पानी पहुंचेगा तो राजधानी के निचले इलाकों का भी हाल बिल्कुल यमुनानगर जैसे ही होने की आशंका है.

हथिनी कुंड से निकले पानी का प्रकोप यमुनानगर में तैनात अफसरों को भी झेलना पड़ा. बाढ़ का जायजा लेने निकले जिला विकास और पंचायत अधिकारी की गाड़ी पानी ज्यादा होने की वजह से आगे नहीं बढ़ पाई. बाढ़ की वजह से यमुनानगर के ज्यादातर इलाकों में लोग घर की छतों पर आसरा लेने के मजबूर है. प्रशासन ने भी मुनादी करवाकर लोगों को यमुना की लहरों से दूर रहने के लिए कहा है.

पानी से खतरा सिर्फ दिल्ली को ही नहीं है, पहाड़ भी पानी के प्रहार से बेहाल हैं. पहाड़ों पर बारिश और बाढ़ का कोहराम जारी है. हिमाचल प्रदेश में मनाली से मंडी तक कुल्लू से कांगड़ा तक बेहिसाब मूसलाधार से बेहाल हैं. बारिश के पानी से नदी-नाले उफान मार रहे हैं, सूबे के अलग-अलग हिस्सों से तबाही की खौफनाक तस्वीरें आ रही हैं.

हिमाचल जैसा ही हाल उत्तराखंड का भी है. जगह-जगह से पहाड़ से मलबा ऐसे ही गिर रहा है. पहाड़ों पर बादलों का बरसना बदस्तूर जारी है. मगर डर सिर्फ बरसात के बाद बाढ़ का ही नहीं है बल्कि बारिश और बाढ़ के साथ भूस्खलन की समस्या से जानलेवा खतरा मंडरा रहा है.पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने शिमला का हाल-बेहाल कर दिया है. जिंदगी ऐसे ही घर से बाहर छाते के साए में गुजर रही है. खूबसूरत शिमला में बारिश और तेज हवाओं में जगह-जगह पेड़ उखड़ गए हैं.

यूपी-बिहार में बारिश का कहर

यूपी और बिहार में भी रूक-रुक कर तेज बारिश हो रही है. शनिवार को बिहार में कुछ घंटे की बारिश ने कई शहरों को पानी-पानी कर दिया. आसमान से बरसती आफत से 6 राज्यों में 523 लोगों की मौत हो चुकी है.

गृह मंत्रालय के नेशनल इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर (एनईआरसी) के अनुसार बाढ़ एवं बारिश के चलते महाराष्ट्र में 138, केरल में 125, पश्चिम बंगाल में 116, गुजरात में 52 और असम में 34 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 58 लोगों की मौत हुई है.

ओलावृष्टि और बारिश से महाराष्ट्र के 26, पश्चिम बंगाल में 22, असम में 21, केरल में 14 और गुजरात में 10 जिले प्रभावित हैं. एनईआरसी के अनुसार असम में 10.17 लाख लोग बारिश एवं बाढ़ से त्रस्त हैं, जिनमें से 2.17 लाख लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं.

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